शरद पूर्णिमा 2026 रविवार, 25 अक्टूबर को है। पूर्णिमा तिथि इस दिन सुबह 11:57 बजे आरंभ होकर 26 अक्टूबर सुबह 9:42 बजे समाप्त होती है — इसलिए जागरण, चंद्र-दर्शन और खीर की परंपरा 25 अक्टूबर की रात को निभाई जाएगी, न कि 26 की रात। बंगाल और पूर्वी भारत में यही रात कोजागरी लक्ष्मी पूजा के रूप में मनाई जाती है, जो दीपावली की लक्ष्मी पूजा से अलग पर्व है। इस वर्ष एक बात ध्यान देने योग्य है — 25 अक्टूबर को चाँद सूर्यास्त से लगभग 42–44 मिनट पहले ही उठ जाता है, इसलिए सूर्यास्त के समय वह पूर्व में पहले से दिखाई देगा। नीचे 30 शहरों की चंद्रोदय तालिका दी है।
इस लेख में
- शरद पूर्णिमा 2026 एक नज़र में
- 25 या 26 अक्टूबर — किस रात को मनाएँ?
- शरद पूर्णिमा 2026 चंद्रोदय समय — 30 शहरों की तालिका
- खीर की परंपरा और उसका वास्तविक पक्ष
- कोजागरी लक्ष्मी पूजा — बंगाल की शरद पूर्णिमा
- शरद पूर्णिमा के शास्त्रीय उपाय
- शरद पूर्णिमा का सांस्कृतिक महत्व
- शरद पूर्णिमा के बाद: 2026 का आगे का क्रम
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- स्रोत
शरद पूर्णिमा 2026 एक नज़र में
| शरद पूर्णिमा | रविवार, 25 अक्टूबर 2026 |
| पूर्णिमा तिथि आरंभ | 25 अक्टूबर, सुबह 11:57 |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 26 अक्टूबर, सुबह 9:42 |
| मास और पक्ष | आश्विन, शुक्ल पक्ष |
| निर्णय का नियम | निशीथ काल (मध्यरात्रि) में पूर्णिमा की उपस्थिति |
| चंद्रोदय 25 अक्टूबर | कोलकाता शाम 4:18 · दिल्ली शाम 4:57 · मुंबई शाम 5:25 (सूर्यास्त से पहले) |
| निशीथ काल (25–26 की रात) | कोलकाता रात 10:55–11:45 · दिल्ली रात 11:39–12:31 |
| ठीक पूर्ण चंद्र (खगोलीय) | 26 अक्टूबर, सुबह 9:41:48 — तिथि-समाप्ति के क्षण पर |
| रात्रि परंपराएँ | 25 अक्टूबर की रात — चंद्र-दर्शन, खीर, जागरण |
| कोजागरी लक्ष्मी पूजा | 25 अक्टूबर की रात्रि |
| व्रत पारण / स्नान-दान | 26 अक्टूबर, सुबह 9:42 से पहले |
| अन्य नाम | कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा, कौमुदी पूर्णिमा |
तिथि-स्रोत: PanchangBodh का शरद पूर्णिमा पृष्ठ (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश) — तिथि के आरंभ-अंत के क्षण। तारीख की स्वतंत्र पुष्टि DekhoPanchang (दिल्ली, IST) और BhaktiBharat से, दोनों 25 अक्टूबर 2026 (रविवार) ही देते हैं। निर्णय-नियम “निशीथ काल” DekhoPanchang पर अंकित है। नीचे दी चंद्रोदय, सूर्यास्त और निशीथ काल की तालिकाएँ हमारी स्वतंत्र खगोलीय गणना से हैं (JPL DE421 एफ़ेमेरिस), क्योंकि किसी पंचांग स्रोत पर शरद पूर्णिमा 2026 की शहर-वार चंद्रोदय तालिका नहीं मिली। गणना-विधि और उसकी जाँच नीचे खुलकर दी गई है।
25 या 26 अक्टूबर — किस रात को मनाएँ?
