गोवर्धन पूजा 2026: 10 नवंबर, अन्नकूट और प्रातःकाल मुहूर्त

गोवर्धन पूजा 2026 मंगलवार, 10 नवंबर को है — दिवाली के अगले दिन नहीं, दो दिन बाद। कारण साफ़ है: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 9 नवंबर दोपहर 12:32 पर ही शुरू होती है और 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक रहती है, और गोवर्धन पूजा प्रातःकाल का कर्म है। इसलिए 9 नवंबर की सुबह यह तिथि लगी ही नहीं होती।

इस लेख में
  1. गोवर्धन पूजा 2026 एक नज़र में
  2. 9 नवंबर क्यों नहीं, 10 नवंबर क्यों — पूरा गणित
  3. अन्नकूट क्या है
  4. कथा: इंद्र-यज्ञ से गोवर्धन-धारण तक
  5. पूजा विधि: घर पर सरल रूप
  6. बंगाल और कोलकाता में यह दिन
  7. इसके बाद: भाई दूज 11 नवंबर
  8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  9. स्रोत

गोवर्धन पूजा 2026 एक नज़र में

गोवर्धन पूजा / अन्नकूट मंगलवार, 10 नवंबर 2026
तिथि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा
प्रतिपदा आरंभ 9 नवंबर, दोपहर 12:32
प्रतिपदा समाप्त 10 नवंबर, दोपहर 2:00 (एक पंचांग 2:01)
प्रातःकाल मुहूर्त (उज्जैन) सुबह 6:41 – 8:53
सायंकाल मुहूर्त (उज्जैन) दोपहर 3:28 – शाम 5:40
पिछला पर्व दीपावली और लक्ष्मी पूजा — 8 नवंबर
अगला पर्व भाई दूज — 11 नवंबर (बुधवार)

तिथि-स्रोत: panchangbodh.com (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश) और prokerala.com (उज्जैन, IST) — दोनों पर प्रतिपदा 9 नवंबर 12:32 से 10 नवंबर दोपहर 2:00/2:01 तक है। मुहूर्त के आँकड़े उज्जैन के हैं; सूर्योदय-आधारित मान शहर के साथ बदलते हैं, इसलिए नीचे शहर-वार खिड़की अलग दी है।

9 नवंबर क्यों नहीं, 10 नवंबर क्यों — पूरा गणित

यह 2026 की सबसे आम कैलेंडर-गलती है। कई जगह गोवर्धन पूजा 9 नवंबर छपा मिलेगा, क्योंकि आम नियम है “दिवाली के अगले दिन”। इस साल वह नियम टूटता है, और वजह तिथियों के खिंचाव में है।

तिथियाँ घड़ी के दिन से नहीं, चंद्र-सूर्य के कोणीय अंतर से बनती हैं। एक तिथि 12 अंश की होती है, और चंद्रमा की गति घटती-बढ़ती रहती है, इसलिए कोई तिथि 20 घंटे की हो सकती है और कोई 27 घंटे की। इस बार कार्तिक अमावस्या लंबी खिंची:

  • अमावस्या — 8 नवंबर सुबह 11:28 से 9 नवंबर दोपहर 12:32 तक
  • शुक्ल प्रतिपदा — 9 नवंबर दोपहर 12:32 से 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक
  • शुक्ल द्वितीया — 10 नवंबर दोपहर 2:00 से 11 नवंबर दोपहर 3:55 तक

अब इस पर प्रातःकाल का नियम रखिए। गोवर्धन पूजा और अन्नकूट सुबह के आयोजन हैं — गोबर का पर्वत बनाना, अन्न का भोग सजाना, परिक्रमा। तो सवाल यह है कि किस दिन की सुबह प्रतिपदा चल रही है:

  • 9 नवंबर की सुबह — तिथि अभी अमावस्या है। प्रतिपदा दोपहर 12:32 तक लगती ही नहीं। सुबह की पूजा नहीं बनती।
  • 10 नवंबर की सुबह — प्रतिपदा चल रही है, दोपहर 2:00 तक। यही दिन है।

इसलिए गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर। नतीजा यह भी है कि 2026 में 9 नवंबर पर कोई बड़ा आयोजन नहीं पड़ता — पाँच दिन का त्योहार इस साल छह दिन में फैल जाता है। यही गणित विस्तार से दीपावली 2026 के लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और स्थिर लग्न वाले पृष्ठ पर भी दिया है, और इसी वजह से नरक चतुर्दशी 8 नवंबर और काली चौदस 7 नवंबर की रात पर पड़ती है।

