भाई दूज 2026 बुधवार, 11 नवंबर को है — गोवर्धन पूजा के अगले दिन। तिलक अपराह्न में किया जाता है, और कार्तिक शुक्ल द्वितीया 10 नवंबर दोपहर 2:00 बजे शुरू होकर 11 नवंबर दोपहर 3:53 तक रहती है, इसलिए 11 नवंबर का पूरा अपराह्न तिथि के भीतर पड़ता है। कोलकाता में तिलक की खिड़की दोपहर 12:27 से 2:40 तक, नई दिल्ली में 1:09 से 3:19 तक बनती है। कुछ बंगाली कैलेंडर साइटें 10 नवंबर छाप रही हैं — नीचे विस्तार से बताया है कि वह गणना क्यों नहीं टिकती।
इस लेख में
भाई दूज 2026 एक नज़र में
| भाई दूज / भाई फोंटा / यम द्वितीया | बुधवार, 11 नवंबर 2026 |
| तिथि | कार्तिक शुक्ल द्वितीया |
| द्वितीया आरंभ | 10 नवंबर, दोपहर 2:00 |
| द्वितीया समाप्त | 11 नवंबर, दोपहर 3:53 (कुछ पंचांग 3:54–3:55) |
| तिलक काल | अपराह्न — शहर के अनुसार बदलता है (तालिका नीचे) |
| कोलकाता अपराह्न | दोपहर 12:27 – 2:40 |
| नई दिल्ली अपराह्न | दोपहर 1:09 – 3:19 |
| उसी दिन | चित्रगुप्त पूजा |
| पश्चिम बंगाल | भ्रातृ द्वितीया — क्षेत्रीय अवकाश, 11 नवंबर |
| पिछला पर्व | गोवर्धन पूजा और अन्नकूट — 10 नवंबर |
तिथि-स्रोत: panchangbodh.com (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश) और myastrology.in (नई दिल्ली, दृक सिद्धांत) — दोनों पर द्वितीया 10 नवंबर दोपहर 2:00/2:01 से 11 नवंबर दोपहर 3:54/3:55 तक है। नीचे की शहर-वार खिड़कियाँ JPL DE421 ग्रह-गणित (skyfield) से स्वतंत्र रूप से निकाली गई हैं; नई दिल्ली का मान panchangbodh से मिनट-दर-मिनट मिलता है।
10 या 11 नवंबर — तिथि का पूरा गणित
यह 2026 का असली सवाल है, क्योंकि इस साल पूरी कार्तिक शृंखला एक दिन खिंच गई है। जवाब के लिए दो नियम चाहिए: द्वितीया कब चल रही है, और भाई दूज किस समय-खंड का कर्म है। तिथि चंद्रमा और सूर्य के कोणीय अंतर से बनती है — हर 12 अंश पर एक तिथि। चंद्रमा की गति घटती-बढ़ती रहती है, इसलिए कोई तिथि 20 घंटे की होती है और कोई 27 की। इस बार कार्तिक अमावस्या लंबी खिंची और असर पूरी शृंखला पर पड़ा:
- कार्तिक अमावस्या — 8 नवंबर सुबह 11:28 से 9 नवंबर दोपहर 12:32 तक
- शुक्ल प्रतिपदा — 9 नवंबर दोपहर 12:32 से 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक
- शुक्ल द्वितीया — 10 नवंबर दोपहर 2:00 से 11 नवंबर दोपहर 3:53 तक
दूसरा नियम: भाई दूज का तिलक अपराह्न का कर्म है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को पाँच बराबर भागों में बाँटिए — प्रातःकाल, संगव, मध्याह्न, अपराह्न, सायंकाल। चौथा भाग अपराह्न है, और सूर्योदय-सूर्यास्त पर टिका होने से हर शहर का मान अलग निकलता है।
10 नवंबर क्यों नहीं बनता
10 नवंबर को द्वितीया दोपहर 2:00 बजे ही लगती है, जबकि उस दिन का अपराह्न इस तरह पड़ता है:
- कोलकाता — 12:27 से 2:40, यानी 133 मिनट में से केवल आख़िरी 40 मिनट द्वितीया में
- पटना — 12:39 से 2:51, केवल 51 मिनट द्वितीया में
- नई दिल्ली — 1:09 से 3:20, लगभग 80 मिनट द्वितीया में
यानी पूर्वी भारत में 10 नवंबर का अपराह्न लगभग पूरा प्रतिपदा में बीत जाता है। इसके ऊपर उदय-व्यापिनी नियम निर्णायक हो जाता है — सूर्योदय के समय कौन तिथि चल रही है। 10 नवंबर को सूर्योदय (कोलकाता 5:46, दिल्ली 6:40) पर प्रतिपदा चल रही है, द्वितीया लगी ही नहीं। इसलिए 10 नवंबर पर गणना नहीं बनती।
11 नवंबर क्यों बनता है
11 नवंबर को सूर्योदय से दोपहर 3:53 तक द्वितीया चल रही है, और हर बड़े शहर का अपराह्न इस सीमा के भीतर पड़ता है — कोलकाता का 2:40, दिल्ली का 3:19, मुंबई का 3:45 पर ख़त्म। दोनों नियम एक ही दिन की ओर इशारा करते हैं, इसलिए भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर।
जिन बंगाली कैलेंडर साइटों पर 10 नवंबर छपा है, उनमें से कुछ सूर्य सिद्धांत आधारित पंजिका का हवाला देती हैं, पर वे तिथि का घड़ी-समय नहीं छापतीं और उनके पृष्ठ पर तिथि का नाम भी असंगत मिलता है। जहाँ घड़ी-समय छपा है — panchangbodh और myastrology, दोनों पर — वहाँ 11 नवंबर निकलता है, और पश्चिम बंगाल का क्षेत्रीय अवकाश भी 11 नवंबर दर्ज है। बंगाल में तिथि-गणना की दो पद्धतियाँ साथ चलती हैं; ब्यौरा बंगाली पंजिका और पंचांग के अंतर वाले पृष्ठ पर है। घर में परंपरा चली आ रही हो तो अपने कुल-पुरोहित या पारिवारिक पंजिका से मिला लेना सबसे सुरक्षित है; किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श चाहिए तो vedicfinders पर देख सकते हैं।
शहर-वार अपराह्न तिलक समय — 11 नवंबर 2026
ये मान उस शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से निकले हैं। हर खिड़की द्वितीया की समाप्ति (3:53) से पहले ख़त्म होती है, इसलिए पूरी खिड़की तिथि के भीतर है।
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त | अपराह्न तिलक खिड़की |
| कोलकाता | 5:46 | 4:54 PM | 12:27 – 2:40 PM |
| नई दिल्ली | 6:40 | 5:29 PM | 1:09 – 3:19 PM |
| मुंबई | 6:43 | 6:01 PM | 1:30 – 3:45 PM |
| पटना | 6:03 | 5:02 PM | 12:39 – 2:50 PM |
| लखनऊ | 6:22 | 5:17 PM | 12:55 – 3:06 PM |
| जयपुर | 6:43 | 5:37 PM | 1:16 – 3:27 PM |
| अहमदाबाद | 6:50 | 5:56 PM | 1:30 – 3:43 PM |
| बेंगलुरु | 6:16 | 5:50 PM | 1:12 – 3:31 PM |
| हैदराबाद | 6:18 | 5:41 PM | 1:08 – 3:24 PM |
| चेन्नई | 6:05 | 5:39 PM | 1:02 – 3:20 PM |
| भुवनेश्वर | 5:53 | 5:07 PM | 12:38 – 2:52 PM |
| रांची | 5:59 | 5:05 PM | 12:39 – 2:52 PM |
| गुवाहाटी | 5:38 | 4:35 PM | 12:12 – 2:24 PM |
| सिलीगुड़ी | 5:52 | 4:47 PM | 12:25 – 2:36 PM |