यह इस वर्ष का असली भ्रम है, और इसे समझ लेना ज़रूरी है। पूर्णिमा तिथि 26 अक्टूबर की सुबह 9:42 तक चलती है। कुछ कैलेंडर इसी कारण 26 अक्टूबर को “आश्विन पूर्णिमा” के रूप में अलग से दर्ज कर देते हैं, जिससे लगता है कि पर्व दो दिन है।
पर शरद पूर्णिमा का पूरा स्वरूप रात्रि-प्रधान है — चंद्र-दर्शन, खीर, जागरण और कोजागरी पूजा, सब रात के कार्य हैं। इसलिए निर्णय सूर्योदय से नहीं, निशीथ काल से होता है।
निशीथ काल का नियम — यही पूरा गणित है
निशीथ काल का अर्थ है रात्रि का मध्य भाग, यानी सूर्यास्त और अगले सूर्योदय के बीच का मध्यबिंदु — स्थूल रूप से आधी रात के आसपास। शरद पूर्णिमा के लिए शास्त्रीय नियम है: जिस रात के निशीथ काल में पूर्णिमा तिथि उपस्थित हो, वही रात पर्व की रात है। अब दोनों रातों पर यह नियम लगाकर देखिए:
- 25 अक्टूबर की रात: पूर्णिमा उसी दिन सुबह 11:57 पर लग चुकी है और 26 की सुबह 9:42 तक चलेगी। इसका मतलब 25-26 की मध्यरात्रि पूरी तरह पूर्णिमा के भीतर पड़ती है। निशीथ काल में पूर्णिमा उपस्थित है। ✔
- 26 अक्टूबर की रात: पूर्णिमा उसी दिन सुबह 9:42 पर समाप्त हो चुकी है। 26-27 की मध्यरात्रि में कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा चल रही होगी, पूर्णिमा नहीं। ✘
इसलिए सभी रात्रि-परंपराएँ 25 अक्टूबर की रात को होंगी। जो हिस्सा 26 अक्टूबर पर पड़ता है वह दिन का है — स्नान, दान और पूर्णिमा व्रत का पारण, जो सुबह 9:42 से पहले किया जाता है।
परंपरागत गणना में सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात पंद्रह बराबर मुहूर्तों में बाँटी जाती है और बीच वाला यानी आठवाँ मुहूर्त निशीथ कहलाता है। रात की लंबाई हर शहर में अलग होने से यह खंड भी हर जगह अलग पड़ता है। 25–26 अक्टूबर 2026 की रात के लिए:
| शहर | सूर्यास्त 25 अक्टूबर | सूर्योदय 26 अक्टूबर | निशीथ काल |
|---|---|---|---|
| गुवाहाटी | शाम 4:45 | सुबह 5:29 | रात 10:41 – 11:32 |
| कोलकाता | शाम 5:02 | सुबह 5:38 | रात 10:55 – 11:45 |
| पटना | शाम 5:12 | सुबह 5:55 | रात 11:08 – 11:59 |
| वाराणसी | शाम 5:21 | सुबह 6:03 | रात 11:16 – 12:07 |
| लखनऊ | शाम 5:27 | सुबह 6:13 | रात 11:24 – 12:15 |
| चेन्नई | शाम 5:43 | सुबह 6:02 | रात 11:28 – 12:17 |
| दिल्ली | शाम 5:40 | सुबह 6:30 | रात 11:39 – 12:31 |
| भोपाल | शाम 5:45 | सुबह 6:23 | रात 11:39 – 12:29 |
| बेंगलुरु | शाम 5:54 | सुबह 6:12 | रात 11:39 – 12:28 |
| मुंबई | शाम 6:07 | सुबह 6:37 | रात 11:57 – 12:47 |
12 के बाद लिखा समय 26 अक्टूबर की मध्यरात्रि के बाद का है। गुवाहाटी और मुंबई के निशीथ काल में लगभग सवा घंटे का अंतर है — इसीलिए “आधी रात” को एक राष्ट्रीय समय मानकर नहीं चला जा सकता। 2026 में यह अंतर तारीख़ नहीं बदलता, क्योंकि हर शहर का निशीथ काल 11:57–9:42 की पूर्णिमा-खिड़की के भीतर है। जिस वर्ष तिथि मध्यरात्रि के आसपास टूटती है, वहाँ यही कुछ मिनट पूर्व और पश्चिम भारत के लिए अलग तारीख़ तय कर देते हैं।
स्रोतों में जहाँ भेद मिला
