करवा चौथ 2026: 29 अक्टूबर, 40 शहरों का चंद्रोदय समय

करवा चौथ 2026 गुरुवार, 29 अक्टूबर को है। इस व्रत में सबसे ज़रूरी जानकारी एक ही है — आपके शहर का चंद्रोदय समय, क्योंकि व्रत चंद्र-दर्शन के बाद ही खोला जाता है। और यही वह जानकारी है जिसे अधिकतर लेख एक ही समय छापकर गलत कर देते हैं। कोलकाता में चाँद शाम 7:42 बजे निकलेगा, दिल्ली में 8:12, और मुंबई में 8:56 — यानी एक ही देश में लगभग 74 मिनट का अंतर। नीचे 40 शहरों की पूरी तालिका दी है।

इस लेख में
  1. करवा चौथ 2026: एक नज़र में
  2. करवा चौथ 2026 चंद्रोदय समय — 40 शहर
  3. तारीख़ पर कोई विवाद क्यों नहीं — और वह बात जो तालिका नहीं बताती
  4. बंगाल और पूर्वी भारत में करवा चौथ
  5. व्रत का क्रम — सरगी से चंद्र-दर्शन तक
  6. करवा चौथ की कथा
  7. स्वास्थ्य — जिस पर अधिकतर लेख चुप रहते हैं
  8. परंपरा को लेकर दो ईमानदार बातें
  9. रिश्ते से जुड़े ज्योतिषीय पक्ष
  10. करवा चौथ के बाद: 2026 का आगे का क्रम
  11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  12. स्रोत

करवा चौथ 2026: एक नज़र में

करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
तिथि कार्तिक कृष्ण चतुर्थी
चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर, लगभग प्रातः 01:08 से रात 22:11 तक
पूजा मुहूर्त (प्रदोष) — नई दिल्ली शाम 5:38 से 6:56
व्रत आरंभ (सरगी) — नई दिल्ली सूर्योदय से पूर्व, लगभग प्रातः 6:30
चंद्रोदय — दिल्ली / कोलकाता / मुंबई 8:12 / 7:42 / 8:56 बजे रात

तिथि-स्रोत: panchangbodh.com (नई दिल्ली और नामित शहरों के लिए, IST, लाहिरी अयनांश), 21, 23 और 28 अक्टूबर 2026 को दोबारा जाँचा गया — तीनों बार दोनों पृष्ठ 29 अक्टूबर पर सहमत मिले, और 28 अक्टूबर की जाँच में चालीसों शहरों के चंद्रोदय मान एक-एक करके मिलाए गए; सब अपरिवर्तित हैं। चतुर्थी तिथि के आरंभ-समाप्ति क्षण पूरे भारत में एक ही हैं; पूजा मुहूर्त, सूर्योदय और चंद्रोदय शहर-विशेष हैं और इन्हें एक राष्ट्रीय आँकड़े की तरह नहीं पढ़ा जाना चाहिए।

करवा चौथ 2026 चंद्रोदय समय — 40 शहर

नीचे दी गई तालिका 29 अक्टूबर 2026 के लिए है, भारतीय मानक समय में। अपने शहर का समय देखकर ही व्रत खोलने की तैयारी करें।

दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश

मेरठ 8:09 नोएडा 8:11
ग़ाज़ियाबाद 8:11 नई दिल्ली 8:12
फ़रीदाबाद 8:12 गुरुग्राम 8:13
आगरा 8:13 ग्वालियर 8:15

उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड

पटना 7:47 रांची 7:53
वाराणसी 7:57 लखनऊ 8:01
प्रयागराज 8:01 कानपुर 8:05

पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड

देहरादून 8:03 शिमला 8:04
श्रीनगर 8:04 चंडीगढ़ 8:07
अंबाला 8:08 जम्मू 8:09
लुधियाना 8:10 जालंधर 8:10
अमृतसर 8:12    

