शारदीय नवरात्रि 2026: घटस्थापना 10 या 11 अक्टूबर? सही तिथि, कलश स्थापना मुहूर्त और विधि

शारदीय नवरात्रि 2026: घटस्थापना 10 या 11 अक्टूबर? सही तिथि, कलश स्थापना मुहूर्त और विधि

सीधा जवाब: drikpanchang.com (नई दिल्ली) के अनुसार घटस्थापना रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को है (अश्विन शुक्ल प्रतिपदा)। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात तक रहती है, इसलिए दो तारीखों को लेकर भ्रम बना है, पर उदया तिथि के नियम से कलश स्थापना 11 अक्टूबर को ही होगी।

इस लेख में
  1. घटस्थापना 10 अक्टूबर या 11 अक्टूबर: भ्रम क्यों?
  2. घटस्थापना मुहूर्त (11 अक्टूबर 2026)
  3. कलश स्थापना की विधि
  4. नौ दिन की तिथियाँ और देवी स्वरूप
  5. कात्यायनी और कालरात्रि का विशेष महत्व
  6. साधना के नियम और सावधानियाँ
  7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
  8. संबंधित लेख
  9. अस्वीकरण
  10. स्रोत

घटस्थापना 10 अक्टूबर या 11 अक्टूबर: भ्रम क्यों?

इस बार अमर उजाला ने 22 सितंबर को “घटस्थापना 10 या 11 अक्टूबर” जैसा सवाल उठाया, और कई पाठक यही खोज रहे हैं। भ्रम का कारण पंचांग की तिथि-गणना में ही है। अमर उजाला और आजतक, दोनों के अनुसार अश्विन शुक्ल प्रतिपदा 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे शुरू होती है और 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहती है। यानी प्रतिपदा तिथि दो कैलेंडर तारीखों में फैली है, और तारीख का सवाल यहीं से पैदा होता है।

अमर उजाला के लेख में साफ लिखा है कि उदया तिथि (सूर्योदय के समय जो तिथि हो) के आधार पर नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से मानी जाएगी। drikpanchang का अक्टूबर 2026 कैलेंडर भी 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या और 11 अक्टूबर को नवरात्रि आरंभ दिखाता है। यानी 10 अक्टूबर के सूर्योदय पर प्रतिपदा नहीं, अमावस्या होती है; प्रतिपदा उस दिन केवल रात में लगती है। घटस्थापना दिन के शुभ मुहूर्त में की जाती है, इसलिए 10 अक्टूबर की रात में कलश स्थापना की बात नहीं बनती।

जो संस्थान “10 अक्टूबर” लिख रहे हैं, वे संभवतः तिथि के आरंभ का समय देखकर ऐसा कह रहे हैं। यह हमारा अनुमान है; हमारे स्रोतों में इसकी स्पष्ट व्याख्या नहीं मिली, इसलिए इसे पक्की बात न मानें। जिन चार स्रोतों को हमने देखा (drikpanchang, अमर उजाला, वेबदुनिया, आजतक), सभी ने घटस्थापना 11 अक्टूबर को ही बताई है।

घटस्थापना मुहूर्त (11 अक्टूबर 2026)

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार घटस्थापना (कलश स्थापना) के लिए मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक रहेगा, यानी लगभग 3 घंटे 52 मिनट की अवधि पूजा के लिए उपलब्ध होगी। अमर उजाला ने भी यही अवधि (6:19 से 10:12) बताई है। यदि किसी कारणवश इस समय में कलश स्थापना न हो सके, तो अभिजित मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है, जो सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक बताया गया है।

ध्यान दें: ये समय शहर-विशेष हैं। सूर्योदय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने शहर के सटीक समय के लिए नज़दीकी तिथि पर स्थानीय पंचांग या अपने पुजारी से पुष्टि कर लें।