प्रातःकाल मुहूर्त का नियम और शहर-वार खिड़की

प्रातःकाल मुहूर्त कोई रहस्यमय संख्या नहीं है — यह दिनमान का पहला पाँचवाँ हिस्सा है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को पाँच बराबर भागों में बाँटिए; पहला भाग प्रातःकाल है। इसीलिए यह शहर के साथ बदलता है और इसे एक राष्ट्रीय आँकड़े की तरह नहीं लिखा जा सकता।

10 नवंबर 2026 के लिए, सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाली गई खिड़की:

शहर सूर्योदय सूर्यास्त प्रातःकाल (दिनमान का 1/5)
कोलकाता 5:45 4:54 PM 5:45 – 7:59
नई दिल्ली 6:39 5:30 PM 6:39 – 8:49
मुंबई 6:43 6:01 PM 6:43 – 8:58
उज्जैन 6:37 5:44 PM 6:37 – 8:50

ये मान DE421 ग्रह-गणित से निकाले गए हैं (IST)। उज्जैन के लिए prokerala 6:41 – 8:53 देता है, यानी हमारी गणना से लगभग 4 मिनट का फ़र्क़ — यह सूर्योदय की परिभाषा और वायुमंडलीय अपवर्तन के अंतर से आता है। दोनों एक ही खिड़की की ओर इशारा करते हैं, इसलिए कुछ मिनट का अंतर व्यवहार में मायने नहीं रखता।

एक बात ध्यान देने लायक है, जो अक्सर नहीं बताई जाती। prokerala पर सायंकाल मुहूर्त 3:28 – 5:40 PM छपा है, पर प्रतिपदा तो 10 नवंबर दोपहर 2:00 पर ही छूट जाती है। यानी वह शाम की खिड़की तिथि के बाहर पड़ रही है। जो लोग सुबह इकट्ठा नहीं हो पाते वे शाम को पूजा कर लेते हैं — यह परंपरा में चलता है — पर इस साल तिथि-शुद्धता देखें तो सुबह की खिड़की ही सही है, और दोपहर 2:00 से पहले पूजा पूरी कर लेना बेहतर है। कोलकाता में तो यह सहज है, क्योंकि वहाँ प्रातःकाल सुबह 8 बजे तक ही है।

अन्नकूट क्या है

“अन्नकूट” का सीधा अर्थ है अन्न का ढेर — कूट यानी पर्वत, शिखर। गोवर्धन पूजा और अन्नकूट एक ही दिन के दो नाम हैं, और दोनों एक ही विचार के दो रूप: पर्वत को अन्न से बनाना, और अन्न को पर्वत की तरह ऊँचा चढ़ाना।

घरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है, उस पर फूल, दीपक और कभी गाय-बछड़े की आकृतियाँ रखी जाती हैं। मंदिरों में इसका बड़ा रूप दिखता है — चावल, सब्ज़ियाँ, कढ़ी और पकवानों का ढेर ठाकुर जी के सामने पहाड़ की तरह सजाकर प्रसाद बाँटा जाता है। कई वैष्णव मंदिरों में इसे “छप्पन भोग” से जोड़ा जाता है।

यहाँ एक छोटी व्यावहारिक बात: गोबर से आकृति बनाने के बाद हाथ साबुन से धोएँ, और अन्नकूट का भोग अगर कई घंटे खुले में सजा रहा हो तो बाँटने से पहले देख लें कि वह ख़राब न हुआ हो — बड़े आयोजनों में यही चूक सबसे आम है।

कथा: इंद्र-यज्ञ से गोवर्धन-धारण तक

यह कथा भागवत पुराण के दशम स्कंध, अध्याय 24–25 में आती है। व्रज के लोग हर साल इंद्र के लिए यज्ञ करते थे, क्योंकि वर्षा उन्हीं से मानी जाती थी। बालक कृष्ण ने एक सवाल उठाया: जो पर्वत तुम्हारी गायों को घास देता है, जिसके झरनों से पानी आता है, जिसकी छाया में तुम रहते हो — पूजा उसकी क्यों नहीं? उनके कहने पर व्रजवासियों ने यज्ञ का भोग गोवर्धन पर्वत और गायों को अर्पित किया।

इंद्र ने इसे अपमान माना और मूसलधार वर्षा भेजी। कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत एक उँगली पर उठा लिया और सात दिन पूरे व्रज को उसके नीचे शरण दी; अंत में इंद्र ने हार मानी।