राजस्थान और मध्य प्रदेश

जयपुर 8:23 कोटा 8:27
भोपाल 8:26 बीकानेर 8:30
इंदौर 8:34 जोधपुर 8:36
उदयपुर 8:38    

पूर्वी, मध्य और दक्षिण भारत, महाराष्ट्र-गुजरात

कोलकाता 7:42 रायपुर 8:14
नागपुर 8:24 हैदराबाद 8:36
चेन्नई 8:39 अहमदाबाद 8:47
सूरत 8:51 बेंगलुरु 8:51
पुणे 8:53 मुंबई 8:56

तारीख़ पर कोई विवाद क्यों नहीं — और वह बात जो तालिका नहीं बताती

कई पर्वों पर दो तारीख़ों का सवाल उठता है। करवा चौथ 2026 में वह सवाल नहीं उठता, और इसकी वजह तिथि की लंबाई में है। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी 29 अक्टूबर को लगभग प्रातः 01:08 बजे शुरू होती है और उसी रात 22:11 (10:11 PM) पर समाप्त हो जाती है। यानी 29 अक्टूबर का सूर्योदय, पूरा दिन, प्रदोष काल और चंद्रोदय — चारों चतुर्थी के भीतर पड़ते हैं। किसी भी पंचांग को 28 या 30 अक्टूबर की ओर खिंचने की गुंजाइश ही नहीं बनती।

पर इसी गणित से एक दूसरी बात निकलती है, जिसका ज़िक्र चंद्रोदय की तालिकाएँ नहीं करतीं: तिथि रात 10:11 पर खत्म हो रही है, और पश्चिम तथा दक्षिण भारत में चाँद 8:50 के बाद उगता है। इसका मतलब है कि इन शहरों में चंद्रोदय और तिथि-समाप्ति के बीच बहुत थोड़ा समय बचता है।

शहर चंद्रोदय तिथि-अंत (22:11) तक बचा समय
कोलकाता 7:42 लगभग 2 घंटे 29 मिनट
पटना 7:47 लगभग 2 घंटे 24 मिनट
नई दिल्ली 8:12 लगभग 1 घंटा 59 मिनट
जयपुर 8:23 लगभग 1 घंटा 48 मिनट
हैदराबाद 8:36 लगभग 1 घंटा 35 मिनट
अहमदाबाद 8:47 लगभग 1 घंटा 24 मिनट
बेंगलुरु 8:51 लगभग 1 घंटा 20 मिनट
पुणे 8:53 लगभग 1 घंटा 18 मिनट
मुंबई 8:56 लगभग 1 घंटा 15 मिनट

यह अंतर दोनों सूचनाओं को घटाकर निकाला गया है — तिथि-समाप्ति का समय और उस शहर का चंद्रोदय, दोनों ऊपर दिए स्रोत से। कोलकाता को ढाई घंटे मिलते हैं, मुंबई को सवा घंटा।

इसे कितनी गंभीरता से लें, यह आपकी पारिवारिक परंपरा पर निर्भर है, और यहाँ ईमानदारी ज़रूरी है: अर्घ्य के लिए कोई पंचांग “अंतिम समय” नहीं छापता, और हमने जो स्रोत खोले उनमें भी ऐसी कोई सीमा नहीं दी गई। करवा चौथ का पारण चंद्र-दर्शन से बँधा है, घड़ी से नहीं। पर जिन परिवारों में यह माना जाता है कि पूजा और अर्घ्य चतुर्थी तिथि के भीतर ही हो जाने चाहिए, उनके लिए व्यावहारिक निष्कर्ष सीधा है — मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, सूरत और अहमदाबाद में चाँद दिखने के बाद अर्घ्य टालें नहीं, थाली पहले से तैयार रखें। पूर्वी भारत में यह जल्दबाज़ी ज़रूरी नहीं।

और यदि बादल या ऊँची इमारतों के कारण चाँद 10:11 के बाद भी न दिखे, तो परंपरा की वह छूट लागू होती है जिसका ज़िक्र नीचे प्रश्नोत्तर में है — भूखे-प्यासे अनिश्चित प्रतीक्षा करना परंपरा की माँग नहीं है।