कलश स्थापना की विधि

नीचे की विधि पारंपरिक पूजा-पद्धति का सामान्य रूप है, जैसा आजतक की पूजा-विधि रिपोर्ट में बताया गया है। अमर उजाला और वेबदुनिया के जिन लेखों को हमने देखा, उनमें विस्तृत विधि, संकल्प या मंत्र-पाठ नहीं दिया गया है। इसलिए हम यहाँ कोई मंत्र या संकल्प का पाठ नहीं लिख रहे हैं; वह अपने कुल-पंडित या अपनी परंपरा के अनुसार ही लें।

  1. स्नान और शुद्धि: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा-स्थल की सफाई करें। तैयारी इस तरह करें कि स्थापना निर्धारित मुहूर्त में हो सके।
  2. चौकी की स्थापना: पूजा-स्थल पर चौकी रखें और उस पर देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें (आजतक के अनुसार)।
  3. कलश तैयार करें: मिट्टी या तांबे के कलश में गंगाजल भरें और उसमें सिक्के तथा हल्दी डालें (आजतक के अनुसार)।
  4. पत्ते और नारियल: कलश के मुख पर अशोक या आम के पत्ते रखें। उसके ऊपर नारियल रखकर उसे लाल कपड़े से लपेटें।
  5. मौली बाँधना: कलश पर मौली (कलावा) बाँधें।
  6. कलश की स्थापना: तैयार कलश को देवी की प्रतिमा या चित्र के पास स्थापित करें।
  7. अखंड ज्योति: परंपरागत मान्यता के अनुसार अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की जाती है, जिसे नौ दिन तक जलाए रखने की परंपरा है।
  8. संकल्प और पूजन: अपनी परंपरा या पंडित के बताए अनुसार संकल्प लेकर पहले दिन की देवी माँ शैलपुत्री का पूजन करें। मंत्र अपने कुल-पंडित से ही लें।
  9. नौ दिन का पालन: स्वच्छ वस्त्र, सात्विक आहार और श्रद्धा व क्षमता के अनुसार व्रत-उपवास का पालन करें।

ये सामान्य पारंपरिक चरण हैं। हर परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय की अपनी रीति होती है, इसलिए घर की परंपरा को प्राथमिकता दें।

नौ दिन की तिथियाँ और देवी स्वरूप

drikpanchang.com पर उपलब्ध पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए शारदीय नवरात्रि 2026 की तिथिवार सूची इस प्रकार है:

दिन तारीख तिथि देवी स्वरूप
प्रथम दिन (घटस्थापना) 11 अक्टूबर, रविवार प्रतिपदा माँ शैलपुत्री
द्वितीय दिन 12 अक्टूबर, सोमवार द्वितीया माँ ब्रह्मचारिणी
तृतीय दिन 13 अक्टूबर, मंगलवार तृतीया माँ चंद्रघंटा
चतुर्थ दिन 14 अक्टूबर, बुधवार चतुर्थी माँ कूष्मांडा
पंचम दिन 15 अक्टूबर, गुरुवार पंचमी माँ स्कंदमाता
षष्ठम दिन 16 अक्टूबर, शुक्रवार षष्ठी माँ कात्यायनी
सप्तम दिन 17 अक्टूबर, शनिवार सप्तमी माँ कालरात्रि
अष्टम दिन (संक्रमण) 18 अक्टूबर, रविवार सप्तमी (तिथि-वृद्धि) अष्टमी की तैयारी, महागौरी की ओर संक्रमण
नवम/महाअष्टमी-नवमी 19 अक्टूबर, सोमवार अष्टमी माँ महागौरी (संधि पूजा प्रातः 10:27 से 11:15 बजे तक)
विजयादशमी (दशहरा) 20 अक्टूबर, मंगलवार नवमी/दशमी माँ सिद्धिदात्री की पूर्णता व रावण-दहन

स्रोत: drikpanchang.com, Shardiya Navratri Dates 2026

तिथियों की जाँच (drikpanchang, नई दिल्ली): अक्टूबर 2026 के कैलेंडर में दुर्गा अष्टमी और महानवमी दोनों 19 अक्टूबर (सोमवार) को दर्ज हैं और विजयादशमी/दशहरा 20 अक्टूबर (मंगलवार) को। घटस्थापना 11 अक्टूबर (रविवार) को दर्ज है।