कथा का केंद्रीय मोड़ इसी बदलाव में है: पूजा दूर बैठे देवता से हटकर उस ज़मीन, उस पहाड़ और उन गायों की ओर चली गई, जिन पर जीवन सीधे टिका था। अन्नकूट इसी बात का अनुष्ठान है — जो तुम्हें खिलाता है, पहले उसे चढ़ाओ। यही कारण है कि इस दिन गाय और बैल की पूजा भी होती है, और कई जगह गोवत्स द्वादशी की परंपरा इसी शृंखला से जुड़ती है।

पूजा विधि: घर पर सरल रूप

  • आँगन या पूजा स्थान पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएँ; बीच में कृष्ण की मूर्ति या चित्र रखें।
  • पर्वत पर फूल, रोली, अक्षत और दीपक अर्पित करें।
  • अन्न का भोग सजाएँ — चावल, पूरी, सब्ज़ी, कढ़ी, खीर या जो घर में बना हो। ढेर जितना ऊँचा हो, भाव उतना ही पर्वत का।
  • सात बार परिक्रमा करें; परंपरा में परिक्रमा करते हुए जल की धार छोड़ी जाती है।
  • गाय हो तो उसे स्नान कराकर तिलक करें, चारा खिलाएँ।
  • अंत में प्रसाद बाँटें। अन्नकूट का पूरा अर्थ बाँटने में ही खुलता है।

दीपक जलाते समय बच्चों और पर्दों से दूरी रखें — नवंबर की सूखी हवा में यह असली ख़तरा है। दीपक जलाने का महत्व और परंपरा अलग पृष्ठ पर है।

बंगाल और कोलकाता में यह दिन

ईमानदारी से कहें तो बंगाल की शाक्त परंपरा में इस पूरे हफ़्ते का केंद्र गोवर्धन पूजा नहीं, काली पूजा है — 8 नवंबर की रात, निशीथ काल में। गोवर्धन पूजा और अन्नकूट यहाँ मुख्यतः वैष्णव मंदिरों में और कोलकाता के मारवाड़ी, गुजराती तथा उत्तर भारतीय परिवारों में होती है, जहाँ यह घर का बड़ा आयोजन है।

एक ही शहर में दो धाराएँ साथ चलती हैं: एक ओर अमावस्या की रात का उत्सव, दूसरी ओर दो दिन बाद अन्न का पर्वत। बंगाल में तिथि-गणना की दो पद्धतियाँ भी साथ चलती हैं, जिसका ब्यौरा बंगाली पंजिका और पंचांग के अंतर में है; दर्शन की योजना हो तो कालीघाट मंदिर का इतिहास और दर्शन देख लें।

इसके बाद: भाई दूज 11 नवंबर

द्वितीया 10 नवंबर दोपहर 2:00 से 11 नवंबर दोपहर 3:55 तक है। भाई दूज का तिलक अपराह्न में होता है, और 11 नवंबर का पूरा अपराह्न द्वितीया में पड़ता है — 10 का नहीं, क्योंकि उस दिन द्वितीया दोपहर 2:00 पर ही लगती है। इसलिए भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर। panchangbodh नई दिल्ली के लिए तिलक 1:09 – 3:19 और मुंबई के लिए 1:29 – 3:45 देता है। कोलकाता समेत 16 शहरों की अपराह्न खिड़की भाई दूज 2026 के शहर-वार तिलक मुहूर्त वाले पृष्ठ पर दी है। इसके दो दिन बाद कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से छठ पूजा आरंभ होती है — 13 से 16 नवंबर, जिसका संध्या अर्घ्य 15 नवंबर के स्थानीय सूर्यास्त पर पड़ता है।

पूरे कार्तिक की शृंखला इस तरह बनती है: धनतेरस 6 नवंबर, नरक चतुर्दशी 8 नवंबर की भोर, लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर की संध्या, काली पूजा उसी रात, गोवर्धन पूजा 10 नवंबर और भाई दूज 11 नवंबर। व्यापारियों के लिए नया बही-खाता और लक्ष्मी-कुबेर से जुड़े उपाय व्यापार वृद्धि के शास्त्रीय उपाय में अलग से दिए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवर्धन पूजा 2026 में 9 या 10 नवंबर को है?

10 नवंबर 2026, मंगलवार। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 9 नवंबर दोपहर 12:32 पर शुरू होकर 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक रहती है। गोवर्धन पूजा प्रातःकाल का कर्म है, और 9 नवंबर की सुबह तिथि अमावस्या थी — इसलिए 10 नवंबर।

दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा क्यों नहीं है?