एक व्यावहारिक सावधानी: तालिका में दिया समय ज्यामितीय चंद्रोदय है — यानी वह क्षण जब चंद्रमा क्षितिज से ऊपर आता है। ऊँची इमारतें, पहाड़, पेड़ या धुंध-बादल के कारण वास्तविक दर्शन इससे 10–20 मिनट बाद भी हो सकता है। इसलिए दिए समय को “सबसे पहले संभव समय” मानें और थोड़ा धैर्य रखें।

बंगाल और पूर्वी भारत में करवा चौथ

करवा चौथ परंपरागत रूप से उत्तर और पश्चिम भारत का व्रत है — दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में यह सबसे व्यापक रूप से मनाया जाता है। बंगाली पंजिका में कार्तिक कृष्ण चतुर्थी एक तिथि के रूप में दर्ज तो है, पर करवा चौथ बंगाल का पारंपरिक प्रमुख व्रत नहीं रहा। कोलकाता में आज यह व्रत बड़ी संख्या में रखा जाता है, मुख्यतः उत्तर भारतीय मूल के परिवारों में और मिश्रित विवाहों में — यानी यह शहर में आया हुआ पर्व है, यहाँ की पंजिका से निकला हुआ नहीं।

बंगाल की कार्तिक-परंपरा का केंद्र कहीं और है। इस मौसम में यहाँ की दो बड़ी रातें कोजागरी लक्ष्मी पूजा (25 अक्टूबर) और काली पूजा (8 नवंबर की मध्यरात्रि) हैं। करवा चौथ इन दोनों के बीच पड़ता है। यह अंतर समझ लेने पर एक आम भ्रम भी दूर हो जाता है — बंगाल में लक्ष्मी की मुख्य पूजा दीपावली वाली नहीं, शरद पूर्णिमा वाली है।

कोलकाता के आसपास के शहरों का समय

हमारे स्रोत की तालिका में कोलकाता है, पर हावड़ा, साल्ट लेक, बैरकपुर, सिलीगुड़ी, दुर्गापुर, आसनसोल, भुवनेश्वर और गुवाहाटी नहीं। इन पर दो अलग बातें लागू होती हैं:

  • हावड़ा, साल्ट लेक, बैरकपुर, न्यू टाउन — ये कोलकाता से कुछ ही किलोमीटर दूर हैं, इसलिए व्यावहारिक रूप से कोलकाता का 7:42 ही लागू मानें। इतनी दूरी पर अंतर एक मिनट से भी कम बैठता है।
  • सिलीगुड़ी, दुर्गापुर, आसनसोल, भुवनेश्वर, गुवाहाटी — इनका कोई समय हम नहीं छाप रहे, क्योंकि हमने जो स्रोत खोला उसमें ये शहर नहीं हैं और अनुमान से मिनट गढ़ना गलत होगा। अपने शहर का स्थानीय पंचांग देखें।

चंद्रोदय में 74 मिनट का फर्क क्यों — यह गणित तालिकाएँ नहीं बतातीं

कोलकाता 7:42 और मुंबई 8:56 — एक ही रात, एक ही घड़ी (IST), पर 74 मिनट का अंतर। इसकी वजह सीधी है और जान लेने लायक है।

भारत की पूरी घड़ी एक ही देशांतर (82.5° पूर्व) पर सेट है, जबकि चाँद हर जगह अपने स्थानीय क्षितिज से उगता है। कोलकाता लगभग 88.4° पूर्व पर है और मुंबई लगभग 72.9° पूर्व पर — यानी लगभग 15.5° का अंतर। पृथ्वी एक घंटे में 15° घूमती है, इसलिए अकेले देशांतर से ही लगभग 62 मिनट का फर्क बन जाता है: पूर्व का शहर पहले, पश्चिम का बाद में।

बचा हुआ लगभग 12 मिनट का अंतर अक्षांश से आता है। चंद्रमा उस रात भूमध्य रेखा के सापेक्ष जिस कोण (क्रांति) पर होता है, उसके कारण उत्तर और दक्षिण के शहरों में उदय-बिंदु और उदय-समय थोड़ा खिसक जाता है। यही कारण है कि केवल “पूर्व-पश्चिम” का हिसाब लगाकर अपने शहर का समय निकालना पूरी तरह सही नहीं होता — नज़दीकी शहर का समय लेना ठीक है, दूर के शहर से गणना करना नहीं।

