दुर्गा पूजा 2026: बंगाली पंजिका और पंचांग की तारीखें अलग क्यों हैं?

दुर्गा पूजा 2026: बंगाली पंजिका और पंचांग की तारीखें अलग क्यों हैं?

सीधा जवाब: दोनों तारीखें सही हैं — बस दो अलग-अलग परंपराओं से निकली हैं। सर्व-भारतीय पंचांग (जैसे drikpanchang) और पश्चिम बंगाल की पारंपरिक बंगाली पंजिका (जैसे divinehindu.in के प्रकाशक) एक ही खगोलीय घटनाओं को अलग-अलग नियम से तारीख में बदलते हैं, इसलिए महा नवमी और विजयादशमी की तारीख एक दिन आगे-पीछे हो जाती है। महालया और महा अष्टमी पर दोनों सहमत हैं, फ़र्क सिर्फ़ नवमी और दशमी में है — कोई भी पक्ष “ग़लत” नहीं है।

इस लेख में
  1. दोनों तिथि-सूची एक नज़र में
  2. पंजिका और पंचांग में तारीख अलग क्यों होती है
  3. संधि पूजा — किस दिन?
  4. आपके लिए इसका मतलब क्या है
  5. कोलकाता में यह किस पर निर्भर करता है
  6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
  7. संबंधित लेख
  8. अस्वीकरण
  9. स्रोत

अगर आप दुर्गा पूजा 2026 कोलकाता या शारदीय नवरात्रि 2026 पढ़ चुके हैं, तो शायद आपने वहाँ भी यह उलझन देखी होगी — इस लेख में उसी का पूरा जवाब है।

दोनों तिथि-सूची एक नज़र में

तिथि पंचांग (सर्व-भारतीय) बंगाली पंजिका
महालया शनिवार, 10 अक्टूबर शनिवार, 10 अक्टूबर
महा षष्ठी — शनिवार, 17 अक्टूबर
महा सप्तमी — रविवार, 18 अक्टूबर
महा अष्टमी सोमवार, 19 अक्टूबर सोमवार, 19 अक्टूबर
संधि पूजा सोमवार, 19 अक्टूबर, प्रातः 10:27–11:15 सोमवार, 19 अक्टूबर, प्रातः 10:27–11:15
महा नवमी सोमवार, 19 अक्टूबर (अष्टमी के साथ) मंगलवार, 20 अक्टूबर
विजयादशमी / बिजोया दशमी मंगलवार, 20 अक्टूबर बुधवार, 21 अक्टूबर

ध्यान दें — पहली और चौथी पंक्ति (महालया और अष्टमी) दोनों कॉलम में एक जैसी हैं। असली अंतर नवमी और दशमी में ही है, जहाँ बंगाली पंजिका पूरे एक दिन आगे खिसक जाती है।

पंजिका और पंचांग में तारीख अलग क्यों होती है

हर पर्व की तारीख “तिथि” से तय होती है, और तिथि सूर्योदय के हिसाब से बदलती है — पर हर शहर में सूर्योदय का समय अलग होता है। जब कोई तिथि आधी रात के आसपास शुरू या ख़त्म होती है, तो अलग-अलग शहरों में वह अलग-अलग कैलेंडर-दिन से जुड़ सकती है।

ज़्यादातर सर्व-भारतीय पंचांग सॉफ़्टवेयर उदया तिथि के सीधे नियम पर चलते हैं — जो तिथि सूर्योदय के समय चल रही हो, उसी दिन वह पर्व मनाया जाता है (इसे purva-viddha भी कहा जाता है)। इसके उलट, पश्चिम बंगाल की पारंपरिक बंगाली पंजिकाएँ कुछ पर्वों के लिए para-viddha नियम अपनाती हैं — इसमें एक तिथि को उस दिन “मान्य” तभी माना जाता है जब वह सूर्योदय के बाद कम-से-कम एक मुहूर्त (लगभग 48 मिनट) तक चलती रहे। अगर तिथि सूर्योदय के फ़ौरन बाद ही ख़त्म हो जाए, तो पंजिका उसे उस दिन “छोटी” मानकर अगले दिन की तिथि को महत्व देती है।