क्योंकि इस साल अमावस्या 9 नवंबर दोपहर तक खिंच गई। आम सालों में प्रतिपदा दिवाली के अगले दिन सूर्योदय के समय चल रही होती है, तो पूजा उसी दिन हो जाती है। 2026 में प्रतिपदा 9 नवंबर की दोपहर आई, इसलिए सुबह का आयोजन एक दिन आगे खिसक गया।

क्या गोवर्धन पूजा शाम को कर सकते हैं?

परंपरा में सायंकाल की पूजा चलती है और कई पंचांग शाम की खिड़की भी छापते हैं। पर 2026 में प्रतिपदा 10 नवंबर दोपहर 2:00 पर ही छूट जाती है, इसलिए तिथि के भीतर रहना हो तो दोपहर 2:00 से पहले पूजा पूरी करें।

अन्नकूट और गोवर्धन पूजा में क्या अंतर है?

अंतर दिन का नहीं, ज़ोर का है। गोवर्धन पूजा में केंद्र पर्वत की आकृति और परिक्रमा है; अन्नकूट में केंद्र अन्न का ढेर और भोग है। दोनों एक ही तिथि पर, एक ही कथा से निकलते हैं।

प्रातःकाल मुहूर्त कैसे निकालें?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को पाँच बराबर भागों में बाँटें; पहला भाग प्रातःकाल है। कोलकाता में 10 नवंबर को यह लगभग 5:45 से 7:59, नई दिल्ली में 6:39 से 8:49 बनता है। चूँकि यह सूर्योदय पर टिका है, हर शहर का मान अलग होगा।

क्या गोवर्धन पूजा के लिए गाय ज़रूरी है?

नहीं। शहरों में अधिकतर घरों में गाय नहीं होती। गोबर की आकृति, अन्न का भोग और परिक्रमा के साथ पूजा पूरी मानी जाती है; कई लोग गोशाला में चारे का दान कर देते हैं।

बंगाल में गोवर्धन पूजा होती है?

होती है, पर मुख्यतः वैष्णव मंदिरों में और कोलकाता के प्रवासी समुदायों में। बंगाल की शाक्त परंपरा का मुख्य आयोजन इस हफ़्ते काली पूजा है, जो 8 नवंबर की रात निशीथ काल में होती है।

स्रोत

  • panchangbodh.com — गोवर्धन पूजा पृष्ठ (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश): गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026 (मंगलवार), प्रतिपदा दोपहर 2:01 तक; अमावस्या 9 नवंबर तक खिंचने का उल्लेख
  • panchangbodh.com — भाई दूज पृष्ठ: भाई दूज 11 नवंबर 2026, द्वितीया दोपहर 3:55 तक; अपराह्न तिलक नई दिल्ली 1:09–3:19, मुंबई 1:29–3:45
  • prokerala.com — गोवर्धन पूजा पृष्ठ (उज्जैन, IST): 10 नवंबर 2026; प्रतिपदा 9 नवंबर 12:32 PM → 10 नवंबर 2:00 PM; प्रातःकाल मुहूर्त 6:41–8:53 AM; सायंकाल 3:28–5:40 PM; सूर्योदय 6:41, सूर्यास्त 5:40 PM
  • JPL DE421 ग्रह-गणित (skyfield) से स्वतंत्र गणना: अमावस्या 8 नवंबर 11:28 → 9 नवंबर 12:32; प्रतिपदा → 10 नवंबर 14:00; द्वितीया → 11 नवंबर 15:53 (IST); तथा चारों शहरों के सूर्योदय-सूर्यास्त
  • भागवत पुराण, दशम स्कंध, अध्याय 24–25 — इंद्र-यज्ञ का प्रसंग और गोवर्धन-धारण

सूचना: तिथि और मुहूर्त के मान पंचांग-पद्धति, गणना-विधि और नगर के अनुसार कुछ मिनट बदल सकते हैं। ऊपर हर आँकड़े के साथ उसका स्रोत और नगर लिखा है। स्थानीय परंपरा या कुलाचार भिन्न हो तो उसी का पालन करें; संदेह में अपने पुरोहित से पुष्टि कर लें। यह पृष्ठ जानकारी के लिए है और किसी सेवा का प्रस्ताव नहीं करता।

उपयोगी लगा? साझा करें:TelegramFacebookX