ईमानदारी से एक बात दर्ज करना ज़रूरी है। जिस पंचांग स्रोत से हमने तिथि-समय लिए, उसके शरद पूर्णिमा पृष्ठ पर आरंभ “25 अक्टूबर 11:57 AM” लिखा है, पर उसी साइट की पूर्णिमा सूची वाले पृष्ठ के कार्ड में आरंभ की तारीख “26 अक्टूबर” छपी है — जबकि उसी कार्ड के नीचे का वाक्य फिर 25 अक्टूबर ही कहता है। यह स्पष्ट रूप से सूची-पृष्ठ की तारीख-लेबलिंग की चूक है, क्योंकि समय (11:57 और 9:42) दोनों जगह एक ही हैं और कोई तिथि अपनी समाप्ति से पहले आरंभ नहीं हो सकती। इसलिए हम 25 अक्टूबर 11:57 को ही आरंभ मान रहे हैं, और यह दो अन्य स्रोतों की तारीख से भी मेल खाता है।
इस तरह के भेद पंचांग-कैलेंडरों में आम हैं — इसी महीने अष्टमी-नवमी को लेकर भी ऐसा ही भ्रम था, जिसका गणित हमने बंगाली पंजिका और पंचांग के अंतर वाले लेख में खोला है।
शरद पूर्णिमा 2026 चंद्रोदय समय — 30 शहरों की तालिका
अधिकतर लेख शरद पूर्णिमा के लिए एक ही चंद्रोदय समय छाप देते हैं, जो पूरे भारत पर लागू नहीं होता — गुवाहाटी और मुंबई के बीच इस रात लगभग 85 मिनट का अंतर है। जिन पंचांग स्रोतों की हमने जाँच की, उनमें किसी पर शरद पूर्णिमा 2026 की शहर-वार तालिका नहीं थी, इसलिए यह तालिका स्वतंत्र खगोलीय गणना से बनाई है — विधि और उसकी जाँच नीचे खुलकर दी है।
| शहर | चंद्रोदय 25 अक्टूबर | सूर्यास्त | चाँद सूर्यास्त से |
|---|---|---|---|
| गुवाहाटी | शाम 4:00 | शाम 4:45 | 44 मिनट पहले |
| अगरतला | शाम 4:05 | शाम 4:49 | 44 मिनट पहले |
| सिलीगुड़ी | शाम 4:13 | शाम 4:58 | 44 मिनट पहले |
| मालदा | शाम 4:16 | शाम 5:00 | 44 मिनट पहले |
| कृष्णानगर | शाम 4:17 | शाम 5:01 | 44 मिनट पहले |
| बहरामपुर | शाम 4:17 | शाम 5:01 | 44 मिनट पहले |
| कोलकाता | शाम 4:18 | शाम 5:02 | 44 मिनट पहले |
| हावड़ा | शाम 4:18 | शाम 5:02 | 44 मिनट पहले |
| दुर्गापुर | शाम 4:21 | शाम 5:05 | 44 मिनट पहले |
| आसनसोल | शाम 4:23 | शाम 5:07 | 43 मिनट पहले |
| जमशेदपुर | शाम 4:27 | शाम 5:10 | 43 मिनट पहले |
| पटना | शाम 4:28 | शाम 5:12 | 43 मिनट पहले |
| राँची | शाम 4:30 | शाम 5:13 | 43 मिनट पहले |
| भुवनेश्वर | शाम 4:31 | शाम 5:14 | 43 मिनट पहले |
| वाराणसी | शाम 4:37 | शाम 5:21 | 43 मिनट पहले |
| लखनऊ | शाम 4:44 | शाम 5:27 | 43 मिनट पहले |
| कानपुर | शाम 4:47 | शाम 5:30 | 43 मिनट पहले |
| चंडीगढ़ | शाम 4:56 | शाम 5:40 | 43 मिनट पहले |
| दिल्ली | शाम 4:57 | शाम 5:40 | 43 मिनट पहले |
| नागपुर | शाम 4:58 | शाम 5:41 | 42 मिनट पहले |
| चेन्नई | शाम 5:01 | शाम 5:43 | 42 मिनट पहले |
| भोपाल | शाम 5:02 | शाम 5:45 | 42 मिनट पहले |
| हैदराबाद | शाम 5:04 | शाम 5:47 | 42 मिनट पहले |
| जयपुर | शाम 5:05 | शाम 5:48 | 42 मिनट पहले |
| इंदौर | शाम 5:09 | शाम 5:52 | 42 मिनट पहले |
| बेंगलुरु | शाम 5:12 | शाम 5:54 | 42 मिनट पहले |
| कोच्चि | शाम 5:20 | शाम 6:02 | 41 मिनट पहले |
| अहमदाबाद | शाम 5:22 | शाम 6:05 | 42 मिनट पहले |
| पुणे | शाम 5:22 | शाम 6:04 | 42 मिनट पहले |
| मुंबई | शाम 5:25 | शाम 6:07 | 42 मिनट पहले |