इसका असर सिर्फ़ कागज़ी नहीं, भौगोलिक भी है। उदाहरण के लिए 2026 में षष्ठी तिथि सुबह लगभग 5:54 बजे समाप्त होती है — कोलकाता में सूर्योदय के बाद, पर दिल्ली में सूर्योदय से पहले। यानी एक ही खगोलीय क्षण, दो शहरों के सूर्योदय-समय के फ़र्क से, पंचांग में अलग-अलग तारीख़ में दर्ज हो जाता है। यही कारण है कि दिल्ली-आधारित सर्व-भारतीय पंचांग और कोलकाता-केंद्रित बंगाली पंजिका के बीच कई पर्वों में एक दिन का अंतर आता रहा है — यह 2026 की नई बात नहीं, बल्कि तिथि-गणना की पुरानी विशेषता है।

व्यवहार में असर सीधा है: अष्टमी दोनों तरफ़ एक ही दिन (19 अक्टूबर) पड़ रही है, इसलिए संधि पूजा की तारीख और समय पर कोई विवाद नहीं है। पर नवमी और दशमी बंगाली पंजिका में एक दिन आगे खिसक जाती हैं — पूजा, हवन और विसर्जन की तारीख इसी वजह से अलग-अलग बताई जा रही है।

संधि पूजा — किस दिन?

संधि पूजा सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को, प्रातः लगभग 10:27 से 11:15 बजे के बीच होगी। यह इसलिए निश्चित है क्योंकि दोनों ही पद्धतियाँ — सर्व-भारतीय पंचांग और बंगाली पंजिका — अष्टमी तिथि को 19 अक्टूबर पर ही मानती हैं। संधि पूजा अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के प्रथम 24 मिनट के संधिकाल में होती है, इसलिए जहाँ अष्टमी की तारीख पर सहमति है, वहाँ संधि पूजा का दिन भी तय है। पंडाल के हिसाब से मिनटों का हेर-फेर हो सकता है, इसलिए स्थानीय सूचना-पट्टिका या पुरोहित से अंतिम समय पूछ लें।

पूरी संधि पूजा विधि और महत्व दुर्गा पूजा 2026 कोलकाता लेख में विस्तार से है।

आपके लिए इसका मतलब क्या है

  • अगर आप सर्व-भारतीय पंचांग या ऑनलाइन कैलेंडर देख रहे हैं — नवमी होम और मुख्य पूजा 19 अक्टूबर (अष्टमी के साथ) और दशहरा/विजयादशमी 20 अक्टूबर को मानकर योजना बनेगी।
  • अगर आप पश्चिम बंगाल की पारंपरिक बंगाली पंजिका मानते हैं — नवमी होम मंगलवार 20 अक्टूबर को और बिजोया दशमी बुधवार 21 अक्टूबर को होगी।
  • दोनों में से कोई तारीख “गलत” नहीं है — बस यह इस पर निर्भर करता है कि आपके परिवार, पूजा समिति या मंदिर की परंपरा किस पंजिका/पंचांग को मानक मानती है।
  • सबसे सुरक्षित तरीका: छुट्टी, यात्रा या सामूहिक आयोजन की योजना बनाने से पहले अपने क्षेत्र के पुरोहित या अपनी पंजिका से पुष्टि करें — ख़ासकर अगर आप कई परिवारों के साथ मिलकर पूजा या विसर्जन की योजना बना रहे हैं।

कोलकाता में यह किस पर निर्भर करता है

कोलकाता और पश्चिम बंगाल के अधिकांश सार्वजनिक पंडाल, बारोवारी (सर्वजनीन) पूजा समितियाँ और पुरानी बोनेदी बाड़ियाँ परंपरागत रूप से बंगाली पंजिका का ही अनुसरण करती हैं, क्योंकि यही स्थानीय पुरोहित-परंपरा और पंचांगकारों की मान्य पद्धति रही है। इसका मतलब है कि कोलकाता के अधिकतर पंडालों में नवमी होम मंगलवार 20 अक्टूबर और विसर्जन/बिजोया दशमी बुधवार 21 अक्टूबर को होने की संभावना ज़्यादा है — जैसा कि दुर्गा पूजा 2026 कोलकाता लेख में विस्तार से बताया गया है। फिर भी हर पंडाल या समिति अपनी घोषणा स्वयं करती है, इसलिए अंतिम तारीख के लिए अपनी पूजा समिति की सूचना-पट्टिका ही अंतिम स्रोत मानें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दुर्गा पूजा 2026 की सही तारीख कौन सी है — पंजिका या पंचांग?

