दिवाली 2026: 8 नवंबर, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और स्थिर लग्न

दीपावली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है — 9 नवंबर को नहीं, भले कई कैलेंडर में “कार्तिक अमावस्या” 9 नवंबर लिखी मिले। लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त प्रदोष काल के भीतर पड़ने वाला वृषभ (स्थिर) लग्न है, जो नई दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50 बजे तक रहेगा। नीचे पहले तारीखें, फिर वह गणना जिससे यह तय होता है — “8 या 9 नवंबर” का भ्रम हर साल इसी नियम को न समझने से बनता है।

इस लेख में
  1. दीपावली 2026 एक नज़र में
  2. 8 नवंबर क्यों, 9 नवंबर क्यों नहीं — प्रदोष-व्यापिनी अमावस्या
  3. प्रदोष काल और स्थिर लग्न — पूजा की खिड़की छोटी क्यों
  4. कोलकाता का मुहूर्त: मिनट क्यों नहीं छाप रहे
  5. 8 नवंबर: एक तारीख़, तीन अलग पूजाएँ
  6. 9 नवंबर खाली क्यों — और गोवर्धन पूजा 10 को क्यों
  7. लक्ष्मी पूजा की सरल विधि
  8. दीप जलाते समय — सुरक्षा
  9. एक साफ़ बात: पूजा और धन
  10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  11. स्रोत

दीपावली 2026 एक नज़र में

दीपावली / लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026
कार्तिक अमावस्या आरंभ 8 नवंबर, सुबह ~11:27–11:30 (स्रोतों में 2–3 मिनट का अंतर)
कार्तिक अमावस्या समाप्त 9 नवंबर, दोपहर ~12:31–12:33
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (नई दिल्ली) शाम 5:54 – 7:50 — वृषभ स्थिर लग्न
प्रदोष काल (नई दिल्ली) शाम 5:31 से; समाप्ति पर स्रोत असहमत (7:55 या 8:12)
मुंबई स्रोतों में बड़ा अंतर: 6:01–8:25 या 6:27–8:27
कोलकाता सत्यापित स्थानीय मुहूर्त नहीं मिला — कारण नीचे
नरक चतुर्दशी, अभ्यंग स्नान 8 नवंबर, सूर्योदय से पूर्व (दिल्ली सूर्योदय 6:38)
काली पूजा, निशीथ काल 8–9 नवंबर की मध्यरात्रि
गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर (प्रतिपदा दोपहर 2:01 तक)
भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर (द्वितीया दोपहर 3:55 तक; दिल्ली तिलक 1:09–3:19)

तिथि-स्रोत: panchangbodh (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश), 21 अक्टूबर 2026 को देखा गया; अमावस्या के समय दो अन्य हिंदी पंचांग स्रोतों से क्रॉस-चेक किए गए। तिथि के आरंभ-समाप्ति के क्षण पूरे भारत में एक ही होते हैं; मुहूर्त, सूर्योदय और सूर्यास्त स्थान-सापेक्ष हैं।

8 नवंबर क्यों, 9 नवंबर क्यों नहीं — प्रदोष-व्यापिनी अमावस्या

पूरा भ्रम एक ही बात से आता है: अमावस्या तिथि दो दिनों में फैली है। वह 8 नवंबर को सुबह लगभग 11:27–11:30 बजे लगती है और 9 नवंबर को दोपहर लगभग 12:31–12:33 बजे छूटती है। अब दोनों संध्याएँ देखिए:

  • 8 नवंबर की शाम — अमावस्या चल रही है।
  • 9 नवंबर की शाम — अमावस्या दोपहर में ही बीत गई; शाम को प्रतिपदा है।

लक्ष्मी पूजा का नियम प्रदोष-व्यापिनी अमावस्या का है — पूजा उस संध्या को होगी जिसमें अमावस्या मौजूद हो। प्रदोष यानी सूर्यास्त के बाद का संध्या-काल। 8 की संध्या में अमावस्या है, 9 की संध्या में नहीं। इसलिए दीपों वाली रात 8 नवंबर की है, और इस पर हमारे देखे सभी पंचांग एकमत हैं।

