धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी 6 नवंबर सुबह 10:31 बजे शुरू होकर 7 नवंबर सुबह 10:49 बजे समाप्त होती है, और चूँकि धनतेरस की पूजा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद की होती है, इसलिए यह पर्व 6 नवंबर की शाम को ही मनाया जाएगा। कोलकाता में पूजा का मुहूर्त शाम 5:29 से 7:27 तक है, दिल्ली में शाम 6:03 से 7:59 तक।
इस लेख में
धनतेरस 2026 एक नज़र में
| पर्व | धनतेरस / धन्वंतरि त्रयोदशी |
| दिन | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 |
| त्रयोदशी आरंभ | 6 नवंबर 2026, सुबह 10:31 |
| त्रयोदशी समाप्त | 7 नवंबर 2026, सुबह 10:49 |
| कोलकाता — सूर्यास्त | शाम 4:56 |
| कोलकाता — प्रदोष काल | शाम 4:56 से 7:30 |
| कोलकाता — पूजा मुहूर्त | शाम 5:29 से 7:27 (स्थिर वृषभ लग्न) |
| दिल्ली — सूर्यास्त | शाम 5:32 |
| दिल्ली — प्रदोष काल | शाम 5:32 से 7:56 |
| दिल्ली — पूजा मुहूर्त | शाम 6:03 से 7:59 |
| मुंबई — प्रदोष काल | शाम 6:02 से 8:26 |
| यम दीपम | 6 नवंबर की शाम, प्रदोष काल में |
तिथि-स्रोत: त्रयोदशी के आरंभ और अंत के समय panchangbodh (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश) से लिए गए हैं। कोलकाता के सूर्यास्त, प्रदोष काल और वृषभ लग्न के समय nakshtratak के कोलकाता पृष्ठ से हैं। कोलकाता का सूर्यास्त 4:56 हमने astral खगोलीय गणना से अलग से भी जाँचा और वही मिला। मुंबई का प्रदोष काल panchangbodh से है।
6 नवंबर क्यों, 7 नवंबर क्यों नहीं — असली गणित
यह इस साल का सबसे ज़रूरी सवाल है, क्योंकि त्रयोदशी तिथि दो दिन छूती है। ध्यान दें — 6 नवंबर को सूर्योदय लगभग 6:36 (दिल्ली) पर होता है, और त्रयोदशी उसके बाद 10:31 पर शुरू होती है। यानी 6 नवंबर को सूर्योदय के समय त्रयोदशी नहीं, द्वादशी चल रही होती है। 7 नवंबर को सूर्योदय के समय त्रयोदशी ही रहती है, क्योंकि वह 10:49 पर समाप्त होती है।
अगर पर्व का निर्णय उदया-तिथि नियम से होता — यानी “जिस दिन सूर्योदय के समय जो तिथि हो, वही दिन मान्य” — तो धनतेरस 7 नवंबर को पड़ता। कुछ कैलेंडर इसी चूक से 7 नवंबर छाप देते हैं।
लेकिन धनतेरस की पूजा का समय सुबह नहीं, शाम है। धन्वंतरि पूजन, लक्ष्मी-कुबेर पूजन और यम दीपदान — तीनों प्रदोष काल के कर्म हैं। इसलिए नियम यह बनता है: जिस दिन की शाम को त्रयोदशी मौजूद हो, उस दिन धनतेरस।
- 6 नवंबर की शाम: सूर्यास्त के बाद त्रयोदशी चल रही है (वह 10:31 से शुरू हो चुकी है और अगले दिन सुबह तक चलेगी) — पूजा संभव है।
- 7 नवंबर की शाम: त्रयोदशी उसी दिन सुबह 10:49 पर खत्म हो गई; शाम को चतुर्दशी चल रही है — धनतेरस की पूजा नहीं बनती।
इसलिए 6 नवंबर ही निर्विवाद है। यह ठीक उसी तरह का नियम है जिससे इस साल विजयादशमी की तिथि अपराह्न काल से तय हुई थी, सूर्योदय से नहीं। और यही कारण है कि इस साल अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ गई थीं — तिथि की लंबाई और पूजा के निर्धारित प्रहर, दोनों मिलकर दिन तय करते हैं।