सभी समय IST। गणना समुद्र-तल और मानक वायुमंडलीय अपवर्तन के लिए; ऊँचाई वाले या पहाड़-घिरे स्थानों पर चाँद दिखने में कुछ मिनट और लग सकते हैं। मान को ±2 मिनट की सहनशीलता के साथ पढ़ें।
इस रात चाँद सूर्यास्त से पहले क्यों उठता है
यह बात अधिकतर जगह उलटी लिखी मिलेगी। पूर्णिमा का अर्थ है कि पृथ्वी से देखने पर चंद्रमा सूर्य के ठीक विपरीत हो — दोनों के बीच कोणीय अंतर पूरे 180°। जिस क्षण यह 180° बनता है, उसी क्षण तिथि समाप्त होती है। अब 2026 का आँकड़ा देखिए:
- पूर्णिमा तिथि आरंभ 25 अक्टूबर 11:57 — उस क्षण सूर्य-चंद्र अंतर ठीक 168° (हर तिथि 12° की होती है; पूर्णिमा पंद्रहवीं तिथि है, यानी 168° से 180°)
- पूर्णिमा तिथि समाप्त 26 अक्टूबर 9:42 — उस क्षण अंतर ठीक 180°
- इसलिए ठीक पूर्ण चंद्र का क्षण 26 अक्टूबर सुबह 9:41:48 है, दिन के उजाले में
यानी 25 अक्टूबर की शाम चाँद पूर्ण होने से लगभग 17 घंटे दूर है — अंतर 180° नहीं, करीब 170°। चंद्रमा सूर्य से 10° पीछे है और आकाश में 1° लगभग 4 मिनट का होता है, इसीलिए चाँद सूर्यास्त के 42–44 मिनट पहले पूर्व क्षितिज पर आ जाता है।
व्यावहारिक नतीजा: सूर्यास्त के इंतज़ार में न रहें, अपने शहर के सूर्यास्त से पौन घंटा पहले पूर्व दिशा में देखना शुरू करें। उजले आकाश में चाँद पहले फीका लगेगा; सूर्यास्त के 20–30 मिनट बाद वह पूरे तेज में और क्षितिज से ऊपर होगा। परंपरा जिस “पूर्ण चाँदनी” की बात करती है वह 25 की रात पूरी तरह उपलब्ध है — इस रात चाँद 99.2% से 99.8% तक प्रकाशित रहता है, जो नंगी आँख से पूर्ण चंद्र से अलग नहीं दिखता।
यह गणना कैसे जाँची गई
गणना NASA/JPL की DE421 एफ़ेमेरिस और मानक उदय-अस्त परिपाटी (बिंब का ऊपरी किनारा, अपवर्तन सहित) से है। जाँच के लिए उसी विधि से करवा चौथ, 29 अक्टूबर 2026 का चंद्रोदय निकालकर प्रकाशित पंचांग मानों से मिलाया — वह तारीख़ इसलिए चुनी कि करवा चौथ में चंद्रोदय का मिनट व्रत के लिए अनिवार्य होता है, सो पंचांगों पर शहर-वार छपा मिलता है:
| शहर | हमारी गणना | प्रकाशित पंचांग मान | अंतर |
|---|---|---|---|
| कोलकाता | शाम 7:43 | शाम 7:42 | 1 मिनट |
| दिल्ली | रात 8:13 | रात 8:12 | 1 मिनट |
| मुंबई | रात 8:57 | रात 8:56 | 1 मिनट |
तीनों में अंतर एक मिनट का रहा; 25 अक्टूबर का सूर्यास्त भी पंचांग मानों से 1–2 मिनट के भीतर मिला। और गणना का ठीक पूर्ण-चंद्र क्षण 26 अक्टूबर 9:41:48 पंचांग की तिथि-समाप्ति 9:42 से बारह सेकंड के भीतर है — तिथि का आँकड़ा भी स्वतंत्र रूप से पुष्ट।
फिर भी स्पष्ट रहे: शरद पूर्णिमा में चंद्रोदय का ठीक क्षण व्रत के लिए अनिवार्य नहीं है — पूर्णिमा रातभर रहती है, दर्शन कभी भी हो सकता है। जहाँ वह मिनट अनिवार्य होता है वहाँ और सावधानी चाहिए, इसी कारण करवा चौथ 2026 के लेख में 40 शहरों की तालिका अलग से दी है।
खीर की परंपरा और उसका वास्तविक पक्ष