तो कैलेंडर में “कार्तिक अमावस्या — 9 नवंबर” क्यों छपता है? क्योंकि तिथि का नाम वाला दिन सूर्योदय से तय होता है: 9 नवंबर के सूर्योदय पर अमावस्या चल रही है, 8 के सूर्योदय पर नहीं। कुछ पंचांग उसे सोमवती अमावस्या भी लिखते हैं। पर पूजा का दिन प्रदोष से तय होता है। दो अलग नियम, दो अलग उत्तर, दोनों अपनी जगह सही — यही पेच काली पूजा 2026 की तिथि-गणना में विस्तार से खुला है।

हर त्योहार की अपनी “व्यापिनी” शर्त होती है। इसीलिए विजयादशमी अपराह्न से तय होती है और अष्टमी-नवमी एक ही दिन पड़ जाती हैं।

प्रदोष काल और स्थिर लग्न — पूजा की खिड़की छोटी क्यों

प्रदोष काल और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त एक नहीं हैं, और अंतर व्यावहारिक है:

  • प्रदोष काल — सूर्यास्त के बाद का संध्या-खंड। दिल्ली में ~5:31 से शुरू। समाप्ति पर स्रोत असहमत हैं: एक पंचांग 7:55 देता है, दूसरा लगभग 8:12। प्रदोष की लंबाई की परिभाषा हर परंपरा में थोड़ी अलग है।
  • वृषभ (स्थिर) लग्न — प्रदोष के भीतर वह उपखंड जब वृषभ राशि उदित हो। दिल्ली में 5:54–7:50। इस पर दो स्वतंत्र स्रोत एक मिनट के भीतर सहमत हैं (5:54–7:50 और ~5:55–7:49), इसलिए यही सबसे भरोसेमंद आँकड़ा है।

स्थिर लग्न क्यों? राशियाँ चर, स्थिर और द्विस्वभाव में बँटी हैं; वृषभ स्थिर है। परंपरा का भाव सीधा है — लक्ष्मी को “आने” के लिए नहीं, “ठहरने” के लिए बुलाया जाता है। यह आस्था का तर्क है, भौतिक दावा नहीं; पर इसी से पूजा की खिड़की प्रदोष से छोटी, लगभग दो घंटे की रह जाती है।

दिल्ली और आसपास हों तो 5:54–7:50 के बीच मुख्य पूजा कर लें। इतनी सटीकता संभव न हो तो सूर्यास्त के बाद की संध्या में पूजा परंपरा में स्वीकार्य है — मुहूर्त सहायता है, शर्त नहीं। यही अंतर धनतेरस 2026 के मुहूर्त वाले लेख में भी समझाया गया है।

कोलकाता का मुहूर्त: मिनट क्यों नहीं छाप रहे

यह साइट कोलकाता-केंद्रित है, इसलिए साफ़ कहना ज़रूरी है: इस लेख में कोलकाता का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त नहीं है, क्योंकि इस बार कोई सत्यापित कोलकाता आँकड़ा नहीं मिला। जो पंचांग स्रोत हमने खोले, वे केवल नई दिल्ली और मुंबई के लिए समय छापते हैं।

अनुमान लगाकर संख्या छापना यहाँ विशेष रूप से गलत होता, क्योंकि मुहूर्त सूर्यास्त से बंधा है और कोलकाता दिल्ली से लगभग 800 किलोमीटर पूर्व में है। पूर्व में सूर्यास्त पहले होता है, इसलिए कोलकाता का प्रदोष और स्थिर लग्न दोनों दिल्ली से पहले शुरू और पहले समाप्त होंगे — दिल्ली का 5:54 कोलकाता पर लागू करना सीधी गलती है। तुलना के लिए: धनतेरस पर कोलकाता का मुहूर्त दिल्ली से लगभग आधा घंटा पहले था।