कोलकाता का मुहूर्त दिल्ली से आधा घंटा पहले क्यों
तालिका देखकर यह अजीब लग सकता है कि कोलकाता में सूर्यास्त 4:56 और दिल्ली में 5:32 — पूरे 36 मिनट का अंतर, जबकि घड़ी दोनों जगह एक ही है।
कारण भूगोल है। भारतीय मानक समय 82.5° पूर्वी देशांतर पर तय है और पूरे देश में एक ही चलता है। कोलकाता 88.36° पूर्व पर है, दिल्ली 77.21° पूर्व पर — लगभग 11 डिग्री का फ़र्क। पृथ्वी हर डिग्री घूमने में लगभग 4 मिनट लेती है, इसलिए कोलकाता में सूरज दिल्ली से लगभग 45 मिनट पहले डूबता है, पर घड़ी वही बताती है।
इसका सीधा नतीजा: प्रदोष काल, और इसलिए धनतेरस का मुहूर्त, हर शहर में अलग है। कोलकाता के लोग अगर दिल्ली का छपा हुआ समय देखकर 6:03 बजे पूजा शुरू करेंगे, तो वे अपने शहर के प्रदोष काल का एक तिहाई हिस्सा गँवा चुके होंगे। यही बात करवा चौथ के शहर-वार चंद्रोदय समय में भी दिखती है, जहाँ कोलकाता और मुंबई के बीच सवा घंटे से ज़्यादा का अंतर है।
इसलिए एक नियम याद रखें: तिथि का आरंभ-अंत पूरे भारत में एक ही होता है, मुहूर्त और सूर्यास्त नहीं। त्रयोदशी 6 नवंबर 10:31 पर पूरे देश में एक साथ शुरू होती है। प्रदोष काल आपके शहर का होता है।
प्रदोष काल और पूजा मुहूर्त में अंतर
तालिका में कोलकाता के दो अलग समय दिए हैं — प्रदोष काल 4:56 से 7:30, और पूजा मुहूर्त 5:29 से 7:27। दोनों एक चीज़ नहीं हैं।
प्रदोष काल
सूर्यास्त से लगभग दो घंटे चौबीस मिनट (लगभग छह घटी) का समय। यह पूरी खिड़की है जिसमें शाम का कर्म किया जा सकता है। यम दीपदान इसी पूरी अवधि में मान्य है।
स्थिर लग्न वाला मुहूर्त
लक्ष्मी पूजन के लिए परंपरा में वृषभ लग्न को श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि वृषभ “स्थिर” राशि है — मान्यता है कि स्थिर लग्न में पूजी गई लक्ष्मी स्थिर रहती हैं। कोलकाता में 6 नवंबर को वृषभ लग्न 5:29 से 7:27 तक है। प्रदोष काल और वृषभ लग्न जहाँ एक-दूसरे को काटते हैं, वही सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है — कोलकाता में पूरा 5:29–7:27, क्योंकि वह प्रदोष काल के भीतर ही आ जाता है।
दिल्ली में वृषभ लग्न लगभग 6:30 के आसपास से शुरू होता है, इसलिए वहाँ का मुहूर्त 6:03 से बताया जाता है और प्रदोष काल की शुरुआत 5:32 से अलग दिखता है। यही वजह है कि अलग-अलग वेबसाइटें अलग-अलग समय छापती हैं — कोई सिर्फ़ प्रदोष काल दे देता है, कोई स्थिर लग्न वाला छोटा मुहूर्त।
स्रोतों में मतभेद — खुलकर
- त्रयोदशी का अंत: panchangbodh और myastrology दोनों 7 नवंबर 10:49 देते हैं; prokerala और nakshtratak 10:48। एक मिनट का अंतर अयनांश की गणना से आता है और किसी पूजा पर असर नहीं डालता।
- दिल्ली का प्रदोष काल: panchangbodh 5:32–7:56, nakshtratak 5:33–7:57। यही एक मिनट का सूर्यास्त-अंतर है।