शरद पूर्णिमा की सबसे प्रचलित परंपरा है — खीर बनाकर रात भर चाँदनी में रखना और प्रातः उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करना। 2026 में चाँद सूर्यास्त से पहले ही उठ जाता है, इसलिए खीर को संध्या-दीप के बाद चाँदनी में रख देना पर्याप्त है — किसी देर रात के समय का इंतज़ार ज़रूरी नहीं। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत-तत्त्व होता है जो खीर में उतर आता है।
यह परंपरा सांस्कृतिक रूप से गहरी और सुंदर है, और इसे उसी रूप में निभाया जाना चाहिए। साथ में दो व्यावहारिक बातें, जो अधिकतर लेख नहीं बताते:
- खाद्य सुरक्षा: दूध-आधारित खीर को कई घंटे खुले में रखने पर जीवाणु पनप सकते हैं, विशेषकर जहाँ रात गर्म या उमस भरी हो। परंपरा निभाने के लिए खीर को जाली या साफ़ पतले कपड़े से ढककर रखें, धातु के बर्तन (चाँदी या स्टील) का प्रयोग करें, और सुबह ग्रहण करने से पहले गंध-स्वाद जाँच लें। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुज़ुर्गों और कम प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को रात भर रखी खीर देने से बचें — उनके लिए ताज़ा खीर का प्रसाद बनाएँ।
- स्वास्थ्य संबंधी दावे: खीर के औषधीय या रोग-नाशक प्रभाव का कोई चिकित्सकीय प्रमाण नहीं है। किसी भी रोग के उपचार के लिए इसे दवा का विकल्प न समझें। परंपरा को श्रद्धा के रूप में निभाएँ, चिकित्सा के रूप में नहीं। मधुमेह, गुर्दे की समस्या या दूध से एलर्जी-असहिष्णुता हो तो मात्रा और सामग्री पर अपने चिकित्सक की सलाह लें।
कोजागरी लक्ष्मी पूजा — बंगाल की शरद पूर्णिमा
बंगाल, ओडिशा, असम और मिथिला में यही रात कोजागरी लक्ष्मी पूजा के नाम से मनाई जाती है। “कोजागरी” शब्द की व्युत्पत्ति परंपरा में इस प्रकार बताई जाती है — “को जागर्ति?” अर्थात “कौन जाग रहा है?” मान्यता है कि देवी लक्ष्मी इस रात यही पूछते हुए भ्रमण करती हैं, और जो जागकर उनकी आराधना कर रहा होता है, उस पर कृपा करती हैं। इसी से रात-जागरण की परंपरा जुड़ी।
बंगाल के लिए इस तिथि का स्थान खास है। दुर्गा पूजा के विसर्जन के ठीक चार दिन बाद आने वाली यह रात वर्ष की पहली बड़ी लक्ष्मी पूजा होती है — पूजा-पंडाल उतर चुके होते हैं और घर की पूजा का मौसम शुरू होता है। यह दीपावली की लक्ष्मी पूजा से अलग पर्व है: दीपावली की लक्ष्मी पूजा कार्तिक अमावस्या को होती है, जो 2026 में 8 नवंबर को है। बंगाल में दोनों मनाए जाते हैं।
कोजागरी पूजा की सामान्य विधि
- घर और पूजा-स्थान की सफ़ाई; द्वार पर अल्पना या रंगोली
- लक्ष्मी और कुबेर का पूजन; कई परिवारों में लक्ष्मी के साथ नारायण का भी
- नारियल, बताशा, चिड़वा (चिउड़ा), नारियल के लड्डू और मौसमी फल का भोग
- घी का दीप रातभर जलाए रखना
- रात्रि जागरण — भजन, पाठ या परिवार के साथ जागना
- प्रातः स्नान, दान और प्रसाद वितरण
जिन पंचांग स्रोतों की हमने जाँच की, उनमें कोजागरी पूजा के लिए कोई निश्चित मुहूर्त-खंड नहीं दिया गया था — परंपरा में यह रात्रि-व्यापी पूजा है, किसी एक घड़ी में बँधी नहीं। इसलिए हम कोई मुहूर्त गढ़कर नहीं दे रहे। व्यवहार में परिवार संध्या-दीप के बाद पूजा आरंभ करते हैं और जागरण रातभर चलता है।
शरद पूर्णिमा के शास्त्रीय उपाय