स्रोतों में अंतर, जिसे छिपाना उचित नहीं: वेबदुनिया के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर रात 8:27 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर सुबह 10:51 बजे तक रहती है, और उसके लेख में अष्टमी 18 को व नवमी 19 को पूजी जाने की बात है। वहीं drikpanchang (नई दिल्ली) 19 अक्टूबर को दोनों दर्ज करता है। हमारी साइट का दुर्गा पूजा पेज भी बताता है कि कोलकाता के स्रोतों की तिथियाँ कुछ अलग हैं। इसलिए अष्टमी-नवमी की सटीक पूजा-तिथि के लिए अपने शहर या अपनी परंपरा का पंचांग देखना सबसे सुरक्षित है।

अष्टमी-नवमी एक ही दिन (19 अक्टूबर): इस बार दोनों तिथियाँ एक ही दिन दर्ज होने से कन्या पूजन और हवन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पूरी जानकारी यहाँ देखें: अष्टमी-नवमी एक ही दिन 2026।

माँ दुर्गा का वाहन: इस वर्ष माँ दुर्गा किस वाहन पर आएँगी, इसकी चर्चा और मान्यता अलग पेज पर है: नवरात्रि 2026 में माँ दुर्गा का वाहन।

कात्यायनी और कालरात्रि का विशेष महत्व

नवरात्रि के नौ दिनों में हर देवी स्वरूप का अपना महत्व है, लेकिन छठे और सातवें दिन की देवियाँ, कात्यायनी और कालरात्रि, विशेष रूप से चर्चित रहती हैं क्योंकि इनकी उपासना अलग-अलग जीवन-क्षेत्रों से जुड़ी मानी जाती है।

16 अक्टूबर, षष्ठी, माँ कात्यायनी: मान्यता है कि माँ कात्यायनी की उपासना विवाह में आ रही बाधाओं और विलंब से जुड़े विषयों में सहायक मानी जाती है। परंपरागत रूप से इस दिन को विवाह-योग से जुड़े उपायों और प्रार्थनाओं के लिए उपयुक्त माना जाता है। विवाह में देरी के कारणों और परंपरागत उपायों पर हमारा संबंधित लेख नीचे दिया गया है।

17 अक्टूबर, सप्तमी, माँ कालरात्रि: कालरात्रि स्वरूप को भय, नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं से रक्षा से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन को परंपरागत रूप से सुरक्षा और आत्मबल से जुड़ी साधना के लिए विशेष माना जाता है। भैरव उपासना और सुरक्षा-संबंधी परंपराओं में रुचि रखने वाले पाठक हमारे कालाष्टमी लेख से भी जुड़ी जानकारी पा सकते हैं, जो नवरात्रि से ठीक पहले आने वाला पर्व है।

ध्यान रहे कि यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है, कोई गारंटीशुदा परिणाम नहीं है, और व्यक्तिगत जीवन-निर्णय (जैसे विवाह) के लिए विशेषज्ञ या गुरु का परामर्श ही उचित मार्ग है।

साधना के नियम और सावधानियाँ

नवरात्रि की नौ रातें साधना और जप की दृष्टि से विशेष मानी जाती हैं, क्योंकि पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में वातावरण साधना के अनुकूल रहता है। हालांकि, इस विषय में कुछ सामान्य सावधानियाँ ध्यान में रखनी चाहिए:

  • सरल घरेलू पूजा और गूढ़ साधना में अंतर करें। अधिकांश गृहस्थ भक्तों के लिए घटस्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ, कन्या पूजन और सामान्य व्रत ही पर्याप्त और परंपरागत रूप से सुरक्षित माने जाते हैं।
  • महाविद्या या तंत्र-साधना जैसी गूढ़ विधियाँ केवल अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में ही की जानी चाहिए। इस तरह की साधनाओं में विशिष्ट नियम, संयम और मंत्र-शुद्धता की आवश्यकता होती है, जिसे केवल इस लेख को पढ़कर या इंटरनेट पर मिली जानकारी के आधार पर स्वयं आरंभ करना उचित नहीं माना जाता।
  • व्रत और उपवास शारीरिक क्षमता के अनुसार रखें। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर चिकित्सक की सलाह लें और उपवास की तीव्रता को समायोजित करें।
  • अखंड ज्योति और साधना-स्थल की स्वच्छता व सुरक्षा का ध्यान रखें, विशेषकर यदि नौ दिन तक दीपक जलाए रखने की परंपरा निभा रहे हों।
  • मानसिक और भावनात्मक स्थिरता आवश्यक है। किसी भी गहन साधना को जल्दबाज़ी या भावनात्मक उथल-पुथल की स्थिति में आरंभ करना पारंपरिक रूप से उचित नहीं माना जाता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