चाँद सूर्यास्त के ढाई घंटे बाद ही क्यों निकलता है

करवा चौथ का सबसे आम सवाल तालिका के बाद यही होता है — सूर्यास्त हो गया, पूजा भी हो गई, फिर चाँद के लिए दो-ढाई घंटे क्यों रुकना पड़ता है। इसका कारण तिथि में ही छिपा है।

पूर्णिमा की रात चंद्रमा सूर्यास्त के साथ ही उगता है — सूर्य पश्चिम में डूबता है, चाँद पूर्व में निकलता है। उसके बाद हर तिथि पर चंद्रोदय औसतन 45–50 मिनट आगे खिसकता जाता है, क्योंकि चंद्रमा अपनी कक्षा में रोज़ लगभग 13° आगे बढ़ जाता है और पृथ्वी को उसे क्षितिज पर लाने के लिए उतना अतिरिक्त घूमना पड़ता है।

करवा चौथ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है, यानी पूर्णिमा के चार तिथि बाद। चार गुना 45–50 मिनट — यही वह दो से तीन घंटे का अंतराल है। आँकड़ों में भी यही दिखता है: नई दिल्ली के लिए हमारे स्रोत ने प्रदोष काल शाम 5:38 से दिया है (प्रदोष सूर्यास्त से आरंभ होता है), और चंद्रोदय 8:12 — यानी लगभग 2 घंटे 34 मिनट का फासला। यह अलग से निकाला गया कोई मुहूर्त नहीं, ऊपर दिए दो सोर्स-आँकड़ों का घटाव है।

इसी गणित का एक और नतीजा है जो लोगों को चौंकाता है: चाँद देर से निकलेगा, पर कटा हुआ नहीं दिखेगा। पूर्णिमा के चार तिथि बाद का चंद्रमा अब भी बड़ा और चमकीला होता है — एक किनारा थोड़ा चपटा लगेगा, बस। छलनी से दर्शन में कोई कठिनाई नहीं होती।

तालिका का समय और “दिख जाने” का समय एक नहीं होता

ऊपर की तालिका ज्यामितीय चंद्रोदय देती है — वह क्षण जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा गणितीय क्षितिज को पार करता है। हमारा स्रोत स्वयं यह चेतावनी छापता है कि वास्तविक दर्शन इससे कुछ मिनट बाद होता है, और व्यवहार में यह अंतर दिख भी जाता है।

वजह यह है कि कोई भी शहर गणितीय क्षितिज पर नहीं बसा होता। सामने की इमारतें, पेड़, पहाड़ी, और अक्टूबर-अंत की धुंध व शहरी धूल — चाँद जब क्षितिज के पास होता है तो उसकी रोशनी वायुमंडल की सबसे मोटी परत से गुज़रती है, इसलिए वह मंद और लाल-सा दिखता है। इसका व्यावहारिक मतलब सीधा है:

  • अपने शहर का समय देखकर छत या खुली खिड़की पर उससे 10 मिनट पहले पहुँच जाएँ, तालिका के समय पर नहीं।
  • पूर्व–उत्तर-पूर्व दिशा में देखें, और ऊँची इमारत सामने हो तो दूसरी जगह चुनें।
  • समय निकल जाने पर घबराएँ नहीं — ऊँचे उठने के बाद चाँद और साफ़ दिखता है, पहले नहीं।

व्रत का क्रम — सरगी से चंद्र-दर्शन तक

सरगी (प्रातः, सूर्योदय से पहले)

सरगी सास द्वारा बहू को दिया जाने वाला प्रातःकालीन भोजन है, जो सूर्योदय से पहले ग्रहण किया जाता है। परंपरा में इसमें फेनी, मिठाई, फल, मेवा और दूध शामिल होते हैं। जिन परिवारों में सास न हों, वहाँ माँ, जेठानी या परिवार का कोई सदस्य यह भूमिका निभाता है।