| दुर्गापुर | 5:52 | 4:57 PM | 12:31 – 2:44 PM |
| आसनसोल | 5:53 | 4:58 PM | 12:32 – 2:45 PM |
नवंबर में पूर्वी भारत में सूर्यास्त बहुत जल्दी हो जाता है — कोलकाता में पौने पाँच बजे। इसीलिए कोलकाता का तिलक समय दिल्ली से पूरे 40 मिनट पहले ख़त्म हो जाता है; दो शहरों में बँटे परिवार अक्सर यही चूकते हैं।
बंगाल में भाई फोंटा
बंगाल में यह पर्व भाई फोंटा कहलाता है और पंचांग में भ्रातृ द्वितीया दर्ज होता है। तिलक की जगह यहाँ फोंटा है — बहन अनामिका उँगली से भाई के माथे पर चंदन, दही और काजल का टीका लगाती है। तीनों का क्रम घर-घर अलग होता है।
रिवाज में बहन उपवास रखकर फोंटा देती है और उसके बाद ही अन्न ग्रहण करती है। साथ में मिष्टी का थाल लगता है — संदेश, रोशोगोल्ला, नारकेल नाड़ू। कई परिवारों में क्रम तय होता है: पहले बड़े भाई को, फिर छोटे को।
ध्यान देने की बात यह है कि बंगाल की शाक्त परंपरा में इस हफ़्ते का केंद्र काली पूजा है, जो 8 नवंबर की रात निशीथ काल में होती है। भाई फोंटा उसके तीन दिन बाद का घरेलू पर्व है — मंदिर का नहीं, घर का। कालीघाट मंदिर के दर्शन की योजना हो तो यह अपेक्षाकृत शांत दिन रहता है।
तिलक की विधि — सीधा क्रम
- अपराह्न की खिड़की में भाई को पूर्व या उत्तर मुँह बैठाएँ। ज़मीन पर आसन या चौकी ठीक है।
- थाली में रोली या चंदन, अक्षत, दही या काजल, मिठाई, नारियल और एक दीपक रखें।
- बहन माथे पर तिलक और अक्षत लगाकर आरती उतारती है, फिर नारियल या सूखा गोला देती है — यह सबसे पुराना प्रचलित रिवाज है।
- मिठाई खिलाएँ, भाई उपहार या दक्षिणा देता है, और दोनों बड़ों के पैर छूते हैं।
दीपक जलाते समय बच्चों, दुपट्टे और पर्दों से दूरी रखें और कमरे में हवा आने-जाने की जगह रखें — नवंबर की सूखी हवा में यह असली ख़तरा है। दीपक जलाने का महत्व अलग पृष्ठ पर दिया है।
जो बहनें फोंटा से पहले उपवास रखती हैं, उनके लिए एक ज़रूरी बात — अपराह्न तक का उपवास लंबा हो जाता है। गर्भावस्था, मधुमेह, रक्तचाप या नियमित दवा चल रही हो तो निर्जल उपवास न रखें; फल, दूध या पानी लेते रहना परंपरा में स्वीकार्य है। चक्कर या कमज़ोरी लगे तो उपवास तोड़ देना ठीक है — स्वास्थ्य के कारण व्रत तोड़ना दोष नहीं माना जाता। स्थायी बीमारी हो तो पहले अपने डॉक्टर से बात कर लें।
यम द्वितीया — नाम और कथा
भाई दूज का दूसरा नाम यम द्वितीया है, और यही नाम इसके अर्थ को खोलता है। प्रचलित कथा यह है कि यमराज की बहन यमुना वर्षों से उन्हें घर बुला रही थीं। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज पहुँचे; यमुना ने तिलक कर भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वर दिया कि इस दिन जो भाई बहन के घर तिलक कराए, उसे अकाल भय नहीं रहेगा।