- मुहूर्त की चौड़ाई: कुछ साइटें दिल्ली के लिए 6:02–7:57 देती हैं, कुछ 6:17–8:15। जहाँ अंतर आधे घंटे से ज़्यादा हो, वहाँ प्रायः पृष्ठ किसी और शहर के लिए बना होता है — समय देखने से पहले शहर देख लें।
- ध्यान रखें: कई अंतरराष्ट्रीय पंचांग साइटें डिफ़ॉल्ट रूप से विदेशी शहर का समय दिखा देती हैं। हमने इस पृष्ठ पर जो भी शहर-वार समय दिया है, उस पृष्ठ का शहर जाँचकर दिया है।
पूजा विधि — जो वास्तव में परंपरा में है
धनतेरस पर तीन अलग कर्म होते हैं, और लोग प्रायः उन्हें मिला देते हैं।
1. धन्वंतरि पूजन
त्रयोदशी भगवान धन्वंतरि से जुड़ी है, जिन्हें आयुर्वेद की परंपरा में चिकित्सा का देवता माना जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सक और वैद्य परिवार इस दिन विशेष पूजन करते हैं। यह दिन मूलतः आरोग्य का है — धन का अर्थ यहाँ केवल पैसा नहीं, स्वास्थ्य-रूपी धन भी है।
2. लक्ष्मी-कुबेर पूजन
प्रदोष काल में चौकी पर लक्ष्मी और कुबेर की स्थापना, दीप, जल, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य। व्यापारी वर्ग में बही-खाते और तिजोरी का पूजन इसी शाम होता है। पारंपरिक रूप से व्यापार में उन्नति से जुड़े उपाय इसी दिन से दीपावली तक किए जाते हैं।
3. यम दीपम
घर के मुख्य द्वार पर या दक्षिण दिशा में आटे या मिट्टी का चौमुखा दीप, सरसों के तेल से, यम के नाम पर जलाया जाता है — अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना के रूप में। कोलकाता में इसके लिए प्रदोष काल 4:56 से 7:30 तक है।
यहाँ एक वास्तविक मतभेद है: कई परिवार यम दीपम त्रयोदशी की शाम (6 नवंबर) जलाते हैं, कई नरक चतुर्दशी की शाम (7 नवंबर)। दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं। अपने घर या कुल की परंपरा का पालन करें — इसका कोई एक “सही” उत्तर नहीं है।
दीपक जलाते समय सुरक्षा
- दीप हवादार जगह पर रखें, बंद कमरे में एक साथ बहुत दीप न जलाएँ — धुएँ से दम घुट सकता है।
- दीप को पर्दे, रंगोली के सूखे रंग, कागज़ या प्लास्टिक से दूर रखें।
- छोटे बच्चों और पालतू जानवरों की पहुँच से दूर रखें; जलते दीप को अकेला न छोड़ें।
- सिंथेटिक या ढीले कपड़े पहनकर दीप न जलाएँ; अस्थमा हो तो धुएँ से दूरी रखें।
खरीदारी की परंपरा — और एक साफ़ बात
धनतेरस पर धातु, विशेषकर सोना, चाँदी और पीतल खरीदने की परंपरा है; झाड़ू और नए बर्तन भी। यह एक सांस्कृतिक परंपरा है, निवेश की सलाह नहीं। इस पृष्ठ पर हम यह नहीं कह रहे कि किसी दिन कुछ खरीदने से धन बढ़ता है या कोई आर्थिक लाभ निश्चित होता है।
त्योहारी मौसम में दो बातों का ध्यान रखें। पहली, “मुहूर्त खत्म होने से पहले” जैसे दबाव वाले विज्ञापन बिक्री की तकनीक हैं — मुहूर्त दो-ढाई घंटे चौड़ा होता है, दो मिनट का नहीं। दूसरी, इस मौसम में ऑनलाइन ठगी बढ़ जाती है; अनजान लिंक, अग्रिम भुगतान और “गारंटीड फल” के दावों से बचें। फर्जी तांत्रिक और ठगी पहचानने के संकेत हमने अलग से लिखे हैं।
धनतेरस के बाद — दीपावली शृंखला 2026