व्यावहारिक सुझाव: सरगी में बहुत मीठा और तला हुआ कम रखें, और पानी तथा नारियल पानी ज़रूर लें। पूरे दिन का निर्जल व्रत रखने वालों के लिए सुबह का हाइड्रेशन सबसे ज़्यादा मायने रखता है।

दिन भर

परंपरा में यह निर्जला व्रत है — अन्न और जल दोनों का त्याग। पर यह अनिवार्यता हर परिवार में एक जैसी नहीं है; अनेक परिवारों में फल, दूध या जल की छूट है, और यह भी परंपरा का मान्य रूप है।

संध्या पूजा (प्रदोष काल)

नई दिल्ली के लिए पूजा मुहूर्त शाम 5:38 से 6:56 है। आपके शहर का प्रदोष काल भिन्न होगा — स्थानीय पंचांग देखें। पूजा में सामान्यतः:

  • मिट्टी या धातु का करवा (टोंटीदार पात्र) जल से भरकर रखा जाता है
  • गौरी-गणेश की स्थापना; कई क्षेत्रों में मिट्टी की गौरी बनाई जाती है
  • करवा चौथ की कथा का वाचन, समूह में बैठकर
  • थाली-फेरी की परंपरा, जहाँ प्रचलित हो
  • सोलह शृंगार और नए वस्त्र — यह सांस्कृतिक रीति है, अनिवार्य विधि नहीं

चंद्र-दर्शन और पारण

  • चंद्रोदय के बाद छलनी से चंद्रमा का दर्शन
  • चंद्रमा को जल का अर्घ्य
  • फिर उसी छलनी से पति का दर्शन; पति द्वारा जल पिलाकर व्रत का पारण
  • पारण के बाद हल्का भोजन लें — एकदम भारी भोजन से बचें

करवा चौथ की कथा

करवा चौथ से कई कथाएँ जुड़ी हैं। सर्वाधिक प्रचलित कथा करवा नामक पतिव्रता स्त्री की है, जिसने अपने पति को मृत्यु से बचाने के लिए यमराज से आग्रह किया और अपने तप के बल पर उसे लौटा लाई — “करवा” नाम से ही पर्व का नाम जुड़ा माना जाता है। एक अन्य कथा वीरवती की है, जिसमें भाइयों द्वारा बहन का व्रत समय से पहले तुड़वा देने का प्रसंग आता है। महाभारत से जुड़ी परंपरा में द्रौपदी द्वारा अर्जुन के लिए व्रत रखने का उल्लेख भी लोक-कथाओं में मिलता है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि इन कथाओं के क्षेत्रीय पाठभेद बहुत हैं — करवा की कथा उत्तर भारत में अधिक प्रचलित है, वीरवती की कथा पंजाब-हरियाणा में, और द्रौपदी का प्रसंग लोक-परंपरा में मिलता है, किसी एक प्रामाणिक पाठ में नहीं। कथा-वाचन के समय अपने परिवार या क्षेत्र में चली आ रही कथा को ही प्राथमिकता दें।

स्वास्थ्य — जिस पर अधिकतर लेख चुप रहते हैं

निर्जला व्रत 13–14 घंटे का होता है। यह अधिकतर स्वस्थ व्यक्तियों के लिए सुरक्षित है, पर सबके लिए नहीं। परंपरा का पालन अपने शरीर की कीमत पर नहीं होना चाहिए, और शास्त्र भी किसी पर असंभव कठोरता का बोझ नहीं डालता।

निम्न स्थितियों में निर्जला व्रत से पहले चिकित्सक से बात करें, और आवश्यकता हो तो फल-जल वाले विकल्प को चुनें:

  • गर्भावस्था या स्तनपान की अवधि
  • मधुमेह (डायबिटीज़), विशेषकर इंसुलिन या सल्फोनिलयूरिया लेने पर — लंबे उपवास में शुगर गिरने का वास्तविक जोखिम होता है
  • निम्न या अनियंत्रित रक्तचाप
  • गुर्दे या पित्ताशय की पथरी का इतिहास
  • माइग्रेन, एनीमिया या कोई भी नियमित दवा जो भोजन के साथ लेनी होती है
  • कोई भी गंभीर या चल रही बीमारी

