कालाष्टमी 2026 इस बार 3 अक्टूबर (शनिवार) को है, और अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर सुबह 7:59 बजे से शुरू होकर 4 अक्टूबर सुबह 5:51 बजे तक रहेगी। यह दिन भगवान काल भैरव की उपासना, व्रत और भय-बाधा से मुक्ति की प्रार्थना के लिए समर्पित है। इस लेख में हम काल भैरव के मंत्र (उनके अर्थ सहित), पूजा विधि-नियम, काले कुत्ते की सेवा की परंपरा और काशी के काल भैरव मंदिर के महत्व के बारे में बताएंगे।
इस लेख में
कालाष्टमी 2026 की तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को कालाष्टमी (मासिक कालाष्टमी) मनाई जाती है। आश्विन मास की कालाष्टमी की जानकारी इस प्रकार है:
| विवरण | समय |
|---|---|
| तिथि | 3 अक्टूबर 2026, शनिवार |
| पक्ष | आश्विन कृष्ण अष्टमी |
| अष्टमी तिथि प्रारंभ | 3 अक्टूबर, सुबह 7:59 बजे |
| अष्टमी तिथि समाप्त | 4 अक्टूबर, सुबह 5:51 बजे |
शनिवार के दिन कालाष्टमी पड़ना विशेष माना जाता है, क्योंकि शनिवार भी काल भैरव और शनि देव से जुड़ा दिन है। तिथि के स्थान और पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है, इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लें।
काल भैरव मंत्र
धार्मिक पोर्टल पत्रिका (Patrika.com) की रिपोर्ट के अनुसार, कालाष्टमी पर काल भैरव की आराधना के लिए ये मंत्र बताए गए हैं:
ॐ कालभैरवाय नमः
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं
ॐ कालकालाय विद्महे, कालतीताय धीमहि, तन्नो भैरव प्रचोदयात्
(स्रोत: patrika.com, कालाष्टमी 2026 काल भैरव पूजा विधि-नियम)
मंत्रों का सरल अर्थ
- “ॐ कालभैरवाय नमः” — यह सबसे सरल और सर्वाधिक प्रचलित मंत्र है, जिसका शाब्दिक अर्थ है “मैं काल भैरव को नमन करता हूँ।” यह भगवान भैरव के प्रति सीधी श्रद्धा और शरणागति का भाव प्रकट करता है।
- “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” — इसमें भैरव को “बटुक” (बाल स्वरूप) कहकर संबोधित किया गया है और “आपदुद्धारणाय” यानी संकटों-आपदाओं से रक्षा करने की प्रार्थना की गई है। यह मंत्र भय और बाधा से मुक्ति की कामना के लिए विशेष रूप से जपा जाता है।
- “ॐ कालकालाय विद्महे, कालतीताय धीमहि, तन्नो भैरव प्रचोदयात्” — यह गायत्री शैली में रचा गया भैरव मंत्र है। इसका भाव है कि “हम काल के भी काल (महाकाल) को जानने का प्रयास करते हैं, उस काल से परे तत्व का ध्यान करते हैं; वह भैरव हमें सद्बुद्धि और सही दिशा दें।”
इन मंत्रों का जप श्रद्धा और नियमपूर्वक करने की परंपरा है। ध्यान रहे कि यह एक भक्ति और साधना की परंपरा है — किसी मंत्र-जप से तुरंत या गारंटीशुदा “सिद्धि” अथवा किसी चमत्कारी परिणाम का दावा नहीं किया जा सकता। यह श्रद्धा और नियमित अभ्यास पर आधारित देवोपासना है, कोई जादुई फॉर्मूला नहीं।
पूजा विधि और नियम
पत्रिका की रिपोर्ट में बताई गई काल भैरव पूजा की परंपरागत विधि और नियम इस प्रकार हैं:
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें — कालाष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने और साफ, गहरे रंग (काले या नीले) के वस्त्र पहनने की परंपरा है।
- दीपक जलाएं — भगवान भैरव की प्रतिमा या चित्र के सामने तिल के तेल का दीपक जलाएं।
- पूजन सामग्री अर्पित करें — नीले फूल, काले तिल और प्रसाद अर्पित करने का विधान बताया गया है।
- पाठ करें — “काल भैरव अष्टक” या “भैरव चालीसा” का पाठ करने की सलाह दी गई है। यह स्तोत्र भगवान भैरव के गुणों और स्वरूप का वर्णन करता है और परंपरागत रूप से कालाष्टमी पर पढ़ा जाता है।
- व्रत और संयम — इस दिन सात्विक आचरण, संयमित भोजन (या व्रत) रखने और तामसिक वस्तुओं से दूर रहने की परंपरा है।
नियम के तौर पर पूजा शांत मन और श्रद्धा से करने पर बल दिया जाता है; जल्दबाजी या अधूरे विधि-विधान से पूजा करने की सलाह नहीं दी जाती।
काले कुत्ते की सेवा
कालाष्टमी की एक प्रमुख परंपरा है — काले कुत्ते की सेवा। मान्यता है कि कुत्ता (श्वान) भगवान काल भैरव का वाहन है, इसलिए इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना विशेष पुण्यकारी माना जाता है। पत्रिका के अनुसार, दिन में या शाम के समय काले कुत्ते को मीठी रोटी या गुड़ खिलाना शुभ माना गया है। यह सेवा भाव और करुणा का प्रतीक है, न कि किसी बाध्यता का — जो लोग यह सेवा नहीं कर पाते, वे अन्य विधियों से भी भैरव आराधना कर सकते हैं।
काशी में काल भैरव मंदिर का महत्व
वाराणसी (काशी) का काल भैरव मंदिर देश के प्रमुख भैरव तीर्थों में गिना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान काल भैरव को काशी का “कोतवाल” (रक्षक/न्यायाधिकारी) माना जाता है, और परंपरा के अनुसार काशी विश्वनाथ के दर्शन से पहले काल भैरव के दर्शन का महत्व बताया जाता है। कालाष्टमी के दिन इस मंदिर में विशेष भीड़ और पूजा-अर्चना होती है। यह मंदिर भय-बाधा से मुक्ति और सुरक्षा की कामना के लिए श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है।
FAQ
कालाष्टमी अक्टूबर 2026 कब है?
कालाष्टमी अक्टूबर 2026 में 3 अक्टूबर (शनिवार) को है। अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर सुबह 7:59 बजे से शुरू होकर 4 अक्टूबर सुबह 5:51 बजे तक रहेगी।
काल भैरव मंत्र का जप कब करना चाहिए?
परंपरा के अनुसार कालाष्टमी के दिन सुबह स्नान के बाद, स्वच्छ मन और शांत वातावरण में काल भैरव मंत्रों का जप करना उचित माना जाता है। शाम के समय भी पूजा-अर्चना की जा सकती है।
क्या काल भैरव मंत्र जपने से सिद्धि मिलती है?
नहीं, इसे किसी गारंटीशुदा “सिद्धि” या चमत्कारी परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक श्रद्धा-आधारित भक्ति परंपरा है, जिसका उद्देश्य मानसिक संबल, भय से मुक्ति और आध्यात्मिक अनुशासन है।
काले कुत्ते की सेवा क्यों की जाती है?
मान्यता है कि कुत्ता काल भैरव का वाहन है, इसलिए कालाष्टमी पर काले कुत्ते को भोजन कराना (जैसे मीठी रोटी या गुड़) शुभ और पुण्यकारी माना जाता है।
क्या कालाष्टमी पर व्रत रखना अनिवार्य है?
व्रत रखना परंपरागत रूप से शुभ माना गया है, परंतु यह हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और श्रद्धा पर निर्भर करता है। जो व्रत नहीं रख सकते, वे केवल पूजा-पाठ और मंत्र-जप द्वारा भी आराधना कर सकते हैं।
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अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख विशुद्ध रूप से श्रद्धा और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित सामान्य जानकारी है, इसे किसी चमत्कारी या गारंटीशुदा परिणाम के दावे के रूप में न लें। तांत्रिक साधना केवल अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में करें; बिना मार्गदर्शन के प्रयोग न करें। किसी भी गंभीर मानसिक, शारीरिक या पारिवारिक समस्या के लिए योग्य चिकित्सक, मनोवैज्ञानिक या विशेषज्ञ से परामर्श लें। तिथि और समय में क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार अंतर संभव है, पूजा से पूर्व स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।
स्रोत
- https://www.patrika.com/religion-and-spirituality/kalashtami-2026-kaal-bhairav-puja-vidhi-niyam-bhay-badha-mukti-hindi-20553719
- https://www.thedivineindia.com/masik-kalashtami-vrat-tithi/7717



