विवाह मुहूर्त 2026: नवंबर-दिसंबर में बचे सिर्फ 11 शुभ दिन

साल 2026 में शादी के लिए अब सिर्फ 11 शुभ विवाह मुहूर्त बचे हैं — नवंबर में 4 दिन (21, 24, 25, 26 नवंबर) और दिसंबर में 7 दिन (2, 3, 4, 5, 6, 11, 12 दिसंबर)। विवाह का यह सिलसिला 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के साथ खुलता है, और 16 दिसंबर को धनु संक्रांति से खरमास लगने पर बंद हो जाता है। इसके बाद अगला मुहूर्त 15 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति के बाद मिलेगा।

इस लेख में
  1. विवाह मुहूर्त नवंबर-दिसंबर 2026 एक नज़र में
  2. नवंबर 2026 के विवाह मुहूर्त — पूरा समय
  3. दिसंबर 2026 के विवाह मुहूर्त — पूरा समय
  4. सिर्फ 11 दिन क्यों? मुहूर्त की गणना का असली गणित
  5. पंचांग आपस में क्यों नहीं मिलते?
  6. बंगाल में तारीख अलग हो सकती है
  7. समय किस शहर के लिए मान्य हैं?
  8. मुहूर्त तय करने से पहले ये चार बातें
  9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  10. स्रोत

विवाह मुहूर्त नवंबर-दिसंबर 2026 एक नज़र में

मद विवरण
चातुर्मास समाप्त / सीज़न शुरू 20 नवंबर 2026 (देवउठनी एकादशी)
पहला विवाह मुहूर्त शनिवार, 21 नवंबर 2026
नवंबर 2026 में कुल दिन 4 — 21, 24, 25, 26 नवंबर
दिसंबर 2026 में कुल दिन 7 — 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12 दिसंबर
अंतिम विवाह मुहूर्त (2026) शनिवार, 12 दिसंबर 2026
खरमास आरंभ 16 दिसंबर 2026 (धनु संक्रांति)
खरमास समाप्त / अगला मुहूर्त 15 जनवरी 2027 (मकर संक्रांति)
अगस्त–अक्टूबर 2026 कोई मुहूर्त नहीं (चातुर्मास और पितृ पक्ष)

तिथि-स्रोत: SanatanBodh पंचांग गणना (नई दिल्ली, लाहिरी अयनांश) — 28 अक्टूबर 2026 को अद्यतन; दिनों की सूची UPUKLive (12 अक्टूबर 2026) से स्वतंत्र रूप से मिलान की गई। नीचे दिए गए समय नई दिल्ली के सूर्योदय आधार पर हैं।

नवंबर 2026 के विवाह मुहूर्त — पूरा समय

नीचे दिए समय नई दिल्ली के लिए हैं। जहाँ समय अगली सुबह तक जाता है, वहाँ पंचांग का “दिन” एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक गिना जाता है — इसलिए 25 नवंबर की खिड़की 26 नवंबर की सुबह 6:52 पर बंद होती है, न कि आधी रात को।

तारीख दिन मुहूर्त अवधि (नई दिल्ली) नक्षत्र तिथि
21 नवंबर शनिवार 6:48 AM – 12:08 AM (22 नवंबर) उत्तरा भाद्रपद, रेवती शुक्ल द्वादशी
24 नवंबर मंगलवार 11:25 PM – 6:51 AM (25 नवंबर) रोहिणी कृष्ण प्रतिपदा
25 नवंबर बुधवार 6:51 AM – 6:52 AM (26 नवंबर) रोहिणी, मृगशिरा कृष्ण प्रतिपदा–द्वितीया
26 नवंबर गुरुवार 6:52 AM – 5:48 PM मृगशिरा कृष्ण द्वितीया–तृतीया

ध्यान दें कि 24 नवंबर की खिड़की रात 11:25 बजे खुलती है — यानी व्यावहारिक रूप से यह 25 नवंबर की रात का लग्न है। जिन परिवारों को दिन में फेरे करने हैं, उनके लिए 24 नवंबर उपयोगी नहीं है; 25 और 26 नवंबर बेहतर हैं।

दिसंबर 2026 के विवाह मुहूर्त — पूरा समय

तारीख दिन मुहूर्त अवधि (नई दिल्ली) नक्षत्र तिथि
2 दिसंबर बुधवार 10:32 AM – 6:57 AM (3 दिसंबर) उत्तरा फाल्गुनी कृष्ण नवमी–दशमी
3 दिसंबर गुरुवार 6:57–10:55 AM तथा 11:04 PM – 6:58 AM (4 दिसंबर) उत्तरा फाल्गुनी, हस्त कृष्ण दशमी–एकादशी
4 दिसंबर शुक्रवार 6:58 – 10:23 AM हस्त कृष्ण एकादशी
5 दिसंबर शनिवार 11:50 AM – 6:59 AM (6 दिसंबर) स्वाति कृष्ण द्वादशी–त्रयोदशी
6 दिसंबर रविवार 6:59 – 7:42 AM स्वाति कृष्ण त्रयोदशी
11 दिसंबर शुक्रवार 3:05 AM – 7:04 AM (दोनों 12 दिसंबर की भोर) उत्तराषाढ़ा शुक्ल तृतीया
12 दिसंबर शनिवार 7:04 AM – 3:29 AM (13 दिसंबर) उत्तराषाढ़ा शुक्ल तृतीया–चतुर्थी

6 दिसंबर की खिड़की सिर्फ 43 मिनट की है और 4 दिसंबर की साढ़े तीन घंटे की। बड़े आयोजन के लिए 2, 5 और 12 दिसंबर सबसे लंबी अवधि देते हैं।

सिर्फ 11 दिन क्यों? मुहूर्त की गणना का असली गणित

यह सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है और इसका जवाब “पंडित जी ने बताया” से आगे जाता है। एक दिन को विवाह-योग्य कहने के लिए कई शर्तें एक ही समय पर पूरी होनी चाहिए। किसी एक शर्त के टूटने से पूरा दिन बाहर हो जाता है।

1. सूर्य की राशि

सूर्य (सायन नहीं, निरयण/सिडेरियल) मेष, वृषभ, मिथुन, वृश्चिक, मकर या कुंभ में होना चाहिए। यही नियम खरमास को अपने आप बाहर कर देता है — जब सूर्य धनु और मीन में रहता है, तब विवाह नहीं होते। 2026 में सूर्य 16 दिसंबर को धनु में प्रवेश करता है, इसलिए 12 दिसंबर के बाद साल भर में एक भी दिन नहीं बचता।

2. चंद्रमा का नक्षत्र

चंद्रमा इन 11 नक्षत्रों में से किसी एक में हो: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद या रेवती। इनमें भी गंडांत पाद छोड़ दिए जाते हैं — मघा और मूल का पहला पाद, रेवती का अंतिम पाद। 27 नक्षत्रों में से ग्यारह, और उनमें से भी कुछ हिस्से कटे हुए — यही सबसे बड़ी छँटनी है।

3. करण और योग

करण विष्टि (भद्रा), शकुनि, चतुष्पद या नाग नहीं होना चाहिए। योग में विष्कंभ, अतिगंड, शूल, गंड, व्याघात, वज्र, व्यतिपात, परिघ और वैधृति — ये नौ योग वर्जित हैं।

4. गुरु और शुक्र का अस्त न होना

विवाह के दो कारक ग्रह बृहस्पति और शुक्र हैं। जब ये सूर्य के बहुत पास आकर अस्त (combust) हो जाते हैं, तो विवाह नहीं कराया जाता। प्रचलित मान: शुक्र सूर्य से 10° के भीतर (वक्री हो तो 8°), बृहस्पति 11° के भीतर।

5. अधिक मास, चातुर्मास और पितृ पक्ष

देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक के चार महीनों में विवाह नहीं होते — मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। 2026 में यही कारण है कि अगस्त, सितंबर और अक्टूबर पूरी तरह खाली हैं। पितृ पक्ष भी अलग से बाहर रखा जाता है।

इन सबको जोड़ने के बाद गणना सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक मिनट-दर-मिनट की जाती है, और कम से कम 5 मिनट का सतत खंड मिले तभी उसे मुहूर्त गिना जाता है। छह राशियाँ × ग्यारह नक्षत्र × वर्जित करण-योग × ग्रह-अस्त — इसी छलनी से नवंबर-दिसंबर 2026 में कुल 11 दिन निकलते हैं।

पंचांग आपस में क्यों नहीं मिलते?

अगर आपने दो जगह सूची देखी होगी तो तारीखें थोड़ी अलग मिली होंगी। यह गड़बड़ी नहीं, गणना-पद्धति का अंतर है — और इसे खुलकर बताना ज़रूरी है:

  • सभी स्रोत सहमत: 21, 25, 26 नवंबर और 2, 3, 4, 12 दिसंबर — इन सात दिनों पर कोई विवाद नहीं। यही सबसे सुरक्षित तारीखें हैं।
  • 24 नवंबर और 11 दिसंबर दो स्वतंत्र स्रोतों में हैं, लेकिन कुछ पंचांग इन्हें नहीं देते — क्योंकि इनकी खिड़की अगली भोर में पड़ती है और “दिन” की परिभाषा बदलने से तारीख बदल जाती है।
  • एक पंचांग ने 24 नवंबर और 11 दिसंबर की जगह 30 नवंबर और 9 दिसंबर दिखाए। उन दिनों चंद्रमा मघा और मूल में है — वही दो नक्षत्र जिनका पहला पाद गंडांत होने से छोड़ा जाता है। यानी अंतर गंडांत पाद गिनने या न गिनने का है।
  • एक अंग्रेज़ी पंचांग ने 5 और 6 दिसंबर छोड़कर 1 और 13 दिसंबर जोड़े।
  • 21 नवंबर पर भी दो गणनाएँ अलग हैं, क्योंकि रेवती का अंतिम पाद कब शुरू होता है — इस पर मतभेद है।

जिस स्रोत की सूची यहाँ दी गई है, वह अपनी गणना और एक अन्य प्रसिद्ध पंचांग की सूची दोनों सिरों पर 5 मिनट के भीतर मिलने पर ही दिन प्रकाशित करता है — और खुद बताता है कि 13 दिन उसने छोड़े जो दूसरे पंचांग में हैं, तथा 5 दिन उसे मिले जो उसमें नहीं हैं। यह पारदर्शिता ही भरोसे का आधार है।

एक ज़रूरी खुलासा: यह सूची तिथि और वार को नहीं गिनती। कई पारंपरिक पंचांग चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को विवाह से बाहर रखते हैं, और मंगलवार को टालते हैं। अगर आपके परिवार की परंपरा यह नियम मानती है, तो 24 नवंबर (प्रतिपदा, मंगलवार) और 12 दिसंबर (चतुर्थी तक जाने वाला) पर अपने पुरोहित से दोबारा पूछें।

बंगाल में तारीख अलग हो सकती है

बंगाल में पंजिका चलती है, उत्तर भारत का पंचांग नहीं। गुप्तप्रेस और विशुद्ध सिद्धांत पंजिका की गणना-पद्धति अलग है, इसलिए बंगाली विवाह “लग्न” की तारीखें इस सूची से मेल नहीं खा सकतीं — जैसे दुर्गा पूजा 2026 में नवमी की तारीख पर दोनों में अंतर आया था। कोलकाता या बंगाल में विवाह तय कर रहे हों तो अपनी पंजिका का विवाह-लग्न खंड अलग से देखें, और इस पृष्ठ के समय को सीधे न लगाएँ।

समय किस शहर के लिए मान्य हैं?

यह अंतर समझना ज़रूरी है:

  • नक्षत्र, योग और करण के बदलने के क्षण पूरे भारत में एक समान हैं — ये निरपेक्ष खगोलीय घटनाएँ हैं।
  • लेकिन सूर्योदय हर शहर में अलग है, और पंचांग का दिन सूर्योदय से गिना जाता है। इसलिए भोर के आसपास खुलने या बंद होने वाली खिड़कियाँ — जैसे 25-26 नवंबर और 6 दिसंबर — कोलकाता, मुंबई या चेन्नई में कुछ मिनट आगे-पीछे होंगी।
  • ऊपर दी गई तालिकाएँ नई दिल्ली की हैं। कोलकाता में सूर्योदय दिल्ली से लगभग 25–30 मिनट पहले होता है, इसलिए सीमावर्ती समय वहाँ पहले खिसकेंगे। सटीक स्थानीय समय अपने शहर के पंचांग से लें — इस पृष्ठ के समय को दूसरे शहर के लिए जोड़-घटाकर इस्तेमाल न करें।

मुहूर्त तय करने से पहले ये चार बातें

  • यह सामान्य सूची है, कुंडली-आधारित नहीं। इसमें लग्न शुद्धि, वर-वधू की कुंडली, गुण मिलान या व्यक्तिगत दोष शामिल नहीं हैं। अंतिम तारीख अपने पुरोहित से मिलान कराकर तय करें।
  • कुंडली में विवाह योग और मुहूर्त दो अलग चीज़ें हैं। कुंडली के प्रेम-विवाह योग या मंगल दोष से जुड़े प्रश्न मुहूर्त से हल नहीं होते।
  • शुभ मुहूर्त किसी परिणाम की गारंटी नहीं है। यह परंपरा में शुभारंभ के लिए चुना गया समय है — वैवाहिक जीवन की सफलता आपसी समझ, संवाद और सम्मान से बनती है, किसी घड़ी से नहीं।
  • कानूनी पक्ष अलग है। बालिग स्त्री-पुरुष को अपनी मर्ज़ी से विवाह करने का पूरा कानूनी अधिकार है, चाहे जाति, धर्म या समुदाय कोई भी हो। विशेष विवाह अधिनियम के तहत पंजीकरण मुहूर्त से स्वतंत्र है, और किसी भी कार्य-दिवस पर हो सकता है।

अगर तारीख नहीं मिल रही

11 दिनों में भीड़ होना स्वाभाविक है — मैरिज हॉल, पंडित और कैटरर जल्दी बुक हो जाते हैं। अगर इन तारीखों में कुछ तय नहीं हो पा रहा, तो 15 जनवरी 2027 के बाद की विंडो ज़्यादा खुली रहती है। विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारण और कौन-सा दोष इसके पीछे होता है, इन पर अलग विस्तृत पृष्ठ हैं। परिवार की सहमति से जुड़ी बाधा हो तो उसका रास्ता मुहूर्त नहीं, बातचीत है।

व्यक्तिगत कुंडली मिलान या लग्न शुद्धि के लिए किसी योग्य ज्योतिषी या पुरोहित से सीधे परामर्श करें — वैदिक फाइंडर्स पर सत्यापित विवरण देखे जा सकते हैं। यह वेबसाइट कोई सेवा नहीं बेचती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवंबर 2026 में शादी के कितने मुहूर्त हैं?

चार — 21, 24, 25 और 26 नवंबर 2026। तीनों देखे गए स्रोत इन चार दिनों पर सहमत हैं। 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी है, उससे पहले नवंबर में कोई मुहूर्त नहीं क्योंकि चातुर्मास चल रहा होता है।

दिसंबर 2026 में शादी की शुभ तारीखें कौन-सी हैं?

2, 3, 4, 5, 6, 11 और 12 दिसंबर 2026 — कुल सात दिन। 12 दिसंबर 2026 के बाद साल भर में कोई विवाह मुहूर्त नहीं है, क्योंकि 16 दिसंबर से खरमास लग जाता है।

2026 का आखिरी विवाह मुहूर्त कब है?

शनिवार, 12 दिसंबर 2026। नई दिल्ली के अनुसार इसकी अवधि सुबह 7:04 से 13 दिसंबर की भोर 3:29 तक है — यह बची हुई तारीखों में सबसे लंबी खिड़कियों में से एक है।

खरमास में शादी क्यों नहीं होती?

क्योंकि विवाह मुहूर्त की पहली शर्त है कि सूर्य मेष, वृषभ, मिथुन, वृश्चिक, मकर या कुंभ में हो। सूर्य जब धनु और मीन में रहता है, तब यह शर्त टूट जाती है — परंपरा में इसी अवधि को खरमास कहा गया है। 2026-27 में यह 16 दिसंबर से 15 जनवरी तक है।

अगला विवाह मुहूर्त 2027 में कब से शुरू होगा?

15 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति से, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और खरमास समाप्त होता है। उसी दिन से लग्न खुल जाते हैं।

अगस्त से अक्टूबर 2026 में एक भी मुहूर्त क्यों नहीं था?

दो कारण एक साथ थे — चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक) और उसी के बीच पड़ने वाला पितृ पक्ष। दोनों अवधियाँ विवाह से बाहर रखी जाती हैं, इसलिए तीन महीने पूरी तरह खाली रहे।

क्या ये समय कोलकाता में भी वही रहेंगे?

नहीं, बिलकुल वही नहीं। नक्षत्र और योग के बदलने के क्षण पूरे भारत में एक हैं, लेकिन पंचांग का दिन सूर्योदय से गिना जाता है और कोलकाता में सूर्योदय दिल्ली से करीब आधा घंटा पहले होता है। इसलिए भोर के आसपास की सीमाएँ खिसकेंगी। अपने शहर का पंचांग देखें; यहाँ दिए समय में जोड़-घटाव न करें।

दो पंचांगों में तारीख अलग मिल रही है, किसे मानें?

जिन सात दिनों पर सभी स्रोत सहमत हैं — 21, 25, 26 नवंबर और 2, 3, 4, 12 दिसंबर — वे सबसे सुरक्षित हैं। बाकी पर अंतर मुख्यतः गंडांत पाद गिनने और “दिन” की सीमा तय करने की पद्धति से आता है। अपने परिवार की परंपरा जिस पंचांग या पंजिका को मानती आई है, उसी को आधार बनाएँ और पुरोहित से पुष्टि कराएँ।

क्या मुहूर्त में विवाह करने से वैवाहिक जीवन सफल हो जाता है?

नहीं। मुहूर्त परंपरा में शुभारंभ के लिए चुना गया समय है, किसी परिणाम की गारंटी नहीं। वैवाहिक जीवन आपसी समझ, संवाद और सम्मान पर टिकता है। कोई भी तारीख या मंत्र इसका विकल्प नहीं है।

स्रोत

  • SanatanBodh — Vivah Muhurat सूची (नई दिल्ली, लाहिरी अयनांश), नवंबर-दिसंबर 2026 की तारीखें, समय, नक्षत्र, गणना-नियम तथा खरमास अवधि; पृष्ठ 28 अक्टूबर 2026 को अद्यतन
  • UPUKLive — “नवंबर-दिसंबर 2026 में शादी के 11 शुभ मुहूर्त” (12 अक्टूबर 2026) — दिनों की सूची और खरमास के बाद 15 जनवरी 2027 का उल्लेख
  • The Wedding Focus — Wedding Dates 2026 सूची (17 अक्टूबर 2026 को संशोधित) — मतभेद वाली तारीखों के मिलान के लिए
  • PanchangBodh — विवाह मुहूर्त पृष्ठ (नई दिल्ली) — भिन्न तारीखों की तुलना के लिए

सूचना: यहाँ दी गई तिथियाँ और समय 31 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध पंचांग स्रोतों से लिए गए हैं और नई दिल्ली के लिए मान्य हैं। मुहूर्त की गणना पद्धति, अयनांश और स्थान के अनुसार बदलती है — अपने नगर के पंचांग या पंजिका तथा योग्य पुरोहित से पुष्टि अवश्य कराएँ। यह पृष्ठ सामान्य जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत कुंडली-आधारित परामर्श का विकल्प नहीं। बालिग व्यक्तियों को अपनी इच्छा से विवाह करने का पूर्ण कानूनी अधिकार है।

उपयोगी लगा? साझा करें:TelegramFacebookX