दोनों सही हैं, बस अलग-अलग परंपरा से। महालया (10 अक्टूबर) और महा अष्टमी (19 अक्टूबर) दोनों पद्धतियों में एक जैसी हैं। फ़र्क सिर्फ़ नवमी और दशमी में है — सर्व-भारतीय पंचांग इन्हें 19 और 20 अक्टूबर मानता है, जबकि पश्चिम बंगाल की पारंपरिक बंगाली पंजिका इन्हें 20 और 21 अक्टूबर मानती है। अपनी परंपरा या स्थानीय पूजा समिति के अनुसार तारीख चुनें।

महा नवमी 2026 कब है — 19, 20 या 20 अक्टूबर?

सर्व-भारतीय पंचांग के अनुसार महा नवमी अष्टमी के साथ ही 19 अक्टूबर (सोमवार) को है। बंगाली पंजिका के अनुसार महा नवमी मंगलवार, 20 अक्टूबर को अलग से मनाई जाती है। कोलकाता के अधिकांश पंडाल बंगाली पंजिका का अनुसरण करते हुए 20 अक्टूबर को नवमी होम करते हैं।

संधि पूजा की तारीख को लेकर भी भ्रम है क्या?

नहीं। संधि पूजा 19 अक्टूबर, सोमवार, सुबह लगभग 10:27 से 11:15 बजे तक होगी — इस पर दोनों पद्धतियों में कोई मतभेद नहीं है, क्योंकि दोनों ही अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को मानती हैं। भ्रम केवल नवमी और उसके बाद की तारीखों में है।

विजयादशमी और बिजोया दशमी में क्या फ़र्क है, और तारीख अलग क्यों है?

विजयादशमी और बिजोया दशमी एक ही पर्व के अलग-अलग नाम हैं — बंगाल में इसे बिजोया दशमी कहा जाता है। तारीख का अंतर वही तिथि-गणना के नियम (उदया तिथि बनाम para-viddha) से आता है जो पूरे लेख में समझाया गया है। सर्व-भारतीय पंचांग इसे 20 अक्टूबर मंगलवार मानता है, बंगाली पंजिका 21 अक्टूबर बुधवार।

अगर मेरे परिवार और मेरे पड़ोसी के पंडाल की तारीख अलग-अलग है तो क्या करूँ?

यह सामान्य बात है, ख़ासकर बंगाल के बाहर रहने वाले बंगाली परिवारों के लिए जो स्थानीय गैर-बंगाली पंचांग और अपनी पारिवारिक बंगाली पंजिका दोनों देखते हैं। घबराने की ज़रूरत नहीं — जिस परंपरा से आपका परिवार या पूजा समिति जुड़ी है, उसी की तारीख मानें, और सामूहिक आयोजन में शामिल होने से पहले आयोजकों से तारीख की पुष्टि कर लें।

संबंधित लेख

अस्वीकरण

इस लेख की तिथियाँ और समय सार्वजनिक वेब स्रोतों (drikpanchang.com और divinehindu.in) पर आधारित हैं। तिथि-गणना का सामान्य सिद्धांत (उदया तिथि बनाम para-viddha) यहाँ सरल भाषा में समझाया गया है, पर यह शास्त्रीय ज्योतिष-सिद्धांत का प्रामाणिक तकनीकी विवरण नहीं है। पूजा, यात्रा या सामूहिक आयोजन की योजना बनाने से पहले अपने क्षेत्र के पुरोहित, पारिवारिक पंजिका या पूजा समिति से पुष्टि अवश्य करें। यह लेख चिकित्सकीय, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।

स्रोत

  • https://www.divinehindu.in/blogs/news/durga-puja-2026-dates-sandhi-puja-rituals
  • https://www.drikpanchang.com/calendars/hindu/hinducalendar.html?year=2026&month=10
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