त्रयोदशी 7 नवंबर सुबह 10:49 पर समाप्त होती है, इसलिए उसके बाद चतुर्दशी और फिर अमावस्या आती है। शृंखला इस प्रकार बनती है:
- 5 नवंबर: रमा एकादशी (एकादशी 4 नवंबर 11:04 → 5 नवंबर 10:36); पारण 6 नवंबर की सुबह, द्वादशी समाप्त होने से पहले
- 6 नवंबर: धनतेरस (त्रयोदशी 6 नवंबर 10:31 → 7 नवंबर 10:49)
- 7 नवंबर की रात: भूत चतुर्दशी / काली चौदस। चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 10:49 से 8 नवंबर 11:30 तक है, इसलिए रात का कर्म 7 नवंबर को बनता है।
- 8 नवंबर की भोर: नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान। यह सूर्योदय से पहले का कर्म है और उस समय चतुर्दशी ही चल रही होती है (वह 11:30 पर समाप्त होती है) — इसीलिए स्नान 8 नवंबर की भोर को होता है, जबकि काली चौदस की रात 7 नवंबर की।
- 8 नवंबर की शाम और रात: कार्तिक अमावस्या — दीपावली और लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त, और बंगाल में काली पूजा, जो निशीथ काल में होती है
यानी इस साल चतुर्दशी के दो कर्म दो अलग तारीख़ों पर बँट जाते हैं — रात का 7 नवंबर, भोर का 8 नवंबर। इसी वजह से कुछ कैलेंडर नरक चतुर्दशी 7 नवंबर लिखते हैं और कुछ 8 नवंबर। चारों दिनों की पूरी तिथि-तालिका हमने काली पूजा 2026 के पृष्ठ पर दी है, और चतुर्दशी के तीनों कर्मों की तारीख़ अलग क्यों निकलती है यह अलग से समझाया है।
गोवत्स द्वादशी (वसु बारस) इससे पहले पड़ती है। द्वादशी तिथि 6 नवंबर 10:31 पर समाप्त होती है और यह भी सायंकाल का कर्म है, इसलिए तिथि-गणना से यह 5 नवंबर की शाम बनती है — पर इस तारीख़ का स्वतंत्र सत्यापन हमने अभी नहीं किया है, इसलिए इसे अंतिम न मानें।
बंगाल में धनतेरस की पकड़ पारंपरिक रूप से मारवाड़ी और व्यापारी समुदायों में अधिक रही है; बंगाली घरों का मुख्य पर्व कार्तिक अमावस्या की काली पूजा है। कालीघाट मंदिर में उस रात की भीड़ धनतेरस से कई गुना होती है। अमावस्या से जुड़ी पारंपरिक मान्यताएँ और कोजागरी लक्ष्मी पूजा की तुलना से यह अंतर और साफ़ होता है — बंगाल में लक्ष्मी का मुख्य पूजन कोजागरी पूर्णिमा पर होता है, दीपावली पर नहीं।
तारीख़ों के इस फ़र्क की वजह भी समझने लायक है, और उसे हमने बंगाली पंजिका और उत्तर भारतीय पंचांग के अंतर में विस्तार से लिखा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धनतेरस 2026 कब है?
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी 6 नवंबर सुबह 10:31 से 7 नवंबर सुबह 10:49 तक है, और धनतेरस की पूजा प्रदोष काल की होने से 6 नवंबर की शाम मान्य है।
कुछ कैलेंडर 7 नवंबर क्यों दिखा रहे हैं?
क्योंकि 6 नवंबर को सूर्योदय के समय त्रयोदशी नहीं, द्वादशी चल रही होती है — त्रयोदशी 10:31 पर शुरू होती है। उदया-तिथि नियम लगाने पर 7 नवंबर निकल आता है। पर धनतेरस का कर्म शाम का है, और 7 नवंबर की शाम तक त्रयोदशी बीत चुकी होती है। इसलिए 6 नवंबर सही है।
कोलकाता में धनतेरस पूजा का मुहूर्त क्या है?