चक्कर आना, अत्यधिक कमज़ोरी, धुंधला दिखना, ठंडा पसीना या धड़कन तेज़ होना — ये संकेत मिलने पर व्रत तुरंत खोल दें और पानी तथा कुछ मीठा लें। व्रत तोड़ना अपराध नहीं है; स्वास्थ्य को जोखिम में डालना परंपरा की माँग नहीं है।

परंपरा को लेकर दो ईमानदार बातें

पहली: करवा चौथ परंपरागत रूप से पति की दीर्घायु और कुशलता की कामना से जोड़ा जाता है। यह एक सांस्कृतिक और श्रद्धा का भाव है। व्रत रखने या न रखने से किसी की आयु तय नहीं होती — ऐसा दावा कोई भी शास्त्र नहीं करता, और इसे आधार बनाकर किसी स्त्री पर दबाव डालना परंपरा का दुरुपयोग है।

दूसरी: आज अनेक दंपति इस व्रत को साथ रखते हैं — पति भी पत्नी के लिए उपवास करते हैं। यह परंपरा का स्वाभाविक विकास है और इसमें कुछ अनुचित नहीं। जो परिवार पुराने रूप में निभाते हैं और जो नए रूप में, दोनों अपनी जगह ठीक हैं।

रिश्ते से जुड़े ज्योतिषीय पक्ष

करवा चौथ के आसपास दांपत्य जीवन से जुड़े प्रश्न स्वाभाविक रूप से बढ़ते हैं। ज्योतिष में इसके लिए मुख्यतः सप्तम भाव, शुक्र, मंगल और शनि की स्थिति देखी जाती है। विस्तृत चर्चा हमारे इन लेखों में है:

यदि घर में लगातार तनाव या कलह की स्थिति है, तो उपाय के साथ-साथ संवाद और आवश्यकता पड़ने पर पेशेवर काउंसलिंग को भी गंभीरता से लें। ज्योतिष परिस्थिति समझने में सहायक हो सकता है, पर रिश्ते बातचीत से बनते हैं।

करवा चौथ के बाद: 2026 का आगे का क्रम

करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि है, यानी यह दिवाली की ओर बढ़ते क्रम की पहली कड़ी है। उसी पक्ष की अमावस्या पर दीपावली आती है — इसलिए करवा चौथ के ठीक दस दिन बाद त्योहारों का सबसे घना हिस्सा शुरू हो जाता है:

इससे पहले का क्रम भी छोटा था — 22 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी पड़ चुकी है, और करवा चौथ से चार दिन पहले शरद पूर्णिमा और कोजागरी लक्ष्मी पूजा पड़ चुकी होती है — बंगाल में लक्ष्मी की मुख्य पूजा वही है, दीपावली वाली नहीं। तिथि एक ही दिन दो अलग तारीख़ों में क्यों दिख जाती है, इसकी पूरी पद्धति पंजिका और पंचांग के फर्क वाले लेख में समझाई गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करवा चौथ 2026 कब है?

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि उस दिन लगभग प्रातः 01:08 से रात 22:11 तक रहेगी।

मेरे शहर में चाँद कितने बजे निकलेगा?

ऊपर 40 शहरों की तालिका देखें। उदाहरण के लिए दिल्ली 8:12, कोलकाता 7:42, मुंबई 8:56, जयपुर 8:23, लखनऊ 8:01 बजे रात। आपका शहर सूची में न हो तो निकटतम बड़े शहर का समय लें और 10–15 मिनट का अंतर मानकर चलें।

अगर बादल हों और चाँद न दिखे तो क्या करें?

परंपरा में ऐसी स्थिति के लिए छूट है — चंद्रोदय का समय बीत जाने के बाद चंद्रमा की दिशा में अर्घ्य देकर, या चंद्रमा के चित्र अथवा प्रतीक के दर्शन कर व्रत खोला जा सकता है। घंटों भूखे-प्यासे प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं।

पहली बार व्रत रख रही हूँ, क्या ध्यान रखूँ?

