दस महाविद्याओं में आठवीं शक्ति माँ बगलामुखी को “शत्रु-नाशिनी” और “पीताम्बरा” कहा जाता है। इनका मूल मंत्र है — “ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिह्वाम कीलय-कीलय बुद्धिम विनाशाय ह्लीं ॐ नम:” (स्रोत: वेबदुनिया)। परंपरा के अनुसार यह मंत्र शत्रु-बाधा, कोर्ट-कचहरी के विवाद और वाणी/बुद्धि से जुड़ी नकारात्मकता को शांत करने की भावना से जपा जाता है। इस लेख में हम मंत्र का अर्थ, पारंपरिक जप विधि, वस्त्र-नियम और प्रमुख मंदिरों की जानकारी सरल भाषा में दे रहे हैं — किसी गुप्त सिद्धि-प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि एक भक्तिभाव आधारित परिचय के रूप में।
इस लेख में
माँ बगलामुखी कौन हैं — पीतांबरा स्वरूप
माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं देवी हैं। इन्हें “पीताम्बरा माँ” भी कहा जाता है क्योंकि इनकी उपासना में पीला रंग—वस्त्र, आसन, पुष्प और नैवेद्य—विशेष महत्व रखता है। शास्त्रों में इन्हें स्तम्भन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी बताया गया है, अर्थात नकारात्मक वाणी, भ्रामक विचार और शत्रुतापूर्ण प्रयासों को रोकने वाली शक्ति। प्रभासाक्षी के एक लेख के अनुसार बगलामुखी जयंती (2026 में 24 अप्रैल) पर इन्हें “शत्रु नाशिनी” कहकर स्मरण किया जाता है, और श्रीमद्देवी भागवत महापुराण में दस महाविद्याओं की उत्पत्ति-कथा का वर्णन मिलता है।
पौराणिक कथा के अनुसार जब सृष्टि पर एक भीषण तूफान का संकट आया, तब देवी ने पीत वर्ण में प्रकट होकर उस संकट को स्तम्भित (रोक) कर दिया था। इसी कारण उनका एक नाम “स्तम्भन शक्ति” भी है, और इसी प्रतीकात्मकता के चलते भक्त इन्हें बाधाओं, विवादों और शत्रु-प्रभाव को रोकने वाली देवी के रूप में स्मरण करते हैं।
मूल मंत्र और अर्थ
वेबदुनिया के अनुसार माँ बगलामुखी का मूल मंत्र इस प्रकार दिया गया है:
“ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिह्वाम कीलय-कीलय बुद्धिम विनाशाय ह्लीं ॐ नम:”
— स्रोत: hindi.webdunia.com
पारंपरिक रूप से इस मंत्र को इस भाव से समझाया जाता है: “हे बगलामुखी देवी, समस्त दुष्ट प्रवृत्तियों की वाणी, मुख और गति को स्तम्भित कीजिए, जिह्वा को नियंत्रित कीजिए और नकारात्मक बुद्धि का नाश कीजिए।” अर्थात यह मंत्र किसी व्यक्ति को हानि पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि साधक के जीवन में आने वाली शत्रुतापूर्ण, भ्रामक अथवा विवादास्पद ऊर्जाओं को शांत करने की भावना से जपा जाता है — यह भेद समझना ज़रूरी है।
इसके अतिरिक्त प्रभासाक्षी पर एक संक्षिप्त मूल मंत्र भी मिलता है — “ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नमः” — जिसे नित्य स्मरण या संक्षिप्त जप हेतु उपयोग में लाया जाता बताया गया है। इसी लेख में एक गायत्री-शैली मंत्र का भी उल्लेख है: “ह्लीं बगलामुखी विद्महे दुष्टस्तंभनी धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्॥” — इसका भाव देवी से बुद्धि और विवेक की प्रार्थना करना है।
जप विधि और नियम
पारंपरिक ग्रंथों और लोक-मान्यताओं के अनुसार बगलामुखी उपासना में कुछ सामान्य नियमों का पालन किया जाता है:
- पीत वस्त्र: साधक पीले रंग के वस्त्र धारण करता है, क्योंकि देवी का संपूर्ण स्वरूप पीतवर्णी माना गया है — आसन, वस्त्र और नैवेद्य तीनों में यही रंग प्रधान रहता है।
- रुद्राक्ष माला: जप के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग परंपरागत रूप से बताया जाता है। वेबदुनिया के अनुसार भय-निवारण संबंधी एक मंत्र रुद्राक्ष माला से जपने और दक्षिण दिशा की ओर मुख करने का उल्लेख करता है।
- दिशा और आसन: भिन्न-भिन्न प्रयोजनों के लिए अलग दिशा (जैसे दक्षिण या पश्चिम) की ओर मुख करने की परंपरा बताई जाती है; सामान्यतः पीले आसन पर बैठकर जप का विधान है।