यह रात परंपरा में धन, स्थिरता और मानसिक शांति से जोड़ी जाती है। प्रचलित उपाय:
- लक्ष्मी-कुबेर पूजन: तिजोरी, गल्ला या बही-खाता के स्थान पर दीप जलाकर पूजन। व्यापार से जुड़े उपायों का विस्तार व्यापार वृद्धि के उपाय में है।
- चंद्र-अर्घ्य: दूध और जल से चंद्रमा को अर्घ्य। कुंडली में चंद्र की स्थिति से जुड़े मानसिक-भावनात्मक पक्ष के लिए परंपरा में यह उपाय बताया जाता है।
- दान: श्वेत वस्तुएँ — चावल, दूध, चीनी, श्वेत वस्त्र — इस रात के दान में परंपरागत हैं।
- जागरण और पाठ: श्री सूक्त, कनकधारा स्तोत्र या लक्ष्मी स्तुति का पाठ। बंगाल-शाक्त परंपरा में इसी क्रम में काली माता के मंत्र के जप के नियम भी देखे जाते हैं।
- घर की शांति: दीपावली से पहले घर की शुद्धि और कलह-शमन की परंपरा इसी समय से आरंभ होती है — देखें घर में कलेश के उपाय।
स्पष्ट सूचना: ये उपाय परंपरा और श्रद्धा के विषय हैं। कोई भी उपाय धन-लाभ, व्यापार-वृद्धि या किसी निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं देता। आर्थिक निर्णय अपनी स्थिति और योग्य परामर्श के आधार पर लें।
शरद पूर्णिमा का सांस्कृतिक महत्व
शरद ऋतु की यह पहली पूर्णिमा वर्ष की सबसे स्वच्छ चाँदनी वाली रातों में गिनी जाती है, क्योंकि वर्षा ऋतु बीत चुकी होती है और आकाश में धूल-नमी कम होती है। इसी कारण इसे कौमुदी पूर्णिमा भी कहा गया — कौमुदी अर्थात चाँदनी।
वैष्णव परंपरा में यही रात रास पूर्णिमा है, जिसे श्रीकृष्ण की रासलीला से जोड़ा जाता है; ब्रज और मणिपुर में इसी रूप में उत्सव होता है। आयुर्वेद की परंपरागत मान्यता में शरद ऋतु को पित्त-प्रधान काल माना गया है और इस रात की ठंडी चाँदनी तथा दूध-चावल का सेवन उसी संतुलन से जोड़ा जाता है — यह परंपरागत तर्क है, चिकित्सकीय निष्कर्ष नहीं।
शरद पूर्णिमा के बाद: 2026 का आगे का क्रम
शरद पूर्णिमा आश्विन मास का अंतिम बड़ा पर्व है। इसके बाद कार्तिक मास शुरू होता है और दीपावली तक की कड़ी लगती है। 2026 का क्रम इस प्रकार है:
| तारीख | पर्व |
|---|---|
| 22 अक्टूबर | पापांकुशा एकादशी — आश्विन शुक्ल एकादशी का व्रत |
| 25 अक्टूबर | शरद पूर्णिमा / कोजागरी लक्ष्मी पूजा |
| 29 अक्टूबर | करवा चौथ — चंद्रोदय पर व्रत पारण |
| 6 नवंबर | धनतेरस — कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी |
| 7 नवंबर | नरक चतुर्दशी / काली चौदस |
| 8 नवंबर | काली पूजा निशीथ काल में, और दीपावली की लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में — एक ही कार्तिक अमावस्या |
| 10 नवंबर | गोवर्धन पूजा और अन्नकूट — 9 नवंबर नहीं, क्योंकि प्रतिपदा 9 की दोपहर आती है |
| 11 नवंबर | भाई दूज — द्वितीया का अपराह्न 11 नवंबर को पड़ता है |
गोवर्धन पूजा और भाई दूज की तारीख़ों पर इस साल कैलेंडरों में अच्छी-ख़ासी गड़बड़ है, क्योंकि अमावस्या 9 नवंबर दोपहर तक खिंच जाती है। पूरा गणित गोवर्धन पूजा 2026 के पृष्ठ पर है।
अमावस्या से जुड़ी परंपरागत साधना और उपायों का विस्तार अमावस्या के उपाय में है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शरद पूर्णिमा 2026 कब है?