सरगी में पर्याप्त पानी और नारियल पानी लें, बहुत तला-मीठा न खाएँ, दिन में आराम करें और तेज़ धूप तथा भारी काम से बचें। कोई स्वास्थ्य समस्या या नियमित दवा हो तो पहले चिकित्सक से बात कर लें और फल-जल वाला विकल्प चुनने में संकोच न करें।

क्या अविवाहित लड़कियाँ करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?

अनेक क्षेत्रों में अविवाहित युवतियाँ मनचाहे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं, और यह परंपरा में प्रचलित है। विधि में अंतर होता है — सामान्यतः चंद्र-दर्शन के बाद पारण किया जाता है, छलनी से पति-दर्शन की रीति के बिना।

चतुर्थी तिथि रात 10:11 पर खत्म हो रही है — क्या अर्घ्य उससे पहले देना ज़रूरी है?

कोई पंचांग अर्घ्य के लिए अंतिम समय नहीं छापता, और हमारे खोले गए स्रोतों में भी ऐसी सीमा नहीं दी गई — पारण चंद्र-दर्शन से बँधा है। पर जिन परिवारों में पूजा-अर्घ्य चतुर्थी के भीतर रखने की रीति है, उनके लिए पश्चिम और दक्षिण भारत में समय कम है: मुंबई में चंद्रोदय 8:56 है, यानी तिथि-अंत तक लगभग सवा घंटा। वहाँ चाँद दिखने के बाद देर न करें। कोलकाता और पटना में ढाई घंटे के करीब मिलते हैं।

करवा चौथ के बाद अगला बड़ा पर्व कौन-सा है?

धनतेरस, 6 नवंबर 2026। उसके बाद 7 नवंबर को काली चौदस, और 8 नवंबर को कार्तिक अमावस्या पर दीपावली तथा काली पूजा एक ही रात पड़ती हैं। ऊपर “आगे का क्रम” खंड में पूरी सूची और हर पर्व का विस्तृत लेख दिया गया है।

क्या बंगाल में करवा चौथ मनाया जाता है?

परंपरागत रूप से यह बंगाल का व्रत नहीं है — बंगाली पंजिका में कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि के रूप में है, पर करवा चौथ यहाँ का प्रमुख व्रत नहीं रहा। कोलकाता में आज यह बड़ी संख्या में रखा जाता है, मुख्यतः उत्तर भारतीय मूल के परिवारों और मिश्रित विवाहों में। बंगाल की कार्तिक-परंपरा का केंद्र कोजागरी लक्ष्मी पूजा और काली पूजा है।

हावड़ा, साल्ट लेक या बैरकपुर में चाँद का समय अलग होगा?

व्यावहारिक रूप से नहीं। ये इलाके कोलकाता से कुछ ही किलोमीटर दूर हैं, इसलिए 7:42 ही लागू मानें — इतनी दूरी पर अंतर एक मिनट से भी कम बैठता है। सिलीगुड़ी, दुर्गापुर, आसनसोल, भुवनेश्वर और गुवाहाटी हमारे स्रोत की तालिका में नहीं हैं, इसलिए उनका समय हम नहीं छाप रहे; वहाँ स्थानीय पंचांग देखें।

सरगी नहीं मिली या सास नहीं हैं — तो क्या करें?

सरगी एक पारिवारिक रीति है, व्रत की शर्त नहीं। जहाँ सास न हों, वहाँ माँ, जेठानी, ननद या परिवार का कोई भी सदस्य यह भूमिका निभाता है, और अकेले रहने वाली स्त्रियाँ स्वयं अपने लिए सरगी तैयार कर लेती हैं। महत्व इस बात का है कि सूर्योदय से पहले पर्याप्त भोजन और पानी हो जाए — पूरे दिन के निर्जल व्रत में यही सबसे ज़्यादा काम आता है।

तालिका में दिए समय पर ही चाँद दिख जाएगा?