तो नियम हाथ में रखें और संख्या अपनी जगह से लें — स्थानीय सूर्यास्त देखकर उसके बाद की संध्या में पूजा करें। बंगाली परिवार इसके लिए अपनी पंजिका देखते हैं, जो स्थानीय गणना पर बनी होती है और इस मामले में सामान्य पंचांग से बेहतर मार्गदर्शक है। सत्यापित कोलकाता मुहूर्त मिलते ही यह लेख अपडेट होगा। और ध्यान रहे — बंगाल में 8 नवंबर की रात का मुख्य आयोजन प्रदोष की लक्ष्मी पूजा नहीं, मध्यरात्रि की काली पूजा है। वहाँ वर्ष की पहली बड़ी लक्ष्मी पूजा दो हफ़्ते पहले ही हो चुकी होती है — 25 अक्टूबर की कोजागरी रात को, आश्विन पूर्णिमा पर।

8 नवंबर: एक तारीख़, तीन अलग पूजाएँ

2026 में 8 नवंबर असामान्य रूप से भरा दिन है, क्योंकि दो तिथियाँ उसी दिन में सिमट गई हैं:

  • सूर्योदय से पहले — नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान। चतुर्दशी 7 नवंबर सुबह 10:49 से 8 नवंबर सुबह 11:30 तक है, इसलिए 8 की भोर में चतुर्दशी चल रही है। दिल्ली में सूर्योदय 6:38; स्नान उससे पहले।
  • शाम, प्रदोष में — लक्ष्मी पूजा, क्योंकि तब अमावस्या लग चुकी है।
  • मध्यरात्रि, निशीथ में — काली पूजा, बंगाल की मुख्य परंपरा, जिसका सबसे बड़ा केंद्र दक्षिण कोलकाता का कालीघाट शक्तिपीठ है। इस रात जपे जाने वाले काली माता के मूल मंत्र और जप के नियम अलग लेख में दिए हैं।

इससे एक दिन पहले, 7 नवंबर की रात, काली चौदस और बंगाल की भूत चतुर्दशी पड़ती है — वही चतुर्दशी तिथि, पर उसका संध्या वाला हिस्सा। एक तिथि के तीन दिनों पर बँट जाने का पूरा हिसाब नरक चतुर्दशी और काली चौदस 2026 में है।

9 नवंबर खाली क्यों — और गोवर्धन पूजा 10 को क्यों

यह इस साल की सबसे आम गलती है। कई जगह गोवर्धन पूजा 9 नवंबर और भाई दूज 10 नवंबर छपा मिलेगा; गणना इससे सहमत नहीं दिखती।

तिथियाँ लगातार चलती हैं — एक छूटते ही अगली लगती है। अमावस्या 9 नवंबर दोपहर ~12:32 पर छूटती है, इसलिए प्रतिपदा उसी क्षण से 10 नवंबर दोपहर 2:01 तक चलती है। गोवर्धन पूजा प्रातःकाल का आयोजन है:

  • 9 नवंबर की सुबह — तिथि अभी अमावस्या है; प्रतिपदा दोपहर तक लगती ही नहीं।
  • 10 नवंबर की सुबह — प्रतिपदा चल रही है, दोपहर 2:01 तक।

इसलिए गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर। इसी तरह द्वितीया 10 नवंबर दोपहर 2:01 से 11 नवंबर दोपहर 3:55 तक है, और भाई दूज का तिलक अपराह्न में होता है — 11 नवंबर का पूरा अपराह्न द्वितीया में है, 10 का नहीं। इसलिए भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर; दिल्ली में तिलक 1:09–3:19, मुंबई में 1:29–3:45। कोलकाता और 16 शहरों का तिलक समय अलग पृष्ठ पर है।

नतीजा: 2026 में 9 नवंबर पर कोई बड़ा आयोजन नहीं पड़ता। अगर आपके घर की पंजिका 9 नवंबर देती है, तो देखें वह किस नियम से चल रही है और परिवार की रीति का पालन करें — इतनी सीमा-रेखा वाली स्थितियों में परंपराएँ ईमानदारी से अलग हो जाती हैं।

लक्ष्मी पूजा की सरल विधि

यही ढाँचा परंपरा में आम है — कोई गुप्त विधि नहीं:

  • सफ़ाई और स्नान; पूजा-स्थान पूर्व या उत्तर-पूर्व की ओर।
  • चौकी पर लाल या सफ़ेद वस्त्र, उस पर गणेश और लक्ष्मी — परंपरा में गणेश पूजन पहले।
  • कलश, दीपक, जल, अक्षत, रोली, पुष्प और नैवेद्य (खीर या बताशे सामान्य हैं)।
  • संकल्प, गणेश पूजन, लक्ष्मी पूजन, आरती।
  • बहीखाते या दुकान की पूजा जहाँ परिवार की रीति हो — व्यापार-स्थल की पूजा की परंपरा इसी दिन से जुड़ी है।
  • द्वार, आँगन और तुलसी के पास दीप।

अमावस्या से जुड़े पितृ और दान संबंधी सामान्य उपाय अमावस्या के शास्त्रीय उपायों में अलग दिए हैं।

दीप जलाते समय — सुरक्षा

  • दीप पर्दे, कागज़ या सजावट के नीचे न रखें; लकड़ी की चौकी पर धातु की प्लेट रखें।
  • छोटे बच्चों और पालतू जानवरों को जलते दीपों के पास अकेला न छोड़ें।
  • सिंथेटिक और ढीले कपड़े जल्दी पकड़ते हैं — सूती वस्त्र बेहतर; दुपट्टा और आँचल बाँध लें।
  • बंद कमरे में बहुत दीप या धूप एक साथ न जलाएँ; हवा का आना-जाना रखें और दमा या साँस की तकलीफ़ वाले सदस्यों का ध्यान रखें।
  • सोने से पहले सभी दीप बुझा दें; एक बाल्टी पानी पास रखें।

एक साफ़ बात: पूजा और धन

लक्ष्मी पूजा परंपरा, कृतज्ञता और संकल्प का आयोजन है। कोई पूजा, मुहूर्त या अनुष्ठान किसी निश्चित आर्थिक परिणाम की गारंटी नहीं देता, और यह साइट ऐसा दावा नहीं करती। दीपावली के आसपास “गारंटीशुदा धन-सिद्धि” या “रातभर में कर्ज़मुक्ति” जैसे संदेश बहुत बढ़ जाते हैं — इनकी पहचान फर्जी तांत्रिक की पहचान में दी गई है। किसी ऑनलाइन दावे पर पैसे भेजने से पहले रुकिए।

व्यक्तिगत परामर्श चाहिए तो किसी योग्य पुरोहित या ज्योतिषी से मिलें; ऐसे लोगों की डायरेक्टरी वैदिक फाइंडर्स पर है। हम इस साइट पर कोई सेवा नहीं बेचते।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवाली 2026 में 8 या 9 नवंबर को है?

8 नवंबर, रविवार। अमावस्या 8 नवंबर सुबह ~11:27–11:30 से 9 नवंबर दोपहर ~12:31–12:33 तक है, और लक्ष्मी पूजा उस संध्या को होती है जिसमें अमावस्या हो — वह 8 नवंबर की शाम है।

फिर कैलेंडर में कार्तिक अमावस्या 9 नवंबर क्यों लिखी है?

तिथि का नाम वाला दिन सूर्योदय से तय होता है, और 9 नवंबर के सूर्योदय पर अमावस्या चल रही है; कुछ पंचांग उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। पूजा का दिन अलग नियम से तय होता है। दोनों बातें साथ सही हैं।

कोलकाता में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?

इस लेख में जानबूझकर नहीं दिया गया — कोई सत्यापित कोलकाता आँकड़ा नहीं मिला और अनुमान लगाना गलत होगा। कोलकाता में सूर्यास्त दिल्ली से काफ़ी पहले होता है, इसलिए दिल्ली का 5:54–7:50 वहाँ लागू नहीं होता। अपने स्थानीय सूर्यास्त या पंजिका से देखें।

प्रदोष काल और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त में क्या अंतर है?

प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का पूरा संध्या-खंड है (दिल्ली में ~5:31 से)। लक्ष्मी पूजा मुहूर्त उसके भीतर का वृषभ स्थिर लग्न है (दिल्ली में 5:54–7:50) — छोटी खिड़की, क्योंकि स्थिर राशि में पूजा की परंपरा है।

नरक चतुर्दशी और दिवाली एक ही दिन हैं?