रविवार, 25 अक्टूबर 2026। पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर सुबह 11:57 से 26 अक्टूबर सुबह 9:42 तक रहेगी, और रात्रि-परंपराएँ 25 अक्टूबर की रात निभाई जाएँगी।
निशीथ काल क्या है और इससे तारीख कैसे तय होती है?
निशीथ काल रात्रि का मध्य भाग है — सूर्यास्त और अगले सूर्योदय के बीच का मध्यबिंदु, स्थूल रूप से आधी रात के आसपास। शरद पूर्णिमा का नियम है कि जिस रात के निशीथ काल में पूर्णिमा तिथि उपस्थित हो, वही पर्व की रात है। 2026 में 25-26 अक्टूबर की मध्यरात्रि पूर्णिमा के भीतर पड़ती है, इसलिए 25 की रात तय होती है।
खीर किस समय चाँदनी में रखें?
परंपरा में चंद्रोदय के बाद, रात में खीर को खुले आकाश के नीचे चाँदनी में रखा जाता है और प्रातः ग्रहण किया जाता है। ढककर और स्वच्छ धातु के बर्तन में रखें; सुबह ग्रहण करने से पहले जाँच लें।
कोजागरी लक्ष्मी पूजा और दीपावली की लक्ष्मी पूजा एक ही हैं?
नहीं। कोजागरी आश्विन पूर्णिमा (25 अक्टूबर 2026) को होती है, दीपावली की लक्ष्मी पूजा कार्तिक अमावस्या (8 नवंबर 2026) को। दोनों अलग पर्व हैं और बंगाल में दोनों मनाए जाते हैं।
कोजागरी के भोग में चिउड़ा और नारियल क्यों रखा जाता है?
यह शरद ऋतु की नई फ़सल से जुड़ी परंपरा है। धान की नई उपज से बना चिउड़ा (चिड़वा), नारियल, बताशा और मौसमी फल — ये सब बिना आग पर पकाए चढ़ाए जाने वाले भोग हैं, जो रात्रि-पूजा के अनुकूल हैं। क्षेत्र और परिवार के अनुसार सामग्री में अंतर रहता है।
क्या शरद पूर्णिमा का व्रत रखना आवश्यक है?
यह ऐच्छिक है। कई परिवार पूर्णिमा व्रत रखते हैं और 26 अक्टूबर सुबह 9:42 से पहले पारण करते हैं; कई केवल चंद्र-दर्शन, खीर और जागरण की परंपरा निभाते हैं। गर्भावस्था, मधुमेह, रक्तचाप या नियमित दवा की स्थिति में निर्जल या कठिन व्रत से पहले चिकित्सक से बात करें। स्वास्थ्य बिगड़ने पर व्रत तोड़ देना परंपरा में भी स्वीकार्य है।
शरद पूर्णिमा 2026 में चंद्रोदय कितने बजे है?
शहर के अनुसार बदलता है। कोलकाता में शाम 4:18, पटना 4:28, वाराणसी 4:37, लखनऊ 4:44, दिल्ली 4:57, चेन्नई 5:01, बेंगलुरु 5:12, मुंबई 5:25 — 25 अक्टूबर 2026, IST। पूरी 30 शहरों की तालिका ऊपर दी है। ध्यान दें कि ये समय सूर्यास्त से पहले के हैं।
चाँद सूर्यास्त से पहले कैसे उठ सकता है? पूर्णिमा पर तो वह सूर्यास्त के समय उठता है।
क्योंकि 25 अक्टूबर की शाम चाँद अभी पूरा नहीं हुआ। ठीक पूर्ण चंद्र 26 अक्टूबर सुबह 9:41:48 पर है — यानी 25 की शाम को वह पूर्णता से लगभग 17 घंटे दूर है और सूर्य से 180° की जगह करीब 170° पर है। 10° का यह अंतर समय में लगभग 40 मिनट बनता है, इसलिए चाँद सूर्यास्त से 42–44 मिनट पहले उठ जाता है। दिखने में फ़र्क़ नहीं पड़ता — उस रात चाँद 99.2% से 99.8% तक प्रकाशित रहता है।
मेरे शहर का निशीथ काल कितने बजे है?
ऊपर दस शहरों की तालिका दी है — गुवाहाटी रात 10:41–11:32, कोलकाता 10:55–11:45, दिल्ली 11:39–12:31, मुंबई 11:57–12:47। निशीथ सूर्यास्त से सूर्योदय तक की रात के पंद्रह मुहूर्तों में से आठवाँ है, इसलिए हर शहर में अलग होता है। 2026 में यह आँकड़ा तारीख़ बदलने वाला नहीं है, क्योंकि पूर्णिमा हर शहर के निशीथ काल पर मौजूद रहती है।
शरद पूर्णिमा के बाद अगला बड़ा पर्व कौन-सा है?
29 अक्टूबर को करवा चौथ, फिर 6 नवंबर धनतेरस, 7 नवंबर नरक चतुर्दशी और 8 नवंबर को दीपावली, लक्ष्मी पूजा तथा बंगाल की काली पूजा।
स्रोत
- पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर 11:57 से 26 अक्टूबर 9:42, और तारीख 25 अक्टूबर 2026 — PanchangBodh का शरद पूर्णिमा पृष्ठ (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश)
- उसी साइट के पूर्णिमा-सूची पृष्ठ पर आरंभ की तारीख “26 अक्टूबर” छपी मिली, जबकि समय और उसी पृष्ठ का वाक्य 25 अक्टूबर कहते हैं — यह भेद ऊपर दर्ज किया गया है
- तारीख की स्वतंत्र पुष्टि — DekhoPanchang का शरद पूर्णिमा पृष्ठ (दिल्ली संदर्भ, IST) और BhaktiBharat का कोजागरी पूजा पृष्ठ, दोनों रविवार 25 अक्टूबर 2026
- निर्णय-नियम “निशीथ काल” — DekhoPanchang के शरद पूर्णिमा पृष्ठ पर अंकित पालन-नियम
- 30 शहरों की चंद्रोदय तालिका, सूर्यास्त-सूर्योदय और निशीथ काल — हमारी स्वतंत्र गणना, NASA/JPL DE421 एफ़ेमेरिस पर आधारित, मानक अपवर्तन-सहित उदय-अस्त परिपाटी से। किसी भी खुले पंचांग स्रोत पर शरद पूर्णिमा 2026 की शहर-वार चंद्रोदय तालिका नहीं मिली
- गणना-विधि की जाँच — उसी विधि से निकाला करवा चौथ (29 अक्टूबर 2026) का चंद्रोदय प्रकाशित पंचांग मानों से मिलाया गया: कोलकाता 7:43 बनाम 7:42, दिल्ली 8:13 बनाम 8:12, मुंबई 8:57 बनाम 8:56 — तीनों में एक मिनट का अंतर। तुलना के मान करवा चौथ 2026 की 40-शहर तालिका से
- ठीक पूर्ण-चंद्र क्षण 26 अक्टूबर 2026, 9:41:48 IST (सूर्य-चंद्र अंतर 180°) — हमारी गणना; यह panchangbodh की तिथि-समाप्ति 9:42 से बारह सेकंड के भीतर है, जो तिथि-आँकड़े की स्वतंत्र पुष्टि है। तिथि-आरंभ 25 अक्टूबर 11:57 पर अंतर ठीक 168° निकला, जो पूर्णिमा के पंद्रहवीं तिथि होने से मेल खाता है
- 25 अक्टूबर 2026 की सूर्यास्त तालिका — हमारी गणना, DekhoPanchang के प्रकाशित मानों से 1–2 मिनट के भीतर मिली
- कार्तिक अमावस्या 8 नवंबर 2026 (दीपावली लक्ष्मी पूजा और काली पूजा) — इसी साइट का काली पूजा 2026 लेख
सूचना: तिथि-आरंभ और समाप्ति का क्षण पूरे भारत में एक ही होता है, परंतु सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और निशीथ काल स्थान के अनुसार बदलते हैं — ऊपर की तालिकाएँ नामित शहरों के लिए हैं, अपने शहर का मान स्थानीय पंचांग से मिला लें। चंद्रोदय और निशीथ के मान हमारी खगोलीय गणना से हैं, ±2 मिनट की सहनशीलता के साथ पढ़ें। इस लेख में दी गई परंपराएँ सांस्कृतिक मान्यताएँ हैं; किसी भी स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सक की सलाह लें।