कुछ मिनट बाद। तालिका का आँकड़ा ज्यामितीय चंद्रोदय है — वह क्षण जब चाँद गणितीय क्षितिज पार करता है। सामने की इमारतें, पेड़ और अक्टूबर-अंत की धुंध मिलकर उसे कुछ मिनट और पीछे खींच देती हैं। अपने शहर के समय से 10 मिनट पहले खुली जगह पर पहुँच जाएँ और पूर्व–उत्तर-पूर्व दिशा में देखें।

चाँद पूरा गोल दिखेगा या कटा हुआ?

लगभग पूरा। चतुर्थी पूर्णिमा के चार तिथि बाद पड़ती है, इसलिए चंद्रमा बड़ा और चमकीला रहता है — एक किनारा थोड़ा चपटा लगेगा। देर से निकलना और कटा दिखना दो अलग बातें हैं; देर इसलिए होती है कि पूर्णिमा के बाद हर तिथि पर चंद्रोदय 45–50 मिनट आगे खिसक जाता है।

करवा चौथ और शरद पूर्णिमा में क्या संबंध है?

दोनों ही अक्टूबर 2026 में हैं पर अलग पर्व हैं। शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को आश्विन पूर्णिमा पर है, और करवा चौथ उसके चार दिन बाद कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को।

स्रोत

  • panchangbodh.com — करवा चौथ (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश), 21 अक्टूबर 2026 को पढ़ा गया: व्रत गुरुवार 29 अक्टूबर 2026; चतुर्थी तिथि लगभग 01:08 से 22:11 तक; पूजा मुहूर्त (नई दिल्ली) शाम 5:38–6:56
  • panchangbodh.com — करवा चौथ चंद्रोदय समय, 21 अक्टूबर 2026 को पढ़ा गया: 40 शहरों की ज्यामितीय चंद्रोदय तालिका (कोलकाता 7:42, नई दिल्ली 8:12, मुंबई 8:56), कोलकाता-मुंबई अंतर लगभग 74 मिनट
  • चंद्रोदय के ज्यामितीय मान और वास्तविक दर्शन में अंतर की चेतावनी — उपर्युक्त चंद्रोदय पृष्ठ
  • चंद्रोदय से तिथि-अंत तक बचे समय की गणना इन्हीं दो स्रोतों के आँकड़ों को घटाकर निकाली गई है; यह कोई अलग मुहूर्त नहीं है
  • दोनों पृष्ठ 23 अक्टूबर 2026 को दोबारा खोले गए — तिथि, पूजा मुहूर्त और 40 शहरों के चंद्रोदय मान पहले जैसे ही मिले
  • व्रत से एक दिन पहले, 28 अक्टूबर 2026 की रात को दोनों पृष्ठ तीसरी बार खोले गए: चतुर्थी 01:08–22:11, नई दिल्ली प्रदोष 5:38–6:56 और चालीसों शहरों के चंद्रोदय मान अपरिवर्तित मिले
  • पूर्णिमा के बाद चंद्रोदय के प्रतिदिन 45–50 मिनट खिसकने और ज्यामितीय उदय बनाम वास्तविक दर्शन के अंतर का विवरण सामान्य खगोलीय सिद्धांत तथा उपर्युक्त चंद्रोदय पृष्ठ की चेतावनी पर आधारित है; इससे किसी शहर का कोई नया समय नहीं निकाला गया
  • देशांतर-अक्षांश वाला स्पष्टीकरण सामान्य खगोलीय सिद्धांत है (पृथ्वी एक घंटे में 15° घूमती है; कोलकाता ~88.4°E, मुंबई ~72.9°E); इससे कोई नया समय नहीं निकाला गया, केवल ऊपर दिए स्रोत के आँकड़ों का अंतर समझाया गया है

सूचना: इस लेख में दी गई परंपराएँ सांस्कृतिक मान्यताएँ हैं। व्रत से जुड़ा कोई भी स्वास्थ्य निर्णय अपनी स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर लें। चंद्रोदय और मुहूर्त नामित शहरों के लिए हैं; अपने नगर का पंचांग अवश्य देखें।

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