2026 में हाँ, 8 नवंबर को। चतुर्दशी 8 नवंबर सुबह 11:30 तक है, इसलिए अभ्यंग स्नान उस भोर में; अमावस्या उसके बाद लगती है, इसलिए लक्ष्मी पूजा उसी शाम। काली चौदस की रात 7 नवंबर को है।

गोवर्धन पूजा और भाई दूज 2026 में कब हैं?

गोवर्धन पूजा 10 नवंबर (मंगलवार), भाई दूज 11 नवंबर (बुधवार)। कुछ जगह 9 और 10 नवंबर छपा मिलेगा, पर प्रतिपदा 9 नवंबर दोपहर ~12:32 के बाद ही लगती है, इसलिए 9 की सुबह प्रातःकाल की पूजा नहीं बनती। शहर-वार प्रातःकाल खिड़की और अन्नकूट की विधि गोवर्धन पूजा और अन्नकूट 2026 में अलग से दी है। इसी शृंखला में आगे छठ पूजा 13 से 16 नवंबर तक है, संध्या अर्घ्य 15 नवंबर को।

मुहूर्त में पूजा न कर पाऊँ तो?

परंपरा में सूर्यास्त के बाद की संध्या में पूजा स्वीकार्य है। मुहूर्त सहायक गणना है, अनिवार्य शर्त नहीं — घर की रीति का स्थान हमेशा रहता है।

मुंबई का समय क्या है?

यहाँ स्रोत स्पष्ट असहमत हैं — एक 6:01–8:25 देता है, दूसरा 6:27–8:27। इतने अंतर पर हम एक आँकड़ा चुनकर नहीं छापेंगे; मुंबई के पाठक स्थानीय पंचांग से पुष्टि कर लें।

स्रोत

  • panchangbodh.com — दीपावली 2026 और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त पृष्ठ (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश): अमावस्या 8 नवंबर 11:30 → 9 नवंबर 12:33; दिल्ली मुहूर्त 5:54–7:50; प्रदोष 5:31–7:55; मुंबई 6:01–8:25
  • panchangbodh.com — अमावस्या तिथि सूची (नई दिल्ली): 8 नवंबर 11:29 पूर्वाह्न → 9 नवंबर 12:32 अपराह्न
  • panchangbodh.com — नरक चतुर्दशी: चतुर्दशी 7 नवंबर 10:49 → 8 नवंबर 11:30; दिल्ली सूर्योदय 6:38
  • panchangbodh.com — गोवर्धन पूजा: 10 नवंबर, प्रतिपदा दोपहर 2:01 तक · भाई दूज: 11 नवंबर, द्वितीया दोपहर 3:55 तक, दिल्ली तिलक 1:09–3:19, मुंबई 1:29–3:45
  • hindi.astroyogi.com — दिवाली 2026 (क्रॉस-चेक): अमावस्या 8 नवंबर 11:27 पूर्वाह्न → 9 नवंबर 12:31 अपराह्न
  • एक अन्य हिंदी पंचांग साइट, नई दिल्ली तालिका (क्रॉस-चेक): अमावस्या 11:27 → 12:31; दिल्ली मुहूर्त 5:54–7:50; वृषभ ~5:55–7:49; मुंबई 6:27–8:27
  • कोलकाता के सूर्यास्त और मुहूर्त का कोई सत्यापित स्रोत इस बार उपलब्ध नहीं हुआ — वह आँकड़ा नहीं दिया गया

सूचना: यह लेख जानकारी और परंपरा की समझ के लिए है। तिथि और मुहूर्त पंचांग-गणना पर आधारित हैं और स्रोत, अयनांश तथा नगर बदलने पर कुछ मिनट बदल सकते हैं — अपने स्थानीय पंचांग, पंजिका या पुरोहित से पुष्टि कर लेना सबसे अच्छा है। यह साइट किसी आर्थिक या स्वास्थ्य परिणाम का दावा नहीं करती और कोई सेवा नहीं बेचती।

उपयोगी लगा? साझा करें:TelegramFacebookX