छठ पूजा 2026 शुक्रवार 13 नवंबर से सोमवार 16 नवंबर तक है, और पर्व का मुख्य दिन रविवार 15 नवंबर है, जब अस्त होते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है। उषा अर्घ्य अगली भोर, सोमवार 16 नवंबर को उगते सूर्य को जाता है। अर्घ्य का समय आपके शहर का सूर्यास्त और सूर्योदय ही है, पूरे देश का कोई एक समय नहीं — कोलकाता में संध्या अर्घ्य लगभग शाम 4:52 और उषा अर्घ्य प्रातः 5:49 पर पड़ता है, पटना में 5:00 और 6:07 पर, नई दिल्ली में 5:27 और 6:44 पर। नीचे 19 शहरों की तालिका है, और यह भी समझाया है कि षष्ठी तिथि के किस गणित से संध्या अर्घ्य 15 नवंबर पर ही टिकता है।
इस लेख में
छठ पूजा 2026 एक नज़र में
| छठ पर्व | शुक्र 13 – सोम 16 नवंबर 2026 |
| तिथि-विस्तार | कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी |
| नहाय-खाय | शुक्रवार, 13 नवंबर |
| खरना / लोहंडा | शनिवार, 14 नवंबर |
| संध्या अर्घ्य (मुख्य दिन) | रविवार, 15 नवंबर — स्थानीय सूर्यास्त पर |
| उषा अर्घ्य और पारण | सोमवार, 16 नवंबर — स्थानीय सूर्योदय पर |
| षष्ठी तिथि आरंभ | 14 नवंबर, रात 11:25 (कुछ पंचांग 11:23) |
| षष्ठी तिथि समाप्त | 16 नवंबर, रात 2:02 (कुछ पंचांग “करीब 2 बजे”) |
| कोलकाता / हावड़ा अर्घ्य | संध्या 4:52 · उषा 5:49 |
| पटना अर्घ्य | संध्या 5:00 · उषा 6:07 |
| निर्जला व्रत | लगभग 36 घंटे — खरना की रात से उषा अर्घ्य तक |
| आराध्य | सूर्य और छठी मैया |
| पिछला पर्व | भाई दूज — 11 नवंबर |
तिथि-स्रोत: panchangbodh.com का छठ पृष्ठ और शहर-अनुसार अर्घ्य तालिका (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश) — चार दिन 13 से 16 नवंबर, संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, उषा अर्घ्य 16 नवंबर। षष्ठी तिथि के घड़ी-समय अमर उजाला के 7 अक्टूबर 2026 के छठ पृष्ठ से, और स्विस एफ़ेमेरिस (चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर) से स्वतंत्र रूप से जाँचे गए — दोनों में दो मिनट का अंतर है। शहर-वार समय panchangbodh की 46-शहर तालिका के हैं।
षष्ठी तिथि का गणित — संध्या अर्घ्य 15 नवंबर को ही क्यों
छठ की तारीख पर इस साल कोई उलझन नहीं है, और यह संयोग नहीं — इसकी एक साफ़ वजह है। तिथि चंद्रमा और सूर्य के कोणीय अंतर से बनती है: हर 12 अंश का अंतर एक तिथि। चंद्रमा की गति एक-सी नहीं रहती, इसलिए कोई तिथि 20 घंटे की निकलती है और कोई 27 घंटे की। कार्तिक शुक्ल की इस शृंखला में घड़ी-समय इस तरह पड़ते हैं:
- शुक्ल चतुर्थी — 12 नवंबर शाम 6:10 से 13 नवंबर रात 8:43 तक
- शुक्ल पंचमी — 13 नवंबर रात 8:43 से 14 नवंबर रात 11:25 तक
- शुक्ल षष्ठी — 14 नवंबर रात 11:25 से 16 नवंबर रात 2:02 तक
- शुक्ल सप्तमी — 16 नवंबर रात 2:02 से 17 नवंबर भोर 4:20 तक
षष्ठी की लंबाई देखिए — लगभग 26 घंटे 37 मिनट। यह बढ़ी हुई तिथि है, और इसका व्यावहारिक असर यह है कि 15 नवंबर का सूर्योदय और सूर्यास्त, दोनों षष्ठी के भीतर पड़ते हैं। छठ का निर्णय दो नियमों से होता है: पहला, उदय-व्यापिनी — सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, वही दिन उस तिथि का माना जाता है; दूसरा, संध्या अर्घ्य का कर्म-काल सूर्यास्त है। 15 नवंबर दोनों शर्तें एक साथ पूरी करता है, इसलिए किसी भी पंचांग में तारीख आगे-पीछे खिसकने की गुंजाइश नहीं बची। जिन वर्षों में षष्ठी सूर्यास्त से पहले ही छूट जाती है, वहीं दो-दो तारीखें छपती हैं — इस बार वह स्थिति नहीं है।
उषा अर्घ्य सप्तमी में क्यों पड़ता है
यह सवाल अक्सर आता है और इसका जवाब भी ऊपर की तालिका में है। षष्ठी 16 नवंबर की रात 2:02 पर छूट जाती है, यानी 16 नवंबर के सूर्योदय के समय सप्तमी चल रही होती है। फिर भी उषा अर्घ्य उसी भोर दिया जाता है, क्योंकि यह अर्घ्य अपनी कोई स्वतंत्र तिथि नहीं खोजता — यह संध्या अर्घ्य की जोड़ी का दूसरा हिस्सा है। परंपरा का ढाँचा ही यह है कि व्रती अस्त होते सूर्य को विदा करती हैं और उसी व्रत में खड़े रहकर अगली भोर उगते सूर्य का स्वागत करती हैं। इसलिए उषा अर्घ्य का समय तिथि नहीं, आपके शहर का सूर्योदय तय करता है। तिथि-गणना के इसी तर्क पर विस्तार दुर्गा पूजा वाले पृष्ठ पर दिया गया है।
स्रोतों में कहाँ मामूली अंतर है
षष्ठी के आरंभ पर अमर उजाला 14 नवंबर रात 11:23 देता है; स्विस एफ़ेमेरिस से की गई स्वतंत्र गणना 11:25 निकालती है। समाप्ति पर वह पृष्ठ “16 नवंबर की रात करीब 2 बजे” लिखता है, गणना 2:02 देती है। यह दो मिनट का अंतर अयनांश और गणना-पद्धति का है और किसी अनुष्ठान पर असर नहीं डालता, क्योंकि छठ का अर्घ्य तिथि के मिनट पर नहीं, सूर्यास्त और सूर्योदय पर टिका है। तारीखों पर दोनों स्रोत और panchangbodh — तीनों एक जैसे हैं।
छठ के चार दिन
नहाय-खाय — शुक्रवार, 13 नवंबर
व्रती स्नान करके दिन का एक ही सात्विक भोजन लेती हैं। परंपरागत थाली कद्दू-भात है — कद्दू की सब्ज़ी, चावल और चने की दाल, बिना प्याज़-लहसुन। घर और रसोई इसी दिन छठ के लिए अलग कर दिए जाते हैं। चतुर्थी इस दिन रात 8:43 तक रहती है।
खरना या लोहंडा — शनिवार, 14 नवंबर
दिन भर का उपवास, जो संध्या को खीर और रोटी के प्रसाद से पूरा होता है। गुड़ और नए चावल की खीर बनती है, और प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। यही पर्व का सबसे निर्णायक क्षण है — इसके बाद अन्न तो दूर, जल की एक बूँद भी नहीं ली जाती।
संध्या अर्घ्य — रविवार, 15 नवंबर
दिन ढलते ही परिवार घाट की ओर निकलता है। व्रती कमर तक जल में उतरकर बाँस के सूप में रखी अर्घ्य-सामग्री अस्त होते सूर्य की ओर उठाती हैं। कोई प्रतिमा नहीं, कोई पुरोहित नहीं — अर्घ्य व्रती अपने हाथ से देती हैं। घाट पर सूचीबद्ध सूर्यास्त से 30 से 45 मिनट पहले पहुँचना ठीक रहता है, क्योंकि सूप और दउरा सजाने में समय लगता है और अर्घ्य में हड़बड़ी नहीं होनी चाहिए।
उषा अर्घ्य और पारण — सोमवार, 16 नवंबर
भोर में वही परिवार दोबारा घाट जाता है और उगते सूर्य को अर्घ्य देता है। इसके बाद पारण होता है — पहले जल, फिर प्रसाद, फिर भोजन। खरना की रात से यहाँ तक का निर्जला व्रत लगभग 36 घंटे का बैठता है।
शहर-वार अर्घ्य समय — 15 और 16 नवंबर 2026
यह तालिका सबसे ज़रूरी बात है, और इसी पर सबसे ज़्यादा ग़लती होती है। संध्या अर्घ्य आपके शहर का 15 नवंबर का सूर्यास्त है और उषा अर्घ्य 16 नवंबर का सूर्योदय। सूर्यास्त देशांतर के साथ खिसकता है, इसलिए पूर्व में बसा कोलकाता मुंबई से एक घंटे से भी पहले सूर्य को अस्त होते देखता है। जो ख़बर एक ही “छठ अर्घ्य समय” छापती है, वह पटना, छपरा या कोलकाता में से कम-से-कम दो जगह ग़लत होती है।
| शहर | संध्या अर्घ्य (15 नवं) | उषा अर्घ्य (16 नवं) |
| कोलकाता | शाम 4:52 | प्रातः 5:49 |
| हावड़ा | शाम 4:52 | प्रातः 5:50 |
| पटना | शाम 5:00 | प्रातः 6:07 |
| गया | शाम 5:02 | प्रातः 6:06 |
| मुज़फ़्फ़रपुर | शाम 4:58 | प्रातः 6:07 |
| दरभंगा | शाम 4:56 | प्रातः 6:05 |
| भागलपुर | शाम 4:53 | प्रातः 5:59 |
| छपरा | शाम 5:01 | प्रातः 6:09 |
| आरा | शाम 5:02 | प्रातः 6:09 |
| सासाराम | शाम 5:06 | प्रातः 6:11 |
| रांची | शाम 5:03 | प्रातः 6:03 |
| जमशेदपुर | शाम 5:01 | प्रातः 5:58 |
| धनबाद | शाम 4:58 | प्रातः 5:59 |
| वाराणसी | शाम 5:09 | प्रातः 6:15 |
| बलिया | शाम 5:04 | प्रातः 6:12 |
| प्रयागराज | शाम 5:14 | प्रातः 6:20 |
| लखनऊ | शाम 5:15 | प्रातः 6:26 |
| नई दिल्ली | शाम 5:27 | प्रातः 6:44 |
| मुंबई | शाम 5:59 | प्रातः 6:46 |
ये समय हर शहर के केंद्र के लिए गणना किए गए सूर्यास्त और सूर्योदय हैं। आपका घाट शहर के पूर्वी या पश्चिमी छोर पर हो तो एक-दो मिनट का फ़र्क पड़ सकता है, इसलिए अंतिम मिनट अपने स्थानीय पंचांग से मिला लेना बेहतर है। इसी तरह करवा चौथ के चंद्रोदय समय भी शहर-दर-शहर बदलते हैं — निर्जला व्रत वाले पर्वों में यह बात हर बार दोहराने लायक है।
कोलकाता और बंगाल में छठ
कोलकाता और हावड़ा में छठ बीते कुछ दशकों में बड़ा पर्व बन चुका है। हुगली के घाटों पर, और शहर भर के तालाबों और जलाशयों के किनारे, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए परिवार वही व्रत उसी विधि से निभाते हैं। भूगोल एक सुविधा देता है: कोलकाता देश के पूर्वी छोर पर है, इसलिए यहाँ का संध्या अर्घ्य पूरे अंचल में सबसे पहले पड़ता है — शाम 4:52 पर, पटना से आठ मिनट और दिल्ली से 35 मिनट पहले।
एक व्यावहारिक बात जान लेनी चाहिए: छठ पश्चिम बंगाल की सरकारी अवकाश-सूची में अलग से दर्ज नहीं है। नवंबर 2026 में राज्य के क्षेत्रीय अवकाश काली पूजा (8 नवंबर), भ्रातृ द्वितीया (11 नवंबर) और गुरु नानक जयंती (24 नवंबर) हैं। बिहार और झारखंड में छठ पर अवकाश रहता है, बंगाल में छुट्टी का प्रबंध दफ़्तर-दर-दफ़्तर होता है — घाट की योजना बनाने से पहले यह देख लेना ठीक रहेगा।
छठ की सामग्री
छठ की सूची छोटी है और उसमें कुछ भी बाज़ार-निर्भर नहीं:
- बाँस का सूप और दउरा — अर्घ्य की सामग्री इन्हीं में घाट तक जाती है
- ठेकुआ — गेहूँ के आटे और गुड़ की कठोर मिठाई, छठ का विशिष्ट प्रसाद
- गन्ने के समूचे डंठल, नारियल, केला और मौसमी फल
- सिंदूर, दीये, मिट्टी के बरतन और पूजा का जल-पात्र
इस पर्व में न प्रतिमा है, न पुरोहित, न कोई शुल्क देने वाला विधान। अगर कोई आपसे छठ के नाम पर विशेष अनुष्ठान, महंगी सामग्री या “सिद्ध” ठेकुआ-प्रसाद के पैसे माँगे, तो यह परंपरा नहीं है — ऐसे दावों की पहचान कैसे करें, यह अलग पृष्ठ पर विस्तार से लिखा है।
36 घंटे का निर्जला व्रत — स्वास्थ्य और घाट की सावधानी
छठ हिंदू पंचांग के सबसे कठिन व्रतों में है, और इसे कठिन मानकर ही तैयारी करनी चाहिए। लगभग 36 घंटे बिना जल रहना शरीर पर वास्तविक दबाव है, विशेषकर नवंबर की ठंडी भोर में जल में खड़े रहकर।
- गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ, मधुमेह, रक्तचाप, गुर्दे या हृदय रोग से ग्रस्त व्यक्ति और नियमित दवा लेने वाले लोग कठोर निर्जला व्रत से पहले अपने चिकित्सक से बात करें। दवा का समय व्रत के कारण छोड़ना ठीक नहीं होता।
- वृद्ध व्रतियों और बच्चों के लिए फलाहार या जल-सहित व्रत का विकल्प परंपरा में स्वीकार्य है। श्रद्धा घंटों से नहीं नापी जाती।
- चक्कर, धुँधली दृष्टि, तेज़ सिरदर्द, बेहोशी जैसा लगना या दिल की धड़कन असामान्य लगे — व्रत तुरंत खोल देना चाहिए और चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। स्वास्थ्य के कारण व्रत तोड़ना दोष नहीं है; शास्त्र-परंपरा में आपद्धर्म की व्यवस्था इसी के लिए है।
- घाट पर: बच्चों को कभी जल के किनारे अकेला न छोड़ें। अपरिचित घाट की गहराई का अनुमान न लगाएँ। भीड़ में एक-दूसरे का हाथ पकड़े रहें, और लौटने का रास्ता पहले से तय रखें। दीये और अगरबत्ती साड़ी के पल्लू से दूर रखें।
- खरना के प्रसाद में नमक और पानी ठीक मात्रा में लें, और पारण के बाद एक ही बार में भारी भोजन न करें — पहले जल, फिर हल्का प्रसाद।
छठी मैया, सूर्य और अस्त सूर्य को पहला अर्घ्य
छठ में आराधना सूर्य की है और छठी मैया की, जिन्हें संतान और कल्याण की देवी तथा परंपरा में सूर्य की बहन के रूप में स्मरण किया जाता है। पर्व की सबसे विशिष्ट बात यह है कि पहला बड़ा अर्घ्य उगते सूर्य को नहीं, अस्त होते सूर्य को जाता है। इस परंपरा में इसका अर्थ सीधा है — जो प्रकाश दिन भर मिल चुका, पहले उसका आभार; माँगना बाद में, अगली भोर।
व्रत-कथा की परंपरा इसे कर्ण से जोड़ती है, जो सूर्यपुत्र माने जाते हैं और जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे, और द्रौपदी से, जिन्होंने पांडवों के कल्याण के लिए यह व्रत रखा था। छठ सबसे गहराई से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल की तराई में मनाया जाता है, और उन क्षेत्रों से निकले परिवार जहाँ भी बसे — कोलकाता, मुंबई, दिल्ली या विदेश — जो जल मिला, वहीं यही व्रत निभाते हैं। छठ की कथा-परंपरा और इसके धार्मिक अर्थ पर अलग विस्तार इंडियन मिथोलॉजीज़ पर पढ़ा जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
छठ पूजा 2026 में कब है?
छठ चार दिन का पर्व है — शुक्रवार 13 नवंबर 2026 से सोमवार 16 नवंबर 2026 तक। 13 को नहाय-खाय, 14 को खरना, रविवार 15 को संध्या अर्घ्य और सोमवार 16 की भोर में उषा अर्घ्य तथा पारण। मुख्य दिन 15 नवंबर है।
संध्या अर्घ्य का समय क्या है?
संध्या अर्घ्य 15 नवंबर को आपके शहर के सूर्यास्त पर दिया जाता है, इसलिए एक राष्ट्रीय समय नहीं होता। कोलकाता में लगभग शाम 4:52, पटना में 5:00, वाराणसी में 5:09, नई दिल्ली में 5:27 और मुंबई में 5:59। ऊपर की तालिका में 19 शहरों के समय दिए हैं।
उषा अर्घ्य कब और किस समय दिया जाएगा?
उषा अर्घ्य सोमवार 16 नवंबर की भोर में, आपके शहर के सूर्योदय पर — कोलकाता में लगभग 5:49, पटना में 6:07, नई दिल्ली में 6:44। षष्ठी तिथि उस भोर से पहले ही (रात 2:02 पर) छूट जाती है, पर उषा अर्घ्य तिथि से नहीं, संध्या अर्घ्य की जोड़ी से तय होता है।
क्या छठ की तारीख पर इस साल कोई मतभेद है?
नहीं। षष्ठी तिथि 14 नवंबर रात 11:25 से 16 नवंबर रात 2:02 तक लगभग 26 घंटे 37 मिनट चलती है, इसलिए 15 नवंबर का सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों उसी तिथि में पड़ते हैं। उदय-व्यापिनी नियम और सूर्यास्त का कर्म-काल, दोनों 15 नवंबर पर ही टिकते हैं। स्रोतों में केवल दो मिनट का अंतर मिला है, तारीख में कोई नहीं।
निर्जला व्रत कितने घंटे का होता है?
खरना की रात, 14 नवंबर को खीर-रोटी का प्रसाद ग्रहण करते ही व्रत शुरू होता है और 16 नवंबर की भोर उषा अर्घ्य के बाद पारण से खुलता है — लगभग 36 घंटे, जिसमें जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य कारण होने पर व्रत का स्वरूप हल्का करना या बीच में खोलना परंपरा में स्वीकार्य है।
छठ की पूजा-सामग्री में क्या-क्या ज़रूरी है?
बाँस का सूप और दउरा, ठेकुआ, गन्ने के समूचे डंठल, नारियल, केला, मौसमी फल, सिंदूर और दीये। इस व्रत में प्रतिमा, पुरोहित या किसी शुल्क की आवश्यकता नहीं होती — अर्घ्य व्रती स्वयं देती हैं।
कोलकाता में छठ पर छुट्टी रहती है?
पश्चिम बंगाल की क्षेत्रीय अवकाश-सूची में छठ अलग से दर्ज नहीं है; नवंबर 2026 में राज्य के अवकाश काली पूजा (8 नवंबर), भ्रातृ द्वितीया (11 नवंबर) और गुरु नानक जयंती (24 नवंबर) हैं। बिहार और झारखंड में छठ पर अवकाश रहता है। बंगाल में संस्थान-स्तर पर व्यवस्था बदलती है, इसलिए अपने दफ़्तर या विद्यालय से पुष्टि कर लें।
छठ से पहले और बाद कार्तिक के कौन-से पर्व पड़ते हैं?
छठ से पहले नरक चतुर्दशी (7 नवंबर), दीवाली और लक्ष्मी पूजा (8 नवंबर), गोवर्धन पूजा और अन्नकूट (10 नवंबर) तथा भाई दूज (11 नवंबर) पड़ते हैं। छठ के बाद कार्तिक शुक्ल की शृंखला देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) और कार्तिक पूर्णिमा के स्नान-दीपदान की ओर बढ़ती है।
स्रोत
- panchangbodh.com — छठ पूजा 2026 पृष्ठ (नई दिल्ली, IST, लाहिरी अयनांश): पर्व 13 से 16 नवंबर 2026, कार्तिक शुक्ल चतुर्थी–सप्तमी; संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, उषा अर्घ्य 16 नवंबर; लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत; सामग्री और कथा-संदर्भ
- panchangbodh.com — छठ अर्घ्य समय 2026, शहर अनुसार (46 शहर): कोलकाता 4:52 PM / 5:49 AM, हावड़ा 4:52 / 5:50, पटना 5:00 / 6:07, गया 5:02 / 6:06, मुज़फ़्फ़रपुर 4:58 / 6:07, दरभंगा 4:56 / 6:05, भागलपुर 4:53 / 5:59, छपरा 5:01 / 6:09, आरा 5:02 / 6:09, सासाराम 5:06 / 6:11, रांची 5:03 / 6:03, जमशेदपुर 5:01 / 5:58, धनबाद 4:58 / 5:59, वाराणसी 5:09 / 6:15, बलिया 5:04 / 6:12, प्रयागराज 5:14 / 6:20, लखनऊ 5:15 / 6:26, नई दिल्ली 5:27 / 6:44, मुंबई 5:59 / 6:46
- amarujala.com — छठ महापर्व 2026 पृष्ठ, 7 अक्टूबर 2026: नहाय-खाय 13 नवंबर, खरना 14 नवंबर, संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, उषा अर्घ्य 16 नवंबर; कार्तिक शुक्ल षष्ठी 14 नवंबर रात 11:23 से 16 नवंबर रात करीब 2 बजे तक
- स्विस एफ़ेमेरिस (Swiss Ephemeris) से स्वतंत्र गणना: चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर से कार्तिक शुक्ल चतुर्थी 13 नवंबर 20:43 तक, पंचमी 14 नवंबर 23:25 तक, षष्ठी 16 नवंबर 02:02 तक, सप्तमी 17 नवंबर 04:20 तक (IST); तथा कोलकाता, पटना, वाराणसी, रांची, दिल्ली और मुंबई के सूर्यास्त-सूर्योदय, जो panchangbodh की तालिका से एक मिनट के भीतर मिलते हैं
- officeholidays.com — पश्चिम बंगाल 2026 अवकाश सूची: नवंबर में काली पूजा 8 नवंबर, भ्रातृ द्वितीया 11 नवंबर, गुरु नानक जयंती 24 नवंबर; छठ पूजा की कोई प्रविष्टि नहीं
सूचना: तिथि के आरंभ और समाप्ति के क्षण पूरे भारत में एक ही होते हैं, पर सूर्यास्त और सूर्योदय — और इसलिए अर्घ्य का समय — शहर के अनुसार बदलते हैं; ऊपर दी गई घड़ियाँ उसी शहर के लिए मान्य हैं और घाट की स्थिति से एक-दो मिनट भिन्न हो सकती हैं। पंचांग-भेद और पारिवारिक परंपरा के कारण स्थानीय निर्णय अलग हो सकता है, अंतिम पुष्टि अपने कुल-पुरोहित या स्थानीय छठ पंचांग से कर लें। लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत कठिन है — यह पृष्ठ जानकारी के लिए है और किसी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं; गर्भावस्था, मधुमेह, रक्तचाप, गुर्दे या हृदय रोग, अथवा नियमित दवा की स्थिति में व्रत से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।