शाम 5:29 से 7:27 तक (स्थिर वृषभ लग्न, प्रदोष काल के भीतर)। कोलकाता का प्रदोष काल 4:56 से 7:30 तक है, क्योंकि वहाँ सूर्यास्त 4:56 पर होता है।
क्या दिल्ली का मुहूर्त कोलकाता में चलेगा?
नहीं। मुहूर्त सूर्यास्त पर आधारित है और कोलकाता में सूर्यास्त दिल्ली से लगभग 36 मिनट पहले होता है। अपने शहर का समय देखें। तिथि के आरंभ-अंत के समय ही पूरे भारत में एक जैसे होते हैं।
प्रदोष काल और शुभ मुहूर्त में क्या फ़र्क है?
प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद लगभग दो घंटे चौबीस मिनट की पूरी खिड़की है। शुभ मुहूर्त उसमें से वह हिस्सा है जो स्थिर वृषभ लग्न में पड़ता है। यम दीपदान पूरे प्रदोष काल में किया जा सकता है।
यम दीपम 6 या 7 नवंबर को जलाएँ?
दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं — कुछ परिवार त्रयोदशी की शाम (6 नवंबर), कुछ नरक चतुर्दशी की शाम (7 नवंबर)। अपने कुल की परंपरा मानें।
क्या धनतेरस पर सोना खरीदना ज़रूरी है?
नहीं। यह एक परंपरा है, अनिवार्यता नहीं, और न ही कोई आर्थिक लाभ की गारंटी। बहुत से परिवार केवल दीप जलाकर और पूजन करके पर्व मनाते हैं।
बंगाल में धनतेरस मनाया जाता है?
सीमित रूप से — मुख्यतः व्यापारी और मारवाड़ी समुदायों में। बंगाली परंपरा का बड़ा पर्व कार्तिक अमावस्या की काली पूजा है, और लक्ष्मी का मुख्य पूजन कोजागरी पूर्णिमा पर होता है।
स्रोत
- panchangbodh — धनतेरस पृष्ठ (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश): त्रयोदशी 6 नवंबर 10:31 → 7 नवंबर 10:49; दिल्ली प्रदोष 5:32–7:56; मुंबई प्रदोष 6:02–8:26
- nakshtratak — धनतेरस कोलकाता पृष्ठ (कोलकाता, IST): सूर्यास्त 4:56, प्रदोष काल 4:56–7:30, वृषभ लग्न 5:29–7:27
- nakshtratak — धनतेरस मुख्य पृष्ठ (दिल्ली, IST): प्रदोष 5:33–7:57, पूजा मुहूर्त 6:03–7:59, त्रयोदशी अंत 10:48
- prokerala — धनतेरस पृष्ठ (उज्जैन, IST): त्रयोदशी 6 नवंबर 10:31 → 7 नवंबर 10:48
- myastrology — धनतेरस पृष्ठ (नई दिल्ली, दृक सिद्धांत): त्रयोदशी 6 नवंबर 10:31 → 7 नवंबर 10:49
- चतुर्दशी और अमावस्या के तिथि-समय: panchangbodh से, हमारे काली पूजा 2026 पृष्ठ पर सत्यापित तालिका
- सूर्यास्त की स्वतंत्र जाँच: astral खगोलीय गणना (कोलकाता 22.57°N 88.36°E, दिल्ली 28.61°N 77.21°E)
किसी विशेष कुंडली या पारिवारिक परंपरा के अनुसार मुहूर्त जानने के लिए अपने कुल-पुरोहित से पूछें, या वैदिक फाइंडर्स पर विद्वानों की सूची देखें। यह साइट कोई सेवा नहीं बेचती।
सूचना: यह पृष्ठ सूचना और परंपरा की जानकारी के लिए है। तिथि और मुहूर्त के समय ऊपर नामित पंचांग स्रोतों से लिए गए हैं और स्थानीय पंचांग या पंजिका से एक-दो मिनट भिन्न हो सकते हैं — पूजा के दिन अपने स्थानीय पंचांग से मिला लें। यहाँ दी गई कोई बात चिकित्सकीय, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है, और किसी आर्थिक लाभ की गारंटी नहीं दी जाती। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श करें।