कथा का ढाँचा रक्षाबंधन से उलटा है — वहाँ बहन भाई को बाँधती है और भाई रक्षा का वचन देता है; यहाँ भाई बहन के घर जाता है और आयु का वरदान पाता है। इसीलिए परंपरा में भाई का बहन के घर जाकर भोजन करना इस पर्व का मूल माना गया है।
चित्रगुप्त पूजा उसी दिन
11 नवंबर को उसी अपराह्न में चित्रगुप्त पूजा भी पड़ती है। मान्यता है कि चित्रगुप्त कर्मों का लेखा रखते हैं, और इसी कारण कायस्थ समुदाय में यह दिन कलम-दवात की पूजा का है — नई कलम, नया रजिस्टर और हिसाब की किताब पूजी जाती है।
दिवाली पर बही-खाता पूजन और चित्रगुप्त पूजा पर लेखा-जोखा का संकल्प — भाव एक ही है, हिसाब साफ़ रखने का। व्यापार वृद्धि के शास्त्रीय उपाय और दीपावली के लक्ष्मी पूजा मुहूर्त अलग पृष्ठों पर हैं।
कार्तिक 2026 की पूरी शृंखला
- धनतेरस — 6 नवंबर
- नरक चतुर्दशी और काली चौदस — 8 नवंबर की भोर
- दीपावली और लक्ष्मी पूजा — 8 नवंबर की संध्या; काली पूजा उसी रात
- गोवर्धन पूजा और अन्नकूट — 10 नवंबर
- भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा — 11 नवंबर
- छठ पूजा — 13 से 16 नवंबर; संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, उषा अर्घ्य 16 नवंबर
इस साल 9 नवंबर पर कोई बड़ा आयोजन नहीं पड़ता, क्योंकि अमावस्या उस दिन दोपहर तक खिंच गई — पाँच दिन का त्योहार 2026 में छह दिन में फैल जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाई दूज 2026 में 10 या 11 नवंबर को है?
11 नवंबर 2026, बुधवार। कार्तिक शुक्ल द्वितीया 10 नवंबर दोपहर 2:00 पर शुरू होती है — यानी 10 को सूर्योदय पर यह तिथि लगी ही नहीं होती और उस दिन का अपराह्न लगभग पूरा प्रतिपदा में बीतता है। 11 नवंबर को सूर्योदय से 3:53 तक द्वितीया रहती है, इसलिए उसी दिन तिलक होता है।
कोलकाता में तिलक का समय क्या है?
दोपहर 12:27 से 2:40 तक — कोलकाता के सूर्योदय 5:46 और सूर्यास्त 4:54 PM से निकाला गया अपराह्न। दिल्ली से यह लगभग 40 मिनट पहले ख़त्म होता है, क्योंकि पूर्व में सूर्यास्त जल्दी होता है।
अपराह्न के बाद तिलक कर सकते हैं?
परंपरा में अपराह्न श्रेष्ठ है, पर 11 नवंबर को द्वितीया दोपहर 3:53 पर छूट जाती है — इसलिए तिलक 3:53 से पहले पूरा कर लें, उसके बाद तृतीया लग जाती है। अनेक परिवार सुविधा से सुबह भी कर लेते हैं; तिथि के भीतर रहना अपराह्न से चूकने से ज़्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।
बंगाल में भाई फोंटा भी 11 नवंबर को है?
उपलब्ध पंचांग और पश्चिम बंगाल के क्षेत्रीय अवकाश की सूची, दोनों 11 नवंबर दर्ज करते हैं। कुछ बंगाली कैलेंडर साइटें 10 नवंबर छाप रही हैं, पर वे तिथि का घड़ी-समय नहीं देतीं। घर में पारिवारिक पंजिका चली आ रही हो तो उससे मिला लें।
भाई बहन के घर जाए या बहन भाई के घर?
कथा के अनुसार भाई बहन के घर जाता है — यमराज यमुना के घर गए थे। यही इस पर्व का मूल ढाँचा है और रक्षाबंधन से इसका अंतर भी यही है। दूरी या परिस्थिति के कारण उलटा भी होता है, और परंपरा में यह चलता है।
जिसकी बहन या भाई न हो, वह क्या करे?
परंपरा में चचेरी-ममेरी बहन, भाभी या मुँहबोली बहन से तिलक कराना सामान्य है। कुछ जगह चंद्रमा को अर्घ्य देकर संकल्प करने का विधान भी मिलता है। यह पर्व रिश्ते के भाव पर टिका है, रक्त-संबंध की शर्त पर नहीं।
चित्रगुप्त पूजा और भाई दूज एक ही दिन क्यों?
दोनों कार्तिक शुक्ल द्वितीया के अपराह्न के कर्म हैं, इसलिए तिथि एक ही पड़ती है। जिन घरों में दोनों होती हैं, वहाँ आम क्रम यह है कि पहले चित्रगुप्त पूजा और कलम-दवात का पूजन, फिर भाई का तिलक।
भाई दूज के बाद कार्तिक में कौन-से पर्व पड़ते हैं?
भाई दूज के बाद छठ पूजा 13 से 16 नवंबर तक चलती है, फिर देवउठनी एकादशी 20 नवंबर और तुलसी विवाह 21 नवंबर को पड़ता है, और मास कार्तिक पूर्णिमा, 24 नवंबर पर पूरा होता है।
स्रोत
- panchangbodh.com — भाई दूज पृष्ठ (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश): भाई दूज 11 नवंबर 2026 (बुधवार), कार्तिक शुक्ल द्वितीया दोपहर 3:55 तक; अपराह्न तिलक नई दिल्ली 1:09–3:19, मुंबई 1:29–3:45; उसी दिन चित्रगुप्त पूजा
- panchangbodh.com — गोवर्धन पूजा और दीवाली पृष्ठ: अमावस्या 8 नवंबर प्रातः 11:30 से 9 नवंबर दोपहर 12:33 तक; प्रतिपदा 10 नवंबर दोपहर 2:01 तक; गोवर्धन पूजा 10 नवंबर; शृंखला में भाई दूज 11 नवंबर
- myastrology.in — भाई फोटा पृष्ठ (नई दिल्ली, दृक सिद्धांत): 11 नवंबर 2026; द्वितीया आरंभ 10 नवंबर 2:01 PM, समाप्त 11 नवंबर 3:54 PM; बंगला तिथि 25 कार्तिक 1433
- officeholidays.com — भ्रातृ द्वितीया, पश्चिम बंगाल: 2026 में बुधवार, 11 नवंबर, क्षेत्रीय अवकाश
- banglacalendartoday.in — भाई फोंटा पृष्ठ: 10 नवंबर 2026 दर्ज; तिथि का घड़ी-समय नहीं दिया गया और पृष्ठ पर तिथि का नाम असंगत मिला — इसी असहमति का उल्लेख ऊपर किया गया है
- JPL DE421 ग्रह-गणित (skyfield) से स्वतंत्र गणना: चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर से द्वितीया 10 नवंबर 14:00 IST से 11 नवंबर 15:53 IST; तथा 16 शहरों के सूर्योदय-सूर्यास्त और उनसे निकाला गया अपराह्न (पाँच खंडों में चौथा)
सूचना: तिथि के आरंभ और समाप्ति के क्षण पूरे भारत में एक ही होते हैं, पर अपराह्न, सूर्योदय और सूर्यास्त शहर के अनुसार बदलते हैं — ऊपर दी गई खिड़कियाँ उसी शहर के लिए मान्य हैं। पंचांग-भेद और पारिवारिक परंपरा के कारण स्थानीय निर्णय भिन्न हो सकता है; अंतिम निर्णय अपने कुल-पुरोहित या स्थानीय पंचांग से मिलाकर लें। यह पृष्ठ जानकारी के लिए है और किसी चिकित्सकीय या वैधानिक सलाह का विकल्प नहीं है।