नवरात्रि 2026 में कलश स्थापना कब है — 10 या 11 अक्टूबर?

drikpanchang.com (नई दिल्ली) के अनुसार कलश स्थापना 11 अक्टूबर 2026, रविवार को है। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर रात 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर रात 9:30 बजे तक रहती है, पर उदया तिथि के नियम से पहला नवरात्र और घटस्थापना 11 अक्टूबर को मानी जाती है।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?

आजतक और अमर उजाला के अनुसार मुख्य मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक है, और अभिजित मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक बताया गया है। ये समय शहर-विशेष हैं, इसलिए अपने शहर के लिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

10 अक्टूबर को घटस्थापना की खबरें क्यों आ रही हैं?

प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे लग जाती है, इसलिए कुछ जगह तारीख को लेकर भ्रम दिखता है। हमारे देखे स्रोतों में कोई भी 10 अक्टूबर को घटस्थापना नहीं बताता; drikpanchang के अनुसार उस दिन सूर्योदय पर सर्वपितृ अमावस्या रहती है।

नवरात्रि 2026 में अष्टमी और नवमी कब है?

drikpanchang (नई दिल्ली) के अनुसार दुर्गा अष्टमी और महानवमी दोनों 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को हैं। वेबदुनिया जैसे कुछ स्रोत अष्टमी का आरंभ 18 अक्टूबर की रात बताते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना उचित है।

विजयादशमी (दशहरा) 2026 कब है?

drikpanchang.com के पंचांग अनुसार विजयादशमी/दशहरा 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को मनाई जाएगी।

नवरात्रि में कात्यायनी और कालरात्रि की पूजा कब होगी?

माँ कात्यायनी की पूजा छठे दिन यानी 16 अक्टूबर को और माँ कालरात्रि की पूजा सातवें दिन यानी 17 अक्टूबर को होगी।

संबंधित लेख

अस्वीकरण

इस लेख में दी गई जानकारी पारंपरिक पंचांग, धार्मिक मान्यताओं और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। तिथियाँ और मुहूर्त स्थान (शहर) के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं, और अलग-अलग पंचांग या क्षेत्र (जैसे कोलकाता) की गणना में अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा से पहले अपने नज़दीकी पंचांग या स्थानीय पुजारी से एक बार पुष्टि अवश्य कर लें। साधना, व्रत या तंत्र-विधि से जुड़ा कोई भी कदम उठाने से पहले अनुभवी गुरु या विशेषज्ञ का मार्गदर्शन लें। यह लेख चिकित्सकीय, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।

स्रोत

  • https://www.drikpanchang.com/navratri/ashwin-shardiya-navratri-dates.html?year=2026
  • https://www.drikpanchang.com/calendars/hindu/hinducalendar.html?geoname-id=1261481&year=2026&month=10
  • https://www.aajtak.in/religion/news/story/shardiye-navratri-2026-date-11-to-19-october-ghat-sthapana-shubh-muhurt-puja-vidhi-upay-tvisu-dskc-2644140-2026-09-18
  • https://www.amarujala.com/photo-gallery/astrology/predictions/shardiya-navratri-2026-date-ma-durga-vahan-ghatasthapana-muhurat-durga-ashtami-2026-2026-09-22
  • https://hindi.webdunia.com/navratri-special/sharadiya-navratri-2026-dates-time-and-complete-calendar-126092400026_1.html
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