- समय और संख्या: जप सामान्यतः निश्चित माला-संख्या में पूर्ण किया जाता है, और नियमितता को अधिक महत्व दिया जाता है।
यहाँ हम जानबूझकर किसी विस्तृत, चरण-दर-चरण सिद्धि-प्रक्रिया या हवन-विधि का वर्णन नहीं कर रहे, क्योंकि तांत्रिक प्रकृति की गहन साधनाएँ बिना समुचित मार्गदर्शन के उचित नहीं मानी जातीं। सामान्य भक्त के लिए नियमित श्रद्धापूर्वक नाम-स्मरण और उपरोक्त सामान्य नियमों का पालन पर्याप्त माना जाता है।
दतिया और नलखेड़ा मंदिर
माँ बगलामुखी की उपासना के दो प्रमुख केंद्र मध्य प्रदेश में स्थित माने जाते हैं — दतिया का पीताम्बरा पीठ और नलखेड़ा का प्राचीन बगलामुखी मंदिर। दतिया स्थित पीताम्बरा पीठ को विशेष रूप से राजनैतिक और कानूनी सफलता की कामना लेकर आने वाले भक्तों का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जबकि नलखेड़ा मंदिर भी सिद्ध शक्तिपीठों में गिना जाता है और यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुँचते हैं। इन दोनों स्थलों को परंपरागत रूप से बगलामुखी भक्ति का केंद्र-बिंदु माना जाता है, यद्यपि इस विशेष जानकारी की पुष्टि प्रस्तुत लेख में उद्धृत चार स्रोतों में सीधे तौर पर नहीं मिलती।
सावधानी और गुरु मार्गदर्शन
बगलामुखी साधना तांत्रिक श्रेणी की मानी जाती है, इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
- यह लेख केवल सामान्य परिचय और भक्तिभाव जागृत करने हेतु है — किसी गुप्त सिद्धि, वशीकरण या “शत्रु पर शक्ति” जैसे दावों का समर्थन नहीं करता।
- गहन या विशिष्ट प्रयोजन वाली साधना (जैसे हवन, विशेष मंत्र-सिद्धि) सदैव किसी योग्य एवं अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।
- कानूनी विवाद (कोर्ट-केस) में देवी की उपासना को केवल मानसिक संबल और सकारात्मकता के स्रोत के रूप में देखा जाना चाहिए, कानूनी प्रक्रिया या वकील की सलाह का विकल्प नहीं।
- कोर्ट-केस बाधा से जुड़ी विस्तृत उपासना-विधि पर हम आगामी लेख में विस्तार से चर्चा करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. बगलामुखी मंत्र किसके लिए जपा जाता है?
परंपरा के अनुसार यह मंत्र शत्रु-बाधा, वाद-विवाद, कोर्ट-केस संबंधी उलझनों और नकारात्मक वाणी/विचारों से बचाव की भावना से जपा जाता है।
2. क्या बगलामुखी मंत्र जपने के लिए पीला वस्त्र पहनना अनिवार्य है?
परंपरागत मान्यता के अनुसार पीला वस्त्र और पीत आसन देवी के पीताम्बरा स्वरूप के अनुरूप माने जाते हैं और अधिकतर साधक इसका पालन करते हैं, हालांकि यह श्रद्धा और स्थानीय परंपरा पर निर्भर करता है।
3. बगलामुखी मंत्र जप के लिए कौन-सी माला उपयोग करें?
सामान्यतः रुद्राक्ष माला का उपयोग बताया जाता है।
4. क्या बगलामुखी साधना अकेले घर पर की जा सकती है?
सामान्य नाम-स्मरण और भक्तिभाव पूर्ण जप घर पर किया जा सकता है, परंतु गहन तांत्रिक साधना के लिए योग्य गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक माना जाता है।
5. दतिया और नलखेड़ा मंदिर का क्या महत्व है?
इन्हें माँ बगलामुखी की उपासना के प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहाँ भक्त विशेष रूप से बाधा-निवारण और सफलता की कामना लेकर दर्शन हेतु जाते हैं।
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अस्वीकरण
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और धार्मिक/आध्यात्मिक परिचय हेतु है। इसमें दी गई सामग्री किसी चिकित्सकीय, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी गहन तांत्रिक साधना से पूर्व योग्य एवं अनुभवी गुरु का मार्गदर्शन अवश्य लें।
स्रोत
- वेबदुनिया — माँ बगलामुखी मंत्र
- प्रभासाक्षी — शत्रु और रोगों से मुक्ति हेतु बगलामुखी मंत्र
- प्रभासाक्षी — बगलामुखी जयंती और शत्रुता-समापन अनुष्ठान
- Tantra Sadhana App — शरद नवरात्रि 2026: तिथियाँ, महत्व और